<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144</id><updated>2012-02-16T01:14:16.102-08:00</updated><title type='text'>देशहित</title><subtitle type='html'>www.kranti4people.com</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>70</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-8799712705491017231</id><published>2011-10-20T03:41:00.001-07:00</published><updated>2011-10-20T03:43:57.189-07:00</updated><title type='text'>पुलिस ने थाने में नंगा करके पिटायी की</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-7n7a0Zq3NzI/Tp_7YAdgW8I/AAAAAAAAAI4/Vp0I5tvHyJQ/s1600/police%2Bbrutality.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 148px; height: 102px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-7n7a0Zq3NzI/Tp_7YAdgW8I/AAAAAAAAAI4/Vp0I5tvHyJQ/s320/police%2Bbrutality.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5665523246114560962" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;उ0प्र0 पुलिस का खौफनाक चेहरा उजागर हुआ&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रामाधार फाउण्डेशन के संस्थापक, न्यासी रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने रामदयालगंज बाजार, जौनपुर के निवासी हरीश चन्द्र जायसवाल पुत्र श्री स्व0 गौरीशंकर जायसवाल के पुत्र आशीष जायसवाल व सतीश को थाने में नंगाकर पिटायी करने की बर्बर कुकृत्य की घोर निंदा की है। रामाधार फाउण्डेशन ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर थाना लाइन बाजार, जौनपुर के दोषी पुलिस कर्मियों सब इंस्पेक्टर मदन मोहन राय व सिपाही देवेन्द्र यादव को तुरंत बर्खास्त कर देने की मांग की है। ज्ञात रहे कि 13 अक्टूबर 2011 की रात लगभग दो बजे अपने घर में सो रहे हरीशचन्द्र जायसवाल को किसी की आहट महसूस हुई। वो किसी चोर की आशंका से टोह लेने के इरादे से अपने बेटे आशीष और सतीश के साथ घर से बाहर निकले। बाहर निकलने पर तीनों पुत्र-पिता ने वहां पर अपने पड़ोसी महेश जायसवाल और दिनेश जायसवाल को देखा। महेश और दिनेश ने तीनों पिता और पुत्र को देखकर अचानक मार दिया, मार दिया का शोर मचाना शुरु कर दिया और पुलिस बुला ली। आनन-फानन में वहां पहुंचे सब इंसपेक्टर मदन मोहन राय और सिपाही देवेन्द्र यादव पांचों को थाना लाइन बाजार ले गये।&lt;br /&gt;थानें में दोनों पुलिस कर्मियों ने आशीष और सतीश के दोनों हांथ ऊपर कराकर बांध दिया। सब इंसपेक्टर मदन मोहन राय ने कहा मारो साले माधरचोदों (मां की गंदी गाली) को। सिपाही देवेन्द्र यादव ने कहा कि मेरा चेहरा अच्छी तरह देख लो जीवन में कभी भूलेगा नही। फिर दोनों ने आशीष और सतीश को नंगा कर थाने के अंदर ही बर्बरता पूर्वक पिटाई की। द्विवेदी ने आगे कहा कि दोनों पुलिस कर्मियों ने जो घृणित, बर्बरतापूर्ण व अमानवीय कार्य किया है, उसकी पूरे देश में भर्त्सना की जानी चाहिये। ऐसे पुलिस कर्मियों को सेवा में रहने का कोई हक नही है। &lt;br /&gt;श्री द्विवेदी ने राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश के डीजीपी, जौनपुर के डीएम और एसपी को भी ईमेल से सारे घटना की जानकारी दे दी है। उन्होने कहा कि यदि 15 दिन के भीतर कोई कार्रवाई नही की गयी तो रामाधार फाउण्डेशन जिला-जौनपुर थाना-लाईन बाजार के दोषी पुलिस कर्मियों को बर्खास्त करने के लिये जौनपुर पुलिस प्रशासन के खिलाफ आंदोलन चलायेगी। उन्होने आगे कहा कि आशीष और सतीश की निर्ममता से नग्न करके पिटायी करने का पुलिस का कोई औचित्य नही है। यह थर्ड डिग्री की श्रेणी में एकपक्षीय कार्रवाई नजर आती है। थाने के पुलिस ने निर्ममतापूर्वक पिटायी का एफआईआर भी दर्ज नही किया और न ही मेडिकल करवाया। इससे पुलिस के गंदे इरादे स्पष्ट होते हैं।&lt;br /&gt;श्री द्विवेदी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में हरीशचंद्र जायसवाल के पड़ोसी महेश की गिरफ्तारी की मांग की है। ज्ञात रहे कि जमानत मिलने के बाद महेश और दिनेश हरीशचंद्र जायवाल के बेटों आशीष और सतीश को धमकी दे रहे हैं कि उन्होंने पैसे की ताकत पर सब इंसपेक्टर और सिपाही देवेंद्र यादव को अपने साथ मिलाकर उनकी थाने में पिटायी करवायी और आगे भी ऐसा होता रहेगा।हरीशचंद्र जायसवाल का पड़ोसी महेश बार-बार धमका रहा है कि मेरी पहुंच मायावती मुख्यमंत्री व बड़े-बड़े मंत्रियों तक है मैं कुछ भी करवा सकता हूं। पिता हरीशचंद्र जायसवाल का आरोप है कि उनके दोनों बेटों को फिर से पुलिस की मिली भगत से जान से मारने की धमकी दी जा रही है। &lt;br /&gt;श्री द्विवेदी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह बता दिया है कि उपरोक्त परिस्थितियों से हरीशचंद्र जायसवाल मानसिक रूप से अत्यंत व्यथित है। हालात यहां तक आ गयी है कि वे आत्महत्या के कगार पर पहुंच गये हैं। द्विवेदी ने कहा कि  यदि ऐसा होता है तो उसके लिये थाना लाइन बाजार की पुलिस जिम्मेदार होगी।&lt;br /&gt;श्री द्विवेदी ने धमकी देने वाले पुलिस को भी बर्खास्त करने की मांग की है। ज्ञात रहे कि  पुलिस वाले हरीचंद्र को धमका रहे हैं कि थाने में उनके बेटों की नंगा करके पिटायी के  मामले पर यदि कहीं मुंह खोला तो उनको व उनके बेटे को ऐसे फर्जी जुल्म में फंसाया जायेगा कि उनकी व उनके बेटों की जमानत तक नही होगी। पूरी उम्र जेल में ही काटनी पड़ेगी।&lt;br /&gt;श्रीरामाधार फाउण्डेशन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निम्नलिखित मांग की है:-&lt;br /&gt;1) आशीष और सतीश को नग्न करके पीटने जैसी अमानवीय अत्याचार और पुलिस उतपीड़न की घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाये।&lt;br /&gt;2) पुलिस की महेश और दिनेश के साथ पैसे के बल पर मिली भगत के आरोप की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाये।&lt;br /&gt;3) जान से मारने की धमकी देने के आरोप में महेश और दिनेश पर समुचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाये।&lt;br /&gt;4) अमानवीय अत्याचार और पुलिस उत्पीड़न के आरोप  की जांच पूरी होने तक सब इंस्पेक्टर मदन मोहन राय और सिपाही देवेन्‍द्र  यादव को निलंबित किया जाये।&lt;br /&gt;5) हरीश चंद्र जायसवाल की एक लाइसेंसी बंदूक है जिसे पुलिस ने धमकाकर जमा करवा लिया है, पुलिस ने धमकी दी कि यदि जमा नही करोगे तो चालान करके जब्त कर लिया जायेगा। अतः हरीश चंद्र जायसवाल की बंदूक को तुरंत वापस दिलवायी जाये। वो लाइसेंसी बंदूक उनकी व उनके परिवार की आत्मरक्षा के लिये है। महेश और दिनेश से उनके परिवार को जान को खतरा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-8799712705491017231?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/8799712705491017231/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=8799712705491017231' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8799712705491017231'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8799712705491017231'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='पुलिस ने थाने में नंगा करके पिटायी की'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-7n7a0Zq3NzI/Tp_7YAdgW8I/AAAAAAAAAI4/Vp0I5tvHyJQ/s72-c/police%2Bbrutality.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-8180923959064061288</id><published>2011-06-09T23:38:00.000-07:00</published><updated>2011-06-09T23:39:03.893-07:00</updated><title type='text'>सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक राष्‍ट्रविरोधी शक्तियों ने तैयार किया-डॉ0 संतोष राय</title><content type='html'>&lt;strong&gt;बाबा के सेना गठन का हिन्‍दू महासभा ने स्‍वागत किया&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बाबा पंडित नंद किशोर मिश्र ने यूपीए सरकार पर हमला बोलते  हुये कहा कि जिस राष्ट्र की संस्कृति का बीजमंत्र ‘‘यत्र नारियस्तु पूज्यंते  तत्र रमते देवता’’ हो उस देश में आधी रात के बाद रामलीला मैदान में बाबा श्रीरामदेव जी के आमरण अनशन के समर्थन में भाग लेने वाले निद्रा निमग्न माताओं, बहनों, बालकों, वृद्धों एवं अपंगों पर पुलिस का हिंसक आक्रमण, कांग्रेस शासन द्वारा हिन्दुओं का क्रूरतम दमन एवम् लोकतंत्र की हत्या है। परंतु कांग्रेस यह भूल गयी है कि- &lt;br /&gt;यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।&lt;br /&gt;अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥७॥&lt;br /&gt;परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।&lt;br /&gt;धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥८॥&lt;br /&gt;श्रीमद्भगवद्गीताए अध्याय ४&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस हिन्दू भूमि पर जब जब ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हुयी हैं तब-तब धर्म रक्षक वीरों का प्रार्दुभाव हुआ है। वीरों की जननी इस धरा पर अधर्म का नाश करने के लिये वीर शिरोमणियों की श्रृंखला अनवरत चलती रही है। हिन्दू महासभा इन्ही परम् वीर बलिदानियों की धरोहर है जो स्वातंत्र्य वीर सावरकर, अमर हुतात्मा पंडित नाथू राम गोडसे, मदन लाल ढींगरा, उधम सिंह, भगत सिंह, चंद्र शेखर आजाद, भाई बाल मुकंद, जैसे महान् विभूतियों की मातृ संस्था रही है। जब भी लोकतंत्र की हत्या हुयी है जनता के अधिकारों को क्रूरता पूर्वक दबाने का प्रयास हुआ है, नारी शक्ति का अपमान हुआ है, अबोध बालकों, अपंगो, वृद्धों पर प्रहार हुआ है हिन्दू महासभा ने इसका तीव्र प्रतिकार किया है।&lt;br /&gt;चार जून की अर्ध रात्रि से लेकर पांच जून के प्रातःकाल तक ऐतिहासिक रामलीला मैदान में सोनिया निर्देशित भ्रष्टतम सरकार द्वारा जो क्रूरता एवं हिन्दू विरोध का नग्न ताण्डव किया गया, उसका अखिल भारत हिन्दू महासभा घोर निंदा करती है।&lt;br /&gt;बाबा श्री नन्द किशोर जी ने स्वातंत्र्य वीर सावरकर द्वारा प्रतिपादित ‘‘हिन्दुओं के सैनिकीकरण तथा राजनीति के हिन्दूकरण’’ के सिद्धांत के अनुरूप बाबा श्री रामदेव जी द्वारा ग्यारह हजार सशस्त्र स्वयं सेवकों के गठन का हार्दिक स्वागत एवं हिन्दू महासभा की ओर से समर्थन किया है। गांधीवादी नपुंसकता के सिद्धांत को मानने वाले कांग्रेसी राजनीतिज्ञों द्वारा हिन्दुओं पर क्रूरतम प्रहार एवं हिन्दू संत महात्माओं के हत्या के प्रयास की हिन्दू महासभा तीव्र भर्त्सना करती है।&lt;br /&gt;‘‘इन्द्रप्रस्थ के राजभवन में, जाने कैसे मंत्र चले, हार गये हैं धर्मपुत्र जब शकुनि के षड्यंत्र चले। दुर्योधनी कुचालों वाला हुआ शुरू अभियान यहां, धर्मक्षेत्र अब कुरूक्षेत्र बनेगा पूरा हिन्दुस्थान यहां।’’&lt;br /&gt;जिस बाबा रामदेव के स्वागत में प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर चार-चार मंत्रियों ने एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी की हो जबकि दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष के आगमन पर सिर्फ एक राज्यमंत्री को स्वागत के लिये भेजा जाता है फिर अंधेरी रात में बाबा को ठग की संज्ञा प्रदान की जाती है, वे कांग्रेसी परिभाषा से अपराधी हो जाते हैं, राष्ट्रद्रोही हो जाते हैं यह संपूर्ण राष्ट्र एवं विश्व के समझ से परे है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके नेतृत्व द्वारा किया गया लोकतंत्र, मानवता एवं मानवाधिकार का हनन  समस्त मर्यादाओं से परे है। &lt;br /&gt;संपूर्ण राष्ट्र यह जानना चाहता है कि ऐसी क्या मजबूरी थी कि सरकार को ऐसे बर्बर एवं जघन्य कदम उठाने पड़े? इस आशय की निष्पक्ष जांच तब हो सकती है जब इस सरकार को निलंबित कर तत्काल न्यायिक जांच करायी जाये और राष्ट्र में जब तक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार नही हो जाती है तब तक राष्ट्रपति शासन लागू किया जाये।&lt;br /&gt;अखिल भारत हिन्दू महासभा स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ0 संतोष राय ने कहा कि सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक का प्रारूप सांप्रदायिक एवं राष्ट्र विरोधी शक्तियों के द्वारा तैयार किया गया है। अतः यह विधेयक भारत के दुर्भाग्य का कारण बनेगा।  इसका उदाहरण आपके सामने है, स्वतंत्रता से पूर्व इंग्लैन्ड की महारानी विक्टोरिया ने हम पर कम्युनल एवार्ड सौंपा था जिसे  कांग्रेस एवं गांधी ने स्वीकार किया था जिसका दुष्परिणाम भारत का सांप्रदायिक विभाजन और कत्लेआम में परिणित हुआ। आज यह विधेयक कम्युनल एवार्ड का दूसरा प्रारूप है। हिन्दू महासभा घोषणा करती है कि यह विधेयक किसी भी रूप में पास नही होने देंगे। यह बिल अपने आपमें घोर हिन्दू विरोधी एवं राष्ट्र विरोधी है।&lt;br /&gt;अखिल भारत हिन्दू महासभा के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक डॉ0 राकेश रंजन ने बताया कि विश्व के 73 देशों में बाबा रामदेव के कालेधन के खिलाफ आंदोलन को अभूतपूर्व समर्थन मिला तथा संपूर्ण विश्व शिविर अमानवीय आक्रमण से आहत है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-8180923959064061288?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/8180923959064061288/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=8180923959064061288' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8180923959064061288'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8180923959064061288'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/06/0.html' title='सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक राष्‍ट्रविरोधी शक्तियों ने तैयार किया-डॉ0 संतोष राय'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1777095782241989025</id><published>2011-03-31T01:35:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T01:35:04.138-07:00</updated><title type='text'>राहुल पंडित  (कर्त्तव्य पथ पर): भ्रष्टाचार से छिड़ी है जंग जनाब आप हैं किसके संग ?...</title><content type='html'>&lt;a href="http://rahulworldofdream.blogspot.com/2011/03/blog-post_03.html?spref=bl"&gt;राहुल पंडित  (कर्त्तव्य पथ पर): भ्रष्टाचार से छिड़ी है जंग जनाब आप हैं किसके संग ?...&lt;/a&gt;: "कृपया इस नंबर पर मिस  कॉल  करें आपका नंबर रिसीव नहीं किया जायेगा बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई.. यह ऊपर बैठे हुक्मरानों को रा..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1777095782241989025?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://rahulworldofdream.blogspot.com/2011/03/blog-post_03.html?spref=bl' title='राहुल पंडित  (कर्त्तव्य पथ पर): भ्रष्टाचार से छिड़ी है जंग जनाब आप हैं किसके संग ?...'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1777095782241989025/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1777095782241989025' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1777095782241989025'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1777095782241989025'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/blog-post_31.html' title='राहुल पंडित  (कर्त्तव्य पथ पर): भ्रष्टाचार से छिड़ी है जंग जनाब आप हैं किसके संग ?...'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-36808187585298697</id><published>2011-03-31T01:21:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T01:21:17.650-07:00</updated><title type='text'>Shreshthbharat</title><content type='html'>&lt;a href="http://www.shreshthbharat.in/2010/11/26/corrupt-media-reporters-brokers/"&gt;Shreshthbharat&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-36808187585298697?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://www.shreshthbharat.in/2010/11/26/corrupt-media-reporters-brokers/' title='Shreshthbharat'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' 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Shrama                  Represent: Dr. Santosh Rai...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-7114945510842440376?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/02/blog-post_463.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मुसलमान :राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/7114945510842440376/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=7114945510842440376' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/7114945510842440376'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/7114945510842440376'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_8564.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मुसलमान :राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-8902371858535206607</id><published>2011-03-31T00:13:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T00:13:12.296-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान&lt;/a&gt;: "http://jagohondujago.blogspot.com/2010/07/blog-post.html  हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान  1985 में अलकायदा की स्थापना ने बाद बाकी सारी दुन..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-8902371858535206607?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: हिन्दू मिटाओ- हिन्दू भगाओ अभियान'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/8902371858535206607/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=8902371858535206607' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8902371858535206607'/><link rel='self' 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बढ़ने से होने वाले दुष्परिणाम&lt;/a&gt;: "जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक मौलाना मौदूदी कहते हैं कि कुरान के अनुसार विश्व दो भागों में बँटा हुआ है, एक वह जो अल्लाह की तरफ़ हैं और दूसरा वे..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5866116517002825856?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_04.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मुस्लिम जनसंख्या बढ़ने से होने वाले दुष्परिणाम'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5866116517002825856/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5866116517002825856' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_06.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: नालायक लालू&lt;/a&gt;: "अखिल भारत हिन्दू महासभा के चुनाव स्वागत समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा0 संतोष राय, वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता नंद किशोर मिश्रा व दिल्ली प्रदेश कार..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-537033355578339838?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_06.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: नालायक लालू'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/537033355578339838/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=537033355578339838' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_2378.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: विश्व में हिन्दू देश एक अथवा दो नहीं वरन १३&lt;/a&gt;: &amp;quot;    जब लोग कहते हैं कि विश्व में केवल एक ही हिन्दू देश है तो यह पूरी तरह गलत है यह बात केवल वे ही कह सकते हैं जो हिन्दू की प...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-2027523848203539146?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_2378.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: विश्व में हिन्दू देश एक अथवा दो नहीं वरन १३'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/2027523848203539146/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=2027523848203539146' 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पर हिन्दू महासभा का प्र...</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_575.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इटली में सिख पगड़ी के अपमान पर हिन्दू महासभा का प्र...&lt;/a&gt;: "इटली से संबंध विच्छेद व अपराधी एयरपोर्ट अधिकारी को गिरफ्तार करने की मांग इटली में भारतीय संस्कृति का सुनियोजित, अनवरत अपमान पर आज हिन्दू मह..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-7220912865786779429?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_575.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इटली में सिख पगड़ी के अपमान पर हिन्दू महासभा का प्र...'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/7220912865786779429/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-3680610063151489314</id><published>2011-03-31T00:11:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T00:11:14.383-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मूर्ति लगाने के लिये संसद में जगह नहीं है</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_09.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मूर्ति लगाने के लिये संसद में जगह नहीं है&lt;/a&gt;: "संसद में पंडित नाथू राम गोडसे की मूर्ति लगाने के लिये जगह नहीं है। ज्ञात रहे कि 2/02/2011 को हिन्दू महासभा के रिसेप्शन कमेटी के अध्यक्ष डाॅ..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-3680610063151489314?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_09.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मूर्ति लगाने के लिये संसद में जगह नहीं है'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/3680610063151489314/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=3680610063151489314' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3680610063151489314'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3680610063151489314'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_2777.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मूर्ति लगाने के लिये संसद में जगह नहीं है'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1240869926671771883</id><published>2011-03-31T00:10:00.002-07:00</published><updated>2011-03-31T00:10:42.584-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आईसीएसई ने शहिद भगत सिंह को 'आतंकवादी', बताया</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_10.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आईसीएसई ने शहिद भगत सिंह को &amp;#39;आतंकवादी&amp;#39;, बताया&lt;/a&gt;: &amp;quot;तिलक रेलन                     &amp;amp;nbsp...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1240869926671771883?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_10.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आईसीएसई ने शहिद भगत सिंह को &apos;आतंकवादी&apos;, बताया'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1240869926671771883/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1240869926671771883' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1240869926671771883'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1240869926671771883'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_6852.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आईसीएसई ने शहिद भगत सिंह को &apos;आतंकवादी&apos;, बताया'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-936250733064863451</id><published>2011-03-31T00:10:00.001-07:00</published><updated>2011-03-31T00:10:23.591-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: हिंदूं कालगणना</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_8698.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: हिंदूं कालगणना&lt;/a&gt;: "डॉ. संतोष राय   १५ निमेष = १ काष्ठा  ३० काष्ठा = १ कला  ३० कला = १ मुहूर्त  ३० मुहूर्त = १ दिन- रात (दिवस)  १५ दिन- रात = १ पक्ष  २ पक्ष = १..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: हिंदूं कालगणना'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-904234203845518513</id><published>2011-03-31T00:10:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T00:10:04.991-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: दशोपदेश</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_11.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: दशोपदेश&lt;/a&gt;: &amp;quot;बी.एन. शर्मा                   प्रस्तुति: डॉ. संत...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-904234203845518513?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_11.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: दशोपदेश'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/904234203845518513/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=904234203845518513' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/904234203845518513'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/904234203845518513'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_1382.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: दशोपदेश'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image 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माता-पिता, दो भाई और वह खुद। बमुश्किल जम्मू ..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5906071268717898748?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_13.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: कश्मीरी पंडितों पर यह अत्याचार नहीं तो क्या है'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5906071268717898748/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5906071268717898748' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5906071268717898748'/><link rel='self' type='application/atom+xml' 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मिलेगी&lt;/a&gt;: &amp;quot;  Represent: Dr. Santosh Rai इस्‍लाम का उदृदेश्य आतंक और सेक्स है यह मेरा कहना नही है किन्‍तु जब इस्‍लाम से सम्‍बन्धित ग्रंथो का आध्‍यय...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5517996444558543482?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_17.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इस्‍लाम का संदेश आतंक मचाओ हूर मिलेगी'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5517996444558543482/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5517996444558543482' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_18.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: सोनिया सरकार साध्वी प्रज्ञा को मरवा डालना चाहती है...&lt;/a&gt;: "Represent: Dr. Santos Rai  मालेगांव बम विस्फोट में आरोपी के शक में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा बुरी तरह बीमार है. चालीस वर्षीय साध्वी की हालत इत..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-8706395213780614690?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_18.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: सोनिया सरकार साध्वी प्रज्ञा को मरवा डालना चाहती है...'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/8706395213780614690/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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Sharma         Represent: Dr. Santosh Rai  जिहाद शब्द का जन्म इस्लाम के जन्म के...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-6867820674821100564?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_8462.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: जिहाद का जवाब धर्मयुद्ध'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/6867820674821100564/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=6867820674821100564' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6867820674821100564'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6867820674821100564'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_2506.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: जिहाद का जवाब धर्मयुद्ध'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-3007173242420561915</id><published>2011-03-31T00:07:00.002-07:00</published><updated>2011-03-31T00:07:48.436-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आतंक के प्रेरणास्त्रोत</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_9959.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आतंक के प्रेरणास्त्रोत&lt;/a&gt;: &amp;quot;बलबीर पुंज                     &amp;amp;nbs...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-3007173242420561915?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_9959.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आतंक के प्रेरणास्त्रोत'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/3007173242420561915/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=3007173242420561915' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3007173242420561915'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3007173242420561915'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_5949.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: आतंक के प्रेरणास्त्रोत'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1767513219056894305</id><published>2011-03-31T00:07:00.001-07:00</published><updated>2011-03-31T00:07:22.825-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: स्पेक्ट्रम घोटाले में सोनिया गाँधी की बहनों का हिस...</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/30-30_22.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: स्पेक्ट्रम घोटाले में सोनिया गाँधी की बहनों का हिस...&lt;/a&gt;: "Represent: dr. Santosh Rai  जी स्पेक्ट्रम घोटाले में प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह की ईमानदारी को बेनकाब करने वाले सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप ल..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1767513219056894305?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/30-30_22.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: स्पेक्ट्रम घोटाले में सोनिया गाँधी की बहनों का हिस...'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1767513219056894305/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1767513219056894305' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1767513219056894305'/><link rel='self' 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"जन्मशती पर विशेष  बटुकेश्वर दत्त (नवंबर १९०८ - १९ जुलाई १९६५) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रान्तिकारी थे। क्रांतिकारी और स्वतंत्रता ..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-7287803007363774282?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_22.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: बटुकेश्वर दत्त'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/7287803007363774282/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=7287803007363774282' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/7287803007363774282'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/7287803007363774282'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_3005.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: बटुकेश्वर दत्त'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-990459750273958058</id><published>2011-03-31T00:06:00.001-07:00</published><updated>2011-03-31T00:06:39.558-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मुहम्मद पैगम्बर खुद जन्मजात हिंदू थे और काबा हिंदू...</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_26.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मुहम्मद पैगम्बर खुद जन्मजात हिंदू थे और काबा हिंदू...&lt;/a&gt;: &amp;quot;अवलीक भारतीय       प्रस्‍तुति-डॉ0 संतोष रायमुसलमान कहते हैं कि कुरान ईश्वरीय वाणी है तथा यह धर्म अनादि का...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-990459750273958058?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_26.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: मुहम्मद पैगम्बर खुद जन्मजात हिंदू थे और काबा हिंदू...'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/990459750273958058/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=990459750273958058' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/990459750273958058'/><link 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Mahasabha: ये आतंकवाद की आग बुझाएंगे या भड़काएंगे&lt;/a&gt;: &amp;quot;  -डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन    Represent: Dr. Santosh Rai    देवबन्द में पिछले दिनों तथाकथित उलेमाओं की बहुचर...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4896930814339747996?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_28.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: ये आतंकवाद की आग बुझाएंगे या भड़काएंगे'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4896930814339747996/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4896930814339747996' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' 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href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_29.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: अल्लाह हमें रोने दो&lt;/a&gt;: &amp;quot;लेखिका - जहांआरा बेगम अनुवादक - स्वामी अमृतानन्द  ओमकारेश्वर महादेव  आर. वी. देसाई मार्ग  बड़ौदा  प्रस्‍तुतिः डॉ0 संतोष ...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4360531927759379775?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_29.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: अल्लाह हमें रोने दो'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4360531927759379775/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4360531927759379775' title='0 Comments'/><link rel='edit' 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href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/loan-waiver-scheme-for-christian.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: Loan Waiver Scheme for Christian converts&lt;/a&gt;: "The State has been witnessing an unprecedented scale of relief measures under the present Government, said Minister of Welfare of Scheduled ..."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-6736295290272954514?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/loan-waiver-scheme-for-christian.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: Loan Waiver Scheme for Christian converts'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/6736295290272954514/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' 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src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-8030725697228212402</id><published>2011-03-31T00:04:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T00:04:36.244-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: भारत के मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_30.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: भारत के मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है&lt;/a&gt;: &amp;quot; प्रस्‍तुतिः डॉ0 संतोष राय  निम्न पाठ्यक्रमों से स्पश्ट है कि मुसलमान बच्चों को किस प्रकार की षिक्षा, मदरसों और मख्तबों में दी जाती है।...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-8030725697228212402?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_30.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: भारत के मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/8030725697228212402/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=8030725697228212402' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8030725697228212402'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8030725697228212402'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_2640.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: भारत के मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-3154343887357720626</id><published>2011-03-31T00:03:00.002-07:00</published><updated>2011-03-31T00:03:53.268-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: Double Standards of Congress</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/double-standards-of-congress.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: Double Standards of Congress&lt;/a&gt;: "Reperesent: Dr. Santosh Rai  कांग्रेस से ज्यादा घिनौनी पार्टी कोई और है? Double Standards of Congressजरा इनके बयानों का विरोधाभास देखिये......."&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-3154343887357720626?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/double-standards-of-congress.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: Double Standards of Congress'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/3154343887357720626/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=3154343887357720626' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3154343887357720626'/><link rel='self' type='application/atom+xml' 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पुलिसने शिव मंदिर...&lt;/a&gt;: &amp;quot;Prabal Pratap Singh               Represent: Dr.Santosh Rai   कोलकाता ...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-2863401286610191082?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_5565.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: कलकत्ता में मुसलमानोंके उकसानेपर पुलिसने शिव मंदिर...'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/2863401286610191082/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=2863401286610191082' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2863401286610191082'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2863401286610191082'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha_31.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: कलकत्ता में मुसलमानोंके उकसानेपर पुलिसने शिव मंदिर...'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-4533175630837629104</id><published>2011-03-31T00:03:00.000-07:00</published><updated>2011-03-31T00:03:08.708-07:00</updated><title type='text'>Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इस्लाम की आधुनिक समस्याएं</title><content type='html'>&lt;a href="http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_4046.html?spref=bl"&gt;Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इस्लाम की आधुनिक समस्याएं&lt;/a&gt;: &amp;quot;           Irsad Manji  इरशाद मांझी      Dr.Santosh Rai   &amp;amp;n...&amp;quot;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4533175630837629104?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://abhindumahasabha.blogspot.com/2011/03/blog-post_4046.html?spref=bl' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इस्लाम की आधुनिक समस्याएं'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4533175630837629104/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4533175630837629104' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4533175630837629104'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4533175630837629104'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/akhil-bharat-hindu-mahasabha.html' title='Akhil Bharat Hindu Mahasabha: इस्लाम की आधुनिक समस्याएं'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-4997078387976663355</id><published>2011-03-08T03:38:00.000-08:00</published><updated>2011-03-08T03:41:05.488-08:00</updated><title type='text'>वीर सावरकर, गाँधी जी एवम् आर.एस.एस.</title><content type='html'>(भारत विभाजन के संदर्भ में)&lt;br /&gt;                                    टी.डी. चाँदना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    अनेक लोग आश्चर्य करते हैं कि भारत में हिन्दुओं के इतने बहुमत के पश्चात्, वीर सावरकर एवम् गाँधी जी जैसे सशक्त नेताओं के रहते और आर.एस.एस. जैसे विशाल हिन्दू संगठन की उपस्थिति के उपरान्त भी 1947 ई0 में हिन्दुओं ने मुस्लिम लीग की विभाजन की माँग को बिना किसी युद्ध व संघर्ष के कैसे स्वीकार कर लिया।&lt;br /&gt;इन सबका कारण जानने के लिए मैंने अनेक पुस्तकों एवं प्रख्यात लेखकों के लेखों का अध्ययन किया जैसे कि श्री जोगलेकर, श्री विद्यासागर आनंद, वरिष्ठ प्रवक्ता विक्रम गणेश ओक, श्री भगवानशरण अवस्थी एवं श्री गंगाधर इन्दुलकर। इस प्रकार मेरा निष्कर्ष उनके दृष्टिकोण एवं मेरे स्व अनुभव पर आधारित है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सर्वप्रथम मैं नीचे वीर सावरकर व गाँधी जी की विशेषताओं और नैतिक गुणों का विवरण देता हूँ जो विभाजन के समय भारतीय राजनीति के पतवार थे, उस समय के आर.एस.एस के नेताओं का विवरण दूँगा तत्पश्चात् मैं उन घटनाओं को उद्धृत करूँगा जो उन दिनों घटी जिनके फलस्वरूप विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वीर सावरकर एक युगद्रष्टा थे। बचपन से ही प्रज्वलित शूरवीरता के भाव रखते थे। अन्यायी अधिकारियों के विरोध के लिये सदैव तत्पर रहते थे। वह कार्य-शैली से भी उतने ही वीर थे जितने कि विचारों से। अपनी मातृभूमि को अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों से छुड़ाने के लिए उन्होंने एवं उनके परिवार के सभी सदस्यों ने परम त्याग किये। उन्होंने अपनी पार्टी  हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं के साथ मुस्लिम लीग की भारत विभाजन की नीति का पुरजोर विरोध किया और उनके डायरेक्ट एक्शन का सामना किया। वीर सावरकर जी ने अपनी पार्टी के साथ भारत को अविभाजित रखने के लिये अभियान चलाया। बड़ी संख्या में भारत एवं विदेशों में बुद्धिजीवी वर्ग ने वीर सावरकर के दृष्टिकोण हिन्दू राष्ट्रवाद को सराहा जो उन्होंने अपनी पुस्तक ‘हिन्दुत्व’ में प्रकाशित किया था। उन लोगों ने कहा कि वीर सावरकर का यह दृष्टिकोण साम्प्रदायिक न होकर वैज्ञानिक है और यह भारत को साम्प्रादायिकता, जातिवाद और क्षेत्रवाद से बचा सकता है।&lt;br /&gt;हिन्दू महासभा ने एवं आर.एस.एस. संस्थापकों ने वीर सावरकर द्वारा प्रतिपादित हिन्दू राष्ट्रवाद को अपनी पार्टी के बुनियाद विचारधारा के अंतर्गत अपनाया, परन्तु कांग्रेस ने सदैव यही प्रचार किया कि वीर सावरकर एवं हिन्दू महासभा साम्प्रदायिक एवं मुस्लिम विरोधी हैं। सन् 1940 के पश्चात डाॅ0 हेडगेवार के मृत्यु के बाद आर.एस.एस. ने भी सावरकर एवं हिन्दू महासभा को कलंकित करने का अभियान चलाया। वे वीर सावरकर के अद्भुत एवं ओजस्वी व्यक्तित्व को तो हानि नहीं पहुँचा पाये पर इस प्रकार के कारण बड़ी संख्या मंे हिन्दुओं को हिन्दू महासभा से दूर करने में सफल रहे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरी ओर गांधी जी बिना संशय के एक राजनेता थे। 25 वर्ष के दीर्घ अन्तराल तक वे स्वतन्त्रता के लिये प्रयत्नशील रहे। जबकि वे आॅल इण्डिया कांग्रेस के प्रारम्भिक सदस्य भी नहीं थे फिर भी वे पार्टी के सर्वे-सर्वा रहे। उन्होंने कभी भी उस व्यक्ति को कांग्रेस के उच्च पद पर सहन नहीं किया जो उनसे विपरीत दृष्टिकोण रखता था या उनके वर्चस्व के लिये संकट हो सकता था। उदाहरण के लिए सुभाष चन्द्र बोस आॅल इण्डिया कांग्रेस के अध्यक्ष चयनित हुए जो गांधी जी कि अभिलाषाओं के विरूद्ध थे। अतः गांधी एवं उनके अनुयायियों ने इतना विरोध किया कि उनके समक्ष झुकते हुये बोस को अपना पद त्याग करना पड़ा।&lt;br /&gt;समस्या यह थी कि गांधी जी का चरखा उनका कम वस्त्रों में साधुओं जैसे बाना उनकी महात्मा होने की छवि सामान्यतः धर्म भीरू हिन्दुओं को अधिक प्रभावित कर रही थी। उनका यह स्वरूप हिन्दू जनता को उनके नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करता था। इसी के रहते गांधी जी की राजनीति में बड़ी से बड़ी गलती भी हिन्दू समाज नजरअन्दाज करता रहा।&lt;br /&gt;गांधी जी के अनेंक अनुयायी उन्हें एक संत और राजनैतिक मानते हैं। वास्तव में वह दूरदर्शी न होने के कारण राजनीतिज्ञ नहीं थे और आध्यात्म से सरोकार न होने के  कारण संत भी नहीं थे। यह कहा जा सकता है कि सन्तों में वे राजनीतिज्ञ थे और राजनीतिज्ञ में संत। उनकी स्वीकार्यता का दूसरा कारण ब्रिटिश  सरकार की ओर से मिलेने वाला प्रतिरोधात्मक सहयोग और भारत की आम जनता में उनके भ्रम उत्पन्न करने वाले स्वरूप की पैठ। यही कारण था अंग्रेज सरकार गांधी जी को जेल में डालती थी(जहां उन्हें हर तरह की सुविधायें उपलब्ध रहती थी।) और उसके उपरान्त हर बात के लिये गांधी जी को ही पहले पूंछती भी थी। यह सहयोग उन्हें बड़ा व स्वीकार्य नेता बनाने में सहायक रहा। दूसरी ओर गांधी जी का अंग्रेजों को सहयोग भी कम नहीं रहा। ‘‘भगत सिंह को फांसी के मामले में गांधी जी का मौन व नकारात्मक रूख इसका ज्वलंत उदाहरण है परन्तु उनकी संतरूपी छवि व अंग्रेजों का सहयोग एवं हिन्दुओं के बीच उनकी भ्रामक संतई की छवि गांधीजी की स्वीकार्यता बनाती रही’’।&lt;br /&gt;गांधी जी कभी भी दृढ़ विचारों के व्यक्ति नहीं रहे। उदाहरणार्थ एक समय में वह मुस्लिम लीग की विभाजन की मांग को ठुकराते हुये बोले थे कि ‘‘भारत को चीरने से पहले मुझे चीरो’’। वह अपने विचारों में कितने गंभीर थे यह उनके शब्द ही उनके लिये बोलेंगे। कुछ ही महीनों के पश्चात 1940 में उन्होंने अपने समाचार पत्रों में लिखा कि मुसलमानों को संयुक्त रहने या न रहने के उतने ही अधिकार होने चाहिये जितने की शेष भारत को है। इस समय हम एक संयुक्त परिवार के सदस्य हैं और परिवार का कोई भी सदस्य पृथक रहने के अधिकार की मांग कर सकता है। दुर्भाग्य से जून 1947  में गांधी जी ने आॅल इण्डिया कांग्रेस के सदस्यों को मुस्लिम लीग की मांग के लिये समहत कराया तब पाकिस्तान की रचना हुई। इस प्रकार पाकिस्तान की सृष्टि के फाॅर्मूला (माउण्टबेटन फाॅर्मूला) को कांग्रेस ने अपना ठप्पा लगाया और पाकिस्तान अस्तित्व में आया।&lt;br /&gt;28 वर्षों के लम्बे समय में आजादी के आंदोलन में मुसलमानों की कोई भी सकारात्मक भूमिका न होने के पश्चात भी (जिनका स्वतंत्रता आन्दोलन में नगण्य सहयोग रहा)। गाँधी जी उन्हें रिझाने में लगे रहे। अपनी हताशा के चलते एक बार तो गांधी जी ने अंग्रेजों को भारत छोड़ते समय, भारत का राज्य मुसलमानों को सौंपने तक का सुझाव दे डाला। 1942 में मुहम्मद अली जिन्ना जो मुस्लिम लीग के अध्यक्ष थे, को लिखे पत्र में गांधी जी ने कहा ‘‘सभी भारतीयों की ओर से अंग्रेजों द्वारा मुस्लिम लीग को राज्य सौंपने पर हमें कोई भी आपत्ति नहीं है। कांग्रेस  मुस्लिम लीग द्वारा सरकार बनाये जाने पर कोई विरोध नहीं करेगी एवं उसमें भागीदारी भी करेगी।’’ उन्होंने कहा कि वह ‘‘पूरी तरह से गंभीर है और यह बात पूरी निष्ठा एवं सच्चाई से कह रहे हैं।’’&lt;br /&gt;परन्तु मुस्लिम लीग ने आग्रह किया कि वह पाकिस्तान चाहती है (मुसलमानों के लिये एक अलग देश) और इससे कम कुछ भी नहीं। मुस्लिम लीग ने स्वतंत्रता आंदोलन में कुछ भी सहयोग नहीं किया उल्टे अवरोध लगाये और मुसलमानों के लिये पृथक देश की मांग करती रही। उसने कहा कि हिन्दुओं और मुसलमानों में कुछ भी समानता नहीं है और वे कभी परस्पर शांतिपूर्वक नहीं रह सकते। मुसलमान एक पृथक राष्ट्र है अर्थात उनके लिये पृथक पाकिस्तान चाहिये। मुस्लिम लीग ने अंग्रेजों से कहा कि वे भारत तब तक न छोड़ें जब तक कि भारत का विभाजन न हो जाये और मुसलमानों के लिए पृथक देश ‘‘पाकिस्तान’’ का सृजन कर जायें।&lt;br /&gt;मुस्लिम नेतृत्व की इस मांग पर मुस्लिम लीग के डायरेक्ट एक्शन के कारण भारत में विस्त्रृत  रूप से दंगे हुये, जिसमें हजारों-लाखों हिन्दू  मारे गये और स्त्रियां अपमानित हुईं, परन्तु कांग्रेस व गांधी जी की मुस्लिम तुष्टीकरण व अहिंसा की नीति के अंर्तगत चुप ही रहे और किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। इस प्रकार नेहरू जी व गांधी जी ने पाकिस्तान की मांग के समक्ष अपने घुटने टेक दिये और कांग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं को भारत विभाजन अर्थात पाकिस्तान सृजन के लिये मना लिया।&lt;br /&gt;विभाजन के समय पूरे देश में भयंकर निराशा और डरावनी व्यवस्था छा गयी, कांग्रेस के भीतर एक कड़वी अनुभूति आ गयी। पूरे देश में एक विश्वासघात, घोर निराशा व भ्रामकता का बोध छा गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भावी अध्यक्ष श्री पुरूषोत्तम दास टण्डन के शब्दों में ‘‘गांधी जी की पूर्ण अहिंसा की नीति ही भारत विभाजन के लिये उत्तरदायी थी।’’ एक कांग्रेसी समाचार-पत्र ने लिखा-‘‘आज गांधी जी अपने ही जीवन के उद्देश्य (हिन्दू-मुस्लिम एकता) की विफलता के मूक दर्शक हैं।’’&lt;br /&gt;इस प्रकार गांधी जी की तुष्टीकरण वाली नीतियों एवं जिन्ना की जिद्द व डायरेक्ट एक्शन का कोई विरोध न करने के कारण गांधी जी एवं उनकी कांग्रेस को ही भारत विभाजन के लिये उत्तरदायी माना जाना चाहिये।&lt;br /&gt;यह था दोनों राजनीतिक पार्टी- हिन्दू महासभा (सावरकर के नेतृत्व में) व कांग्रेस (गांधी जी के नेतृत्व में) का एक संक्षिप्त वर्णन कि कैसे उन्होंने मुस्लिम लीग की पाकिस्तान सृजन की मांग का सामना किया।&lt;br /&gt;पाकिस्तान सृजन के अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये मुस्लिम लीग ने 1946 से ही डायरेक्ट एक्शन शुरू किया, जिसका उद्देश्य हिन्दुओं को भयभीत करना व कांग्रेस एवं गांधी जी को पाकिस्तान की मांग को मानने के लिये विवश करना था जिससे लाखों निर्दोष हिन्दुओं की हत्यायें हुईं और हजारों हिन्दू औरतों का अपहरण हुआ।&lt;br /&gt;अनेक लोग कहते हैं कि ये सब कैसे हुआ जबकि भारत में इतना बहुमत हिन्दुओं का था और आर.एस.एस. जैसा विशाल हिन्दू युवक संगठन था जिसमें लाखों अनुशासित स्वयंसेवी युवक थे। जो प्रतिदिन शाखा में प्रार्थना करते थे एवं सुरक्षा के लिए कटिबद्ध थे-उनके लिए अपने प्राण न्यौछावर का संकल्प लिया करते थे। वे हिन्दुस्तान व हिन्दू राष्ट्र स्थापना के लिये प्रतिज्ञा करते थे।&lt;br /&gt;साधारण हिन्दू को आरएसएस से बहुत आशायें थी पर यह संगठन अपने उद्देश्य में पूर्णतः विफल रहा और हिन्दू हित के लिये कोई प्रयास नहीं किया। हिन्दुओं की आरएसएस के प्रति निराशा स्वाभाविक है क्योंकि आरएसएस उस बुरे समय में उदासीन व मूकदर्शक रही। आज तक इस बात का वे कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं बता पाये कि क्यों उस समय वह इन सब घटनाओं/वारदातों की अनदेखी करती रही।&lt;br /&gt;उनकी चुप्पी का कारण ढूँढ़ने के लिये हमें यह विदित होना आवश्यक है कि आरएसएस का जन्म कैसे हुआ और नेतृत्व बदलने पर उसकी नीतियों में क्यों बदलाव आये।&lt;br /&gt;1922 में  भारत के  राजनीतिक पटल पर गांधी जी के आने के पश्चात ही मुस्लिम सांप्रदायिकता ने अपना सिर उठाना प्रारंभ कर दिया। खिलाफत आंदोलन को गांधी जी का सहयोग प्राप्त था- तत्पश्चात नागपुर व अन्य कई स्थानों पर हिन्दू, मुस्लिम दंगे प्रारंभ हो गये तथा नागपुर के कुछ हिन्दू नेताओं ने समझ लिया कि हिन्दू एकता ही उनकी सुरक्षा कर सकती है। इस प्रकार 28/9/1925 (विजयदशमी दिवस) को डाॅ0 मुंजे, डाॅ0 हेडगेवार, श्री परांजपे और बापू साहिब सोनी ने एक हिन्दू युवक क्लब की नींव डाली। डाॅ0 हेडगेवार को उसका प्रमुख बनाया गया। बाद में इस संगठन को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम दिया गया जिसे साधारणतः आरएसएस के नाम से जाना जाता है। इन स्वयंसेवकों को शारीरिक श्रम, व्यायाम, हिन्दू राष्ट्रवाद की शिक्षा एवं सैन्य शिक्षा आदि भी दी जाती थी।&lt;br /&gt;जब वीर सावरकर रत्नागिरी में दृष्टि बन्द थे तब डाॅ0 हेडगेवार वहां उनसे मिलने गये । तब तक वह वीर सावरकर रचित पुस्तक ‘हिन्दुत्व’ भी पढ़ चुके थे। डाॅ0 हेडगेवार उस पुस्तक के विचारों से बहुत प्रभावित हुये और उसकी सराहना करते हुये बोले कि वीर सावरकर एक आदर्श व्यक्ति हैं।&lt;br /&gt;दोनोें ही सावरकर एवं हेडगेवार का विश्वास था कि जब तक हिन्दू अंधविश्वास, पुरानी रूढ़िवादी सोच, धार्मिक आडंबरों को नहीं छोड़ेंगे और हिन्दू जाति, छूत-अछूत, अगड़ा-पिछड़ा और क्षेत्रवाद इत्यादि में बंटा रहेगा, वह संगठित एवं एक नहीं होगा तब तक वह संसार में अपना उचित स्थान नहीं ले पायेगा।&lt;br /&gt;1937 में वीर सावरकर की दृष्टिबंदी समाप्त हो गई और वे राजनीति में भाग ले सकते थे। उसी वर्ष वे हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गये जिसके उपाध्यक्ष डाॅ0 हेडगेवार थे। 1937 में हिन्दू महासभा का भव्य अधिवेशन में वीर सावरकर के भाषण को ‘हिन्दू राष्ट्र दर्शन’  के नाम से जाना जाता है।&lt;br /&gt;1938 में वीर सावरकर द्वितीय बार हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गये और यह अधिवेशन नागपुर में रखा गया। इस अधिवेशन का उत्तरदायित्व पूरी तरह से आरएसएस के  स्वयंसेवकों द्वारा उठाया गया।  इसका नेतृत्व उनके मुखिया डाॅ0 हेडगेवार ने किया था। उन्होंने वीर सावरकर के लिये असीम श्रद्धा जताई। पूरे नागपुर शहर में एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें आगे-आगे श्री भाउराव देवरस जो आरएसएस के उच्चतम श्रेणी के स्वयंसेवक थे, वे हाथी पर अपने हाथ में भगवा ध्वज लेकर चल रहे थे।&lt;br /&gt;हिन्दू महासभा व आर.एस.एस. के मध्य कड़वाहट&lt;br /&gt;1939 के अधिवेशन के लिए भी वीर सावरकर तीसरी बार हिन्दू महासभा के अध्यक्ष चुने गये थे। यह हिन्दू महासभा का अधिवेशन कलकत्ता में रखा गया। इसमें भाग लेने वालों में डाॅ0 श्यामा प्रसाद मुखर्जी, श्री निर्मल चंद्र चटर्जी (कलकत्ता उच्च न्यायालय के भूतपूर्व न्यायाधीश), गोरक्षापीठ गोरखपुर के महंत श्री दिग्विजयनाथ जी, आरएसएस प्रमुख डाॅ0 हेडगेवार और उनके सहयोगी श्री एम.एस. गोलवलकर और श्री बाबा साहिब गटाटे भी  थे।&lt;br /&gt;जैसे कि उपर बताया गया है कि वीर सावरकर पहले ही उस अधिवेशन के लिये अध्यक्ष चुन लिये गये थे, परंतु हिन्दू महासभा के अन्य पदों के लिये चुनाव अधिवेशन के मैदान में हुये। सचिव के लिये तीन प्रत्याशी थे-(1) महाशय इन्द्रप्रकाश, (2) श्री गोलवल्कर और (3) श्री ज्योतिशंकर दीक्षित। चुनाव हुये और उसके परिणामस्वरूप महाशय इन्द्रप्रकाश को 80 वोट, श्री गोल्वरकर को 40 वोट और श्री ज्योतिशंकर दीक्षित को केवल 2 वोट प्राप्त हुए। इस  प्रकार इन्द्रप्रकाश हिन्दू महासभा कार्यालय सचिव के पद पर चयनित घोषित हुये।&lt;br /&gt;श्री गोलवल्कर को इस हार से इतनी चिढ़ हो गई  कि वे अपने कुछ साथियों सहित हिन्दू महासभा से दूर हो गये। अकस्मात जून 1940  में डाॅ0 हेडगेवार की मृत्यु हो गयी और उनके स्थान पर श्री गोल्वरकर को आरएसएस प्रमुख बना दिया गया। आरएसएस के प्रमुख का पद संभालने के पश्चात उन्होंने श्री मारतन्डेय राव जोग जो स्वयंसेवकों को सैनिक शिक्षा देने के प्रभारी थे को किनारे कर दिया जिससे आरएसएस की पराक्रमी शक्ति प्रायः समाप्त हो गयी।&lt;br /&gt;श्री गोल्वल्कर एक रूढ़िवादी विचारों के व्यक्ति थे जो पुराने धार्मिक रीतियों पर अधिक विश्वास रखते थे, यहां तक कि उन्होंने अपने पूर्वजों के लिए ही नहीं वरन अपने जीवनकाल में ही अपना श्राद्ध तक कर दिया। वे गंडा-ताबीज के हार पहने रहते थे, जो संभवतः किसी संत ने उन्हें बुरे प्रभाव से बचाने के लिये दिये थे। श्री गोल्वरकर का हिन्दुत्व श्री वीर सावरकर और हेडगेवार के हिन्दुत्व से किंचित भिन्न था। श्री गोलवल्कर के मन में वीर सावरकर के लिये उतना आदर-सम्मान भाव नही था जितना डाॅ0 हेडगेवार के मन में था। डाॅ. हेडगेवार वीर सावरकर को आदर्श आदर्श पुरूष मानते थे। यथार्थ में श्री गोलवल्कर इतने दृढ़ विचार के न होकर एक अपरिपक्व व्यक्ति थे, जो आरएसएस जितनी विशाल संस्था का उत्तरदायित्व ठीक से उठाने योग्य नही थे। श्री गोलवल्कर के आरएसएस का प्रमुख बनने के बाद हिन्दू महासभा एवं आरएसएस के बीच सम्बन्ध तनावपूर्ण बनते गये। यहां तक कि श्री गोलवल्कर, वीर सावरकर व हिन्दू महासभा द्वारा चलाये जा रहे उस अभियान की मुखर रूप से आलोचना करने लगे जिसके अन्तर्गत श्री सावरकर हिन्दू युवकों को सेना में भर्ती होने के लिये प्रेरित करते थे। यह अभियान 1938 से सफलतापूर्वक चलाया जा रहा था। डाॅ0 हेडगेवार ने 1940 में अपनी मृत्यु तक इस अभियान का समर्थन किया था। सुभाषचंद्र बोस ने भी सिंगापुर से रेडियो पर अपने भाषण में इन युवकों को सेना में भर्ती कराने के लिये श्री वीर सावरकर के प्रयत्नों की बहुत प्रशंसा की थी। यह इसी अभियान का ही नतीजा था कि सेना में हिन्दुओं की संख्या 36 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गयी और इसी कारण यह भारतीय सेना, विभाजन के तुरंत के बाद पाकिस्तान द्वारा कश्मीर पर कश्मीर पर आक्रमण का मुंह तोड़ उत्तर दे पायी। परन्तु श्री गोलवल्कर के उदासीन व्यवहार व नकारात्मक सोच के कारण दोनों संगठनों के संबंध बिगड़ते चले गये।&lt;br /&gt;एक ओर कांग्रेस व गांधी ने अंग्रेजों को सहमति दी थी कि उनके भारत छोड़कर जाने के पहले भारत की सत्ता की बागडोर मुस्लिम लीग को सौंपने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। दूसरी ओर वे लगातार यह प्रचार भी करते रहे थे कि वीर सावरकर व हिन्दू महासभा मुस्लिम विरोधी  व सांप्रदायिक है। डाॅ0. हेडगेवार  की मृत्यु के उपरांत आरएसएस ने भी श्री गोलवल्कर के नेतृत्व में वीर सावरकर एवं हिन्दू महासभा के विरूद्ध  एक द्वेषपूर्ण अभियान आरंभ कर दिया। श्री गंगाधर इंदुलकर (पूर्व आरएसएस नेता) का कथन है कि गोलवल्कर ये सब वीर सावरकर की बढ़ती हुई लोकप्रियता (विशेषतायाः महाराष्ट्र के युवकों में)  के कारण कर रहे थे। उन्हें भय था कि यदि सावरकर की लोकप्रियता बढ़ती गयी तो युवक वर्ग उनकी ओर आकर्षित होगा और आरएसएस से विमुख हो जायेगा। इस टिप्पणी के बाद श्री इन्दुलकर पूछते हैं कि ऐसा करके आरएसएस हिन्दुओं को संगठित कर रही थी या विघटित कर रही थी। कांग्रेस व आरएसएस वीर सावरकर की चमकती हुयी छवि को कलंकित करने में ज्यादा सफल नहीं हो पाये, परंतु काफी हद तक हिन्दू युवकों को हिन्दू महासभा से दूर रखने में अवश्य सफल हो गये।&lt;br /&gt;1940 में डाॅ0 हेडगेवार की मृत्यु के पश्चात आरएसएस के मूल सिद्धांतों में परिवर्तन आया। हेडगेवार के समय में वीर सावरकर ( न कि गांधी जी) आरएसएस के आदर्श महापुरूष थे परन्तु श्री गोलवल्कर के समय में गांधी जी का नाम आरएसएस के प्रातः स्मरणीय में जोड़ दिया गया। डाॅ0 हेडगेवार की मृत्यु के बाद संघ के सिद्धांतों में मूलभूत परिवर्तन आया, यह इस बात का प्रमाण है कि जहां डाॅ0 हेडगेवार संघ के कार्यकर्ताओं के समक्ष संघ की ध्येय की विवेचना करते हुये कहते थे कि ‘‘हिन्दुस्तान हिन्दुओं का हैं’’ वहां खण्डित भारत में श्री गोलवल्कर कलकत्ता की पत्रकार वार्ता में दिनांक 7-9-49 को निःसंकोच कहते हैं कि ‘‘हिन्दुस्तान केवल हिन्दुओं का ही है, ऐसा कहने वाले दूसरे लोग है’’- यह दूसरे लोग हैं हिन्दू महासभाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ- तत्व और व्यवहार पृ. 14, 38 एवं 64 और हिन्दू अस्मिता, इन्दौर दिनांक 15-10-2008 पृ. 7, 8 एवं 9)&lt;br /&gt;1946 में भारत में केन्द्रीय विधानसभा के चुनाव हुये। कांग्रेस ने प्रायः सभी हिन्दू व मुस्लिम सीटों पर चुनाव लड़ा। मुस्लिम लीग ने मुस्लिम सीटों पर जबकि हिन्दू महासभा ने कुछ हिन्दू सीटों से नामांकन भरा। हिन्दू महासभा से नामांकन भरने वाले प्रत्याशियों में आरएसएस के कुछ युवा स्वयंसेवक भी थे, जैसे बाबा साहब गटाटे आदि। जब नामांकन भरने की तिथि बीत गई तब श्री गोलवल्कर ने आरएसएस के इन सभी प्रत्याशियों को चुनाव से अपना वापिस लेने के लिये कहा। क्योंकि नामांकन तिथि समाप्त हो चुकी थी और कोई अन्य व्यक्ति उनके स्थान पर नहीं भर सकता था। ऐसी स्थिति में इस तनावपूर्ण वातावरण में कुछ प्रत्याशियों के चुनाव से हट जाने के कारण हिन्दू महासभा पार्टी के सदस्यों में निराशा छा गई और चुनावों पर बुरा प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था। हिन्दू महासभा के साथ यही हुआ।&lt;br /&gt;कांग्रेस सभी 57 हिन्दू स्थानों पर जीत गई और मुस्लिम लीग ने 30 मुस्लिम सीटें जीत ली। यथार्थ में श्री गोलवल्कर ने अप्रत्यक्ष रूप से उन चुनावों में कांग्रेस की सहायता की। इन चुनावों के परिणामों को अंग्रेज सरकार ने साक्ष्य के रूप में ले लिया और कहा कि कांग्रेस पूरी हिन्दू जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करती हैं और मुस्लिम लीग भारत के सभी मुसलमानों का। अंग्रेज सरकार  ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग की सभा बुलायी जिसमें पाकिस्तान की मांग पर विचार किया जा सके। उन्होंने हिन्दू महासभा को इस बैठकों में आमंत्रित ही नहीं किया।&lt;br /&gt;जिस समय सभायें चल रही थीं उस समय सम्पूर्ण भारतवर्ष में दंगे हो रहे थे। विशेष तौर पर बंगाल (नोआखाली) व पंजाब में जहां हजारों हिन्दुओं की हत्यायें हो रही थीं और लाखों हिन्दुओं ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से अपने घरबार छोड़ दिये थे। ये  सब मुस्लिम लीग व उसके मुस्लिम नेशनल गार्ड द्वारा किया जा रहा था। जिससे हिन्दुओं में दहशत छा जाये और उसके पश्चात गांधी जी व कांग्रेस उनकी पाकिस्तान की मांग को मान लें।&lt;br /&gt;अंगे्रज सरकार, कांग्रेस व मुस्लिम लीग की यह सभायें जून व जुलाई 1947 में शिमला में हुई। अन्त में 3 जून 1947 के उस फार्मूला प्रस्ताव को मान लिया गया जिसमें दिनांक 14/08/1947  के दिन पाकिस्तान का सृजन स्वीकारा गया। इस फाॅर्मूले को कांग्रेस कमेटी व गांधी जी दोनों ने स्वीकृति दी। इस प्रस्ताव को माउण्टबेटन फार्मूला कहते हैं। इसी फार्मूले के कारण भारत का विभाजन करके 14/8/1947 में पाकिस्तान की सृष्टि हुई। &lt;br /&gt;उस समय 7 लाख युवा सदस्यों वाली आरएसएस मूकदर्शक बनी रही। क्या ये धोखाधड़ी व देशद्रोह नहीं था। आज तक आरएसएस अपने उस समय के अनमने व्यवहार का ठोस कारण नहीं दे पायी है। इतने महत्वपूर्ण विषय और ऐसे कठिन मोड़ पर उन्होंने हिन्दुओं का साथ नहीं दिया। उनके स्वयंसेवकांे से पूछा जाना चाहिये कि उन्होंने जब शाखा स्थल पर हिन्दुओं की सुरक्षा व भारत को अविभाजित रखने के लिये प्रतिबद्धता जताई थी, प्रतिज्ञाएं व प्रार्थनायें की थी फिर क्यों अपने ध्येय के पीछे हट गये। उन्होंने तो हिन्दू राष्ट्र को मजबूत बनाने व हिन्दुओं को सुरक्षित रखने की प्रतिज्ञाएं ली थी। स्पष्ट होता है कि यह श्री गोलवल्कर के अपरिपक्व व्यक्तित्व के कारण हुआ जो हेडगेवार की मृत्यु के पश्चात आरएसएस के प्रमुख बने।&lt;br /&gt;जिस आरएसएस के पास 1946 मंे 7 लाख युवा स्वयंसेवकों की शक्ति थी, उसने न तो स्वयं कोई कदम उठाया जिससे वह मुस्लिम लीग के डायरेक्ट एक्शन और पाकिस्तान की मांग का सामना कर सके और ना ही वीर सावरकर व हिन्दू महासभा को सहयोग दिया जो हिन्दुओं की सुरक्षा व भारत को अविभाजित रखने के लिये कटिबद्ध व संघर्षरत थी। कुछ स्थानों पर जहां हिन्दू महासभा शक्तिशाली थी वहां उसके कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम नेशनल गार्ड और मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं को उचित प्रत्युत्तर दिया लेकिन ऐसी घटनायें कम ही थीं।&lt;br /&gt;अक्टूबर 1944 में वी सावरकर ने सभी हिन्दू संगठनों की (राजनीतिक और गैर राजनीतिक) और कुछ विशेष हिन्दू नेताओं की नई दिल्ली में एक सभा बुलाई जिसमें यह विचार करना था कि मुस्लिम लीग की ललकार व मांगों का सामना कैसे किया जाये। इस सभा में अनेक लोग उपस्थित हुये जैसे-श्री राधामुकुन्द मुखर्जी, पुरी के शंकराचार्य, मास्टर तारा सिंह, जोगिन्दर सिंह, डाॅ0 खरे एवं जमुनादास मेहता आदि, परन्तु आरएसएस प्रमुख गोलवल्कर जी इतनी आवश्यक सभा में नहीं पहुंचे अपितु संघ नेतृत्व इससे विरत ही रहा। भारत विभाजन के पश्चात भी आरएसएस ने हिन्दू महासभा के साथ असहयोग ही किया जैसे वाराणसी के विश्वनाथ मन्दिर आन्दोलन, समान नागरिक संहिता और कुतुबमीनार के लिये हिन्दू महासभा द्वारा चलाये गये आंदोलन।&lt;br /&gt;क्या आर.एस.एस. का ‘संगठन मात्र संगठन’ के लिये ही था। उनकी इस प्रकार की उपेक्षापूर्ण नीति व व्यवहार आश्चर्यजनक एवं अत्यंत पीड़ादायी है। इस प्रकार केवल गांधीजी व कांग्रस ही विभाजन के लिये उत्तरदायी नही है अपितु आरएसएस और उसके नेता (श्री गोलवल्कर) भी हिन्दुओं के कष्टों एवं मातृभूमि के विभाजन के लिये उतने ही उत्तरदायी है।&lt;br /&gt;इतिहास उन लोगों से तो हिसाब मांगेगा ही जिन्होंने हिन्दू द्रोह किया, साथ ही उन हिन्दू नेताओं और संस्थाओं के अलंबरदारों को भी जवाब देना होगा जो उस कठिन समय पर मौन धारण कर निष्क्रिय बैठे रहे।&lt;br /&gt;इतिहास गवाह है कि केवल वीर सावरकर और हिन्दू महासभा ही हिन्दू हित के लिये संघर्षरत थे। परन्तु आरएसएस के उपेक्षापूर्ण व्यवहार के कारणवश एवं हिन्दू जनता का पूर्ण समर्थन न मिलने के कारण वे अपने प्रयत्नों में सफल नहीं हो पाये। जिससे वे मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की मांग को असफल बना सकते।&lt;br /&gt;अन्ततः पाकिस्तान बना जो भारत के लिये लगातार संकट और आज तक की राजनैतिक परेशानियों का कारण है। 14/8/1947 को पाकिस्तान का सृजन हिन्दू व हिन्दुस्तान के लिये एक काला दिवस ही है।&lt;br /&gt;   वतन की फिक्र कर नादां। मुसीबत आने वाली है।&lt;br /&gt;   तेरी बर्बादियां के मश्वरे हैं, आसमानों में।।&lt;br /&gt;   न समझोगे तो मिट जाओगे, ए हिन्दोस्तां वालों।&lt;br /&gt;    तुम्हारी दास्तां तक भी, न होगी दास्तानों में।।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4997078387976663355?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4997078387976663355/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4997078387976663355' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4997078387976663355'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4997078387976663355'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='वीर सावरकर, गाँधी जी एवम् आर.एस.एस.'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-6115904944981417590</id><published>2011-02-14T20:52:00.000-08:00</published><updated>2011-02-14T20:53:20.436-08:00</updated><title type='text'>स्थानिय पुलिस प्रशासन के कारण हिन्दू महासभा भवन संकट में</title><content type='html'>&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;रविन्द्र कुमार द्विवेदी&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;अखिल भारत हिन्दू महासभा की धारा 26-बी के अनुसार महासमिति के लिये गये निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती नही दी जा सकती। 14/01/2011  को चुनाव आयोग द्वारा दिये गये निर्णय को चक्रपाणी ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिस पर माननीय न्यायालय ने निष्पक्ष रूप से विषयवस्तु को जाने बिना आयोग के निर्णय को अपने तात्कालिक प्रभाव से स्थगित कर दिया। यह न्यायालय की निष्पक्षता पर प्रश्न-चिह्न है। न्यायालय के संपूर्ण विषयवस्तुओं को ज्ञात करने के उपरांत एवं सभी पक्षों को नोटिस देकर उनकी बातों  को जानना आवश्यक था। उसके बाद कोई भी निर्णय माननीय न्यायालय लिया होता तो न्यायिक गरिमा का उत्कृष्ट प्रदर्शन होता।&lt;br /&gt;सन् 1915 में पं0 मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय और स्वामी श्रद्धानंद के प्रयासों से देवभूमि हरिद्वार की पावन धरती पर विशाल हिन्दू महासभा के अधिवेशन के उपरांत अखिल भारत हिन्दू महासभा विशाल रूप में राष्ट्रीय स्तर पर  उभरा। अखिल भारत हिन्दू महासभा को वीर विनायक दामोदर सावरकर, भाई परमानंद और  डॉ0 बालकृष्ण सदाशिव मुंजे जैसे अनेंक महान हिन्दू विभूतियों के अथक परिश्रम से विशाल हिन्दू संगठन तैयार किया। प्रसिद्ध क्रांतिकारी रासविहारी बोस, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, करतार सिंह सराभा, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और इसके समवर्ती तमाम क्रांतिकारी हिन्दू महासभा के अथक परिश्रम की देन है, जिनके कारण राष्ट्र को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त हुई और 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ।  हिन्दू महासभा की यह महान गौरवशाली परंपरा हिन्दू समाज और समस्त भारतवासियों के हृदय में विशेष रूप से अंकित हो गयी। दुर्भाग्य से वर्तमान में चक्रपाणी और चन्द्रप्रकाश कौशिक के स्वार्थी प्रवृत्ति के चलते हिन्दू महासभा का मूल अस्तित्व खतरे में है।&lt;br /&gt; ब्रिटिश सरकार से सन् 1933 में नई दिल्ली के मंदिर मार्ग पर चिरस्थायी पट्टे पर प्राप्त जमींन को देवता स्वरूप भाई परमानंद ने प्राप्त की। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय कार्यालय और देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों हिन्दुओं के आस्था के केन्द्र जिस मंदिर (भवन) का निर्माण करवाया था, उस मंदिर की लीज वाली जमीन भी खतरे में पड़ गई है। चक्रपाणि और कौशिक की स्वार्थी प्रवृत्ति ने हिन्दू महासभा भवन की इमारत का पूर्ण व्यवसायीकरण कर दिया है,  स्थानिय पुलिस प्रशासन के दो एस.एच.ओ. रामकृष्ण यादव एवं रमेश चंद्र भारद्वाज के कुकृत्यांे का संगठन बहुत बड़ी कीमत चुका रहा है। इन दो एस.एच.ओ. की सहायता से चंद्र प्रकाश कौशिक व चक्रपाणि द्वारा अवैध गतिविधियां अनवरत चल रही हैं, ये भारत सरकार के केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संज्ञान में आ चुका है। मंत्रालय व्यवसायीकरण के कारण भवन को अधिग्रहित कर सकता है या सील लगा सकता है, मंदिर (भवन)  की जमीन की लीज को रद्द करके किसी भी समय उसे अधिग्रहीत करने की कार्रवाई कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो वो दिन हिन्दू समाज के लिये काला अध्याय सिद्ध होगा, जिसे रोकने के लिये हिन्दू महासभा के वास्तविक हिन्दू महासभाई हिन्दू महासभा के संविधान में वर्णित धाराओं के आधार पर प्रतिबद्ध हैं।&lt;br /&gt;चक्रपाणि का वास्तविक नाम राजेश श्रीवास्तव है और वो हिन्दू महासभा के सदस्य तक नही हैं। चक्रपाणि ने 19 दिसंबर 2005 की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ग्वालियर बैठक में स्वयं स्वीकार किया था कि उन्होंने जिस व्यक्ति को अपना सदस्यता शुल्क दिया था, उसने उस शुल्क को केन्द्रीय कार्यालय में जमा नहीं करवाया। चक्रपाणि ने पुनः सदस्यता ग्रहण नही की, जिसके आधार पर तत्कालिन राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चन्द्र त्यागी द्वारा चक्रपाणि को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाना स्वतः असंवैधानिक घोषित हो जाता है। इतना ही नहीं, 25 जुलाई, 2006 को दिल्ली के 7, शंकराचार्य मार्ग, सिविल लाइन, दिल्ली-110054 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चन्द्र त्यागी की अध्यक्षता में आहूत बैठक में सतीश चंद्र मदान और मदन लाल गोयल (दोनों तत्कालीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष) के दबाव में चक्रपाणि को राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किया गया, वो भी हिन्दू महासभा के संविधान के विरूद्ध असंवैधानिक सिद्ध होता है। इस बैठक में चक्रपाणि की कथनी और करनी में अंतर भी स्पष्ट नजर आया।&lt;br /&gt;19 दिसंबर 2005 की ग्वालियर बैठक में चक्रपाणि ने स्वयं कहा था कि राष्ट्रीय बैठक में दूसरे दलों से जुड़े नेताओं को न बुलाया जाये, किन्तु 25 जुलायी 2006 की दिल्ली बैठक में वो स्वयं कांग्रेस की इन्दिरा तिवारी को अपने साथ बैठक में लेकर आये अपने ही सुझाव को धूल-धूसरित कर दिया। चक्रपाणि का निर्वाचन इस संदर्भ  में भी असंवैधानिक माना जा सकता है कि 4 जून 2006 की मेरठ बैठक से ही हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद विवादित हो गया था।&lt;br /&gt;इस विवाद के मध्य सन् 2007 में चक्रपाणि नें इन्दिरा तिवारी के माध्यम से भारतीय निर्वाचन आयोग को भ्रमित करने वाली जानकारियां प्रदान की। भ्रमित जानकारी के आधार पर निर्वाचन आयोग वास्तव में भ्रमित हो गया और 7 अगस्त 2007 को चक्रपाणि को राष्ट्रीय अध्यक्ष दर्शाता एक पत्र निर्वाचन आयोग द्वारा प्रेषित किया गया। इससे पहले 6 मार्च, 2007 को दिनेश चन्द्र त्यागी और संगठन से निष्कासित छद्म राष्ट्रीय अध्यक्ष (स्वयंभू) चन्द्र प्रकाश कौशिक ने निर्वाचन आयोग को पत्र प्रेषित किया था, जिसमें दोनों ने परस्पर विवाद को समाप्त करने तथा 4 जून, 2006 से पहले की निर्विवाद राष्ट्रीय कार्यकारिणी को स्वीकार करने की घोषणा की थी। संभवतः 7 अगस्त, 2007 के अपने पत्र में निर्वाचन आयोग उक्त घोषणा को संज्ञान में लेना भूल गया। &lt;br /&gt;दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर वाद(सी.एस.डब्ल्यू.5) नं0 837/2007) का तथ्य भी निर्वाचन आयोग से छिपाकर चक्रपाणि ने आयोग को गुमराह किया, किन्तु निर्वाचन आयोग के संज्ञान में उच्च न्यायालय के बाद (चक्रपाणि को चुनौती देनें वाली याचिका) को संज्ञान में लाया गया  तो निर्वाचन आयोग ने चक्रपाणि को प्रेषित 21 अगस्त 2007  के पत्र में उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के अपने पिछले पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।&lt;br /&gt;चक्रपाणि और चन्द्र प्रकाश कौशिक अपने आपको वास्तविक अध्यक्ष बताते रहे और हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं के साथ पूरे हिन्दू समाज को गुमराह करते रहे। हिन्दुओं के आस्था के पवित्र मन्दिर (भवन) में सन् 2006 से पूर्व सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक कार्यक्रमों तथा वीर सावरकर, भाई परमानंद, वीर बाल हकीकत राय, रानी लक्ष्मी बाई, झलकारी बाई जैसे हिन्दू समाज के महान वीरों और वीरांगनाओं की पुण्यतिथियां मनायी जाती थी। हिन्दू महासभा भवन हमेशा कार्यकर्ताओं के चहल-पहल से आबाद रहता था। किन्तु नेतृत्व विवाद आरंभ होने के बाद मन्दिर(भवन) से धीरे-धीरे कार्यकर्ताओं का कोलाहल लुप्त हो गया। वहां कार्यक्रमों और हिन्दू समाज की गतिविधियों के बदले सन्नाटा छा गया। हिन्दू महासभा भवन का इस्तेमाल व्यवसायिक गतिविधियों में होनें लगा, जो हिन्दू आस्था और भावनाओं के साथ घातक खिलवाड़ था।&lt;br /&gt;मन्दिर(भवन) में स्थापित वीर सावरकर, भाई परमानंद और बाल हकीकत राय की प्रतिमाओं की गहरी उपेक्षा और समुचित देखरेख के अभाव में दोनों पक्षों के सच्चे हिन्दू महासभाइयों की आत्मा कराह उठी और उन्होंने हिन्दुओं के एकमात्र हिन्दू राजनीतिक दल अखिल भारत हिन्दू महासभा और उसके पवित्र मन्दिर(भवन) को दोनों पक्षों के स्वार्थ से मुक्त कराने का संकल्प लिया।&lt;br /&gt;राह कितनी भी कठिन हो, लेकिन बुलंद हौसले कठिनाइयों को बौना साबित कर देते हैं। इसका आभास 8 सितंबर 2007 को हुआ, जब संस्था के विवादों को सुलझाने और स्वार्थी हिन्दू महासभाइयों से हिन्दू महासभा को मुक्त कराने के लक्ष्य पर  हिन्दू महासभा के संविधान की के अंतर्गत महासमिति के दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों की बैठक आहूत हुई। धारा 16 एफ में पांच प्रदेश अध्यक्षों अथवा 30 महासमिति के सदस्यों की मांग पर ऐसी बैठक बुलाये जाने का प्रावधान है। बैठक में पं0 नंदकिशोर मिश्रा की अध्यक्षता में पांच प्रदेशों के सात प्रतिनिधियों की  संवैधानिक उच्चाधिकारी समिति का गठन किया गया। समिति को सभी सांगठनिक विवादों को सुलझाने की स्वतंत्र शक्तियां प्रदान की गई।&lt;br /&gt;यह सारी प्रक्रिया इतनी आसान नहीं रही। इस बैठक को असंवैधानिक घोषित करते हुये चक्रपाणि ने बैठक पर रोक लगाने की दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने हिन्दू महासभा के की धारा 16 एफ का संज्ञान लेते हुये बैठक को संवैधानिक मानते हुये रोक लगाने से इंकार कर दिया था। इतना ही नहीं एक अन्य मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल, 2008  के एक अंतरिम आदेश में भी समिति के अस्तित्व को मान्यता दी। दो जुलाई 2008 को नई दिल्ली के गढ़वाल भवन में उच्चाधिकार समिति की देखरेख में राष्ट्रीय महासमिति की आहूत बैठक में श्रीमती हिमानी सावरकर को अखिल भारत हिन्दू महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। 4 जुलाई, 2007  को संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया को निर्वाचन आयोग में दर्ज करा दिया गया। उसके बाद देश और राज्यों में हुये सभी चुनावों में हिन्दू महासभा नें अपने उम्मीदवार उतारे और हिमानी सावरकर के साक्ष्यांकित ए और बी फार्म को निर्वाचन आयोग ने स्वीकार किया। यह हिन्दू महासभा के संविधान की धारा 16 एफ के अंतर्गत  संगठित हिन्दू महासभा की एक बड़ी विजय रही।&lt;br /&gt;बाद में 20 नवंबर, 2010 को लखनउ में श्री दिनेश चंद्र त्यागी की अध्यक्षता में संपन्न राष्ट्रीय महासमिति की बैठक में सभी पक्षों के महत्वपूर्ण सदस्यों की उपस्थिति में राष्ट्रीय कार्यकारिणी को भंग कर एक उच्चाधिकार समिति का गठन किया गया। उच्चाधिकार समिति का अध्यक्ष कमलेश तिवारी को बनाया गया। प्रखर हिन्दू नेता  डॉ0  संतोष राय की अध्यक्षता में स्वागत समिति का गठन किया गया। स्वागत समिति के अध्यक्ष का दायित्व है नये राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनावी प्रक्रिया को पूर्ण करने का(चुनाव करने का)। नई कार्यकारिणी के चुनाव होनें तक उच्चाधिकार समिति को सभी शक्तियां प्रदान की गई हैं। हिन्दू महासभा के संविधान के अंतर्गत वर्तमान में  कोई भी  राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय पदाधिकारी नहीं है।  सर्वोच्च न्यायालय में श्रीराम जन्म भूमि विवाद की पैरवी करना और मन्दिर(भवन)  को मुक्त करवाकर वहां से पुनः राष्ट्रवादी स्वर गुंजायमान करना संगठन का पुनीत कर्तव्य है। स्वागत समिति की अध्यक्षता में निर्वाचित अध्यक्ष एवं गठित कार्यकारिणी ही वैधानिक कार्यकारिणी मानी जायेगी।&lt;br /&gt;हिन्दू महासभा का संविधान ही सर्वोपरि है, जिसे न्यायालय को मान्य होना चाहिये और निर्वाचन आयोग को भी। हिन्दू समाज और हिन्दुत्व के प्रति आस्थावान भारतीय समाज के प्रति सच्चा सम्मान यही होगा कि सभी पक्ष इस निर्वाचन प्रक्रिया का हिस्सा बनकर सभी विवादों को हमेशा के लिये खत्म करें और अखिल भारत हिन्दू महासभा को भगवा ध्वज के नीचे भव्य और सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प लें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-6115904944981417590?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/6115904944981417590/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=6115904944981417590' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6115904944981417590'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6115904944981417590'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='स्थानिय पुलिस प्रशासन के कारण हिन्दू महासभा भवन संकट में'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1619048705095404110</id><published>2010-10-28T04:19:00.000-07:00</published><updated>2010-10-28T04:20:01.149-07:00</updated><title type='text'>पुलिस ने गवाह को थाने में बंद कर पीटा</title><content type='html'>Oct 25, 01:07 am&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पश्चिमी दिल्ली, जागरण संवाददाता : पुलिस का विद्रूप चेहरा एक बार फिर सामने आया है। बिंदापुर इलाके में एक युवक को पुलिस वालों ने अपने खिलाफ गवाही देने पर जमकर पीटा। उसके साथ रहे दोस्त को भी नहीं बक्शा गया। इतना ही नहीं बात न मानने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;करीब एक महीने पहले बिंदापुर इलाके में पुलिस वालों ने डंडा मारकर फल विक्रेता लियाकत अली का हाथ तोड़ दिया था। आरोप है कि पुलिस वाले लियाकत से पैसे मांग रहे थे। इस मामले में उत्ताम नगर निवासी शंकर गवाह है। शंकर का आरोप है कि शनिवार रात को वह किसी काम से बिंदापुर गया था। तभी उसके दोस्त इज्जत ने बताया कि रेहड़ी चालक इरफान को पुलिस ने पकड़ लिया है। इस पर दोनों मामले की जानकारी के लिए थाने पहुंचे। जैसे ही शंकर ने अपना परिचय दिया, हेड कांस्टेबल प्रहलाद सिंह भड़क उठा और शंकर से गाड़ी की चाभी और मोबाइल छीन लिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने दोनों को थाने में बंद कर जमकर पीटा। इतना ही नहीं शंकर को धमकाते हुए गवाही न देने की बात कही। बात न मानने पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी। रविवार को पुलिस अधिकारियों को जब मामले की जानकारी मिली तो दोनों को छोड़ने का आदेश दिया गया। पुलिस अधिकारियों की माने तो रेहड़ी-पटरी लगाने वाले हमेशा मनमानी करते है। ऐसे में पुलिस जब सख्ती बरतती है, तो वह पुलिस वालों पर ही आरोप लगाना शुरू कर देते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरएस कृष्णैया का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। मामले की छानबीन कराई जाएगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Sabhar Dainik Jagran&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1619048705095404110?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1619048705095404110/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1619048705095404110' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1619048705095404110'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1619048705095404110'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='पुलिस ने गवाह को थाने में बंद कर पीटा'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-6203535600747937499</id><published>2010-09-01T02:39:00.000-07:00</published><updated>2010-09-01T02:40:48.903-07:00</updated><title type='text'>पुलिस की अधूरी जानकारी के विरूद्ध पत्रकार राजीव कुमार ने सीआईसी की शरण ली</title><content type='html'>&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;रविन्द्र  कुमार द्विवेदी &lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दिल्ली पुलिस आपके लिए आपके साथ का नारा देने वाली दिल्ली पुलिस को शायद इसका मतलब शायद पता नही है।तभी तो आए दिन दिल्ली पुलिस की कारस्तानी अखबारों में छपती रहती है। दिल्ली पुलिस आम जनता की मदद तो दूर समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को भी अपने सामने कुछ नही समझती है। ऐसे ही एक घटना के तहत एक पत्रकार ने दिल्ली पुलिस की वास्तविकता देखी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तात्काजलिक हिन्दी पत्रिका भारतीय पक्ष के पत्रकार राजीव कुमार पिछले कई साल से उत्तम नगर के संपत्ति संख्या ए-20 सुभाष पार्क में किराये पर अपने परिवार के साथ रह रहे थे। 22/10/2009 को राजीव के मकान मालिक सुरेश ने राजीव से जानबूझकर नशे में धुत्त होकर फसाद किया व उन्हें घर से निकालकर उनकी पत्नी शिल्पी और एक साल के पुत्र आकाश को बंधक बना लिया। राजीव ने अंत में  100 नंबर पर फोन किया। पीसीआर की गाड़ी आई, राजीव की मदद करने को कौन कहे उल्टे उन्हें डांटने-फटकारने लगी। राजीव ने मिन्नतें की कि मेरे बच्चे व पत्नी की जान खतरे में है। इस पर भी पुलिस वालों का दिल नही पसीजा।  वे पुलिसिया रौब दिखाना शुरू कर दिया. इन दोनों में  प्रधान सिपाही सिब्बनल चन्द्रा जिसका बेल्टज नंबर 134 पी.सी.आर. है ने डांटते-फटकारते हुए कहा कि हम क्याब करें तुम्हा रे पत्नील और बच्चेप की जान खतरे में है अगर यह मकान मालिक हमारा सर फोड़ दे तो तब क्याे होगा और जो दूसरा प्रधान सिपाही भगवान सिंह जिसका बेल्ट  नंबर 6309 पी.सी.आर. है वो घटना स्थ ल पर आया ही नही वह वहीं तिराहे पर वैन  लगाकर वहां की रौनक देखने में व्य स्तव  था. अंत में ये दोनों पुलिसिया रौब झाड़ते हुए चले गये. सनद रहे कि इन दोनों पुलिसवालों का नाम और बेल्टआ नंबर आर.टी.आई. के तहत पता चला है. बाद में थाना बिन्दापुर से एएसआई राजेन्द्र सिंह आया।  वह पत्रकार राजीव कुमार को न्याय दिलाने के बजाय उन्हीं पर भड़क उठा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; राजीव ने खुद को पत्रकार बताते हुए, एएसआई को सारा मामला समझाते हुए उससे अनुरोध किया कि वह उनकी पत्नी व पुत्र को मकान मालिक सुरेश के बंधक से छुड़ाए। राजेन्द्र सिंह ने पत्रकार राजीव कुमार से काफी बत्तमीजी से उसका परिचय पत्र मांगा। राजीव कुमार  द्वारा परिचयपत्र देने के बाद भी राजेन्द्र सिंह ने उससे काफी अभद्रता से बात की और परिचयपत्र को अपने जेब में रख लिया। राजीव ने कई बार परिचयपत्र वापस मांगने के बाद एएसआई ने राजीव को फर्जी पत्रकार के जुर्म में जेल में बंद करने की धमकी देते हुए परिचयपत्र वापस कर दिया। बिन्दापुर थाने का यह बद्जुबान एएसआई लगातार मकान मालिक सुरेश का पक्ष लिये जा रहा था, आखिरकार आस-पास के लोगों ने जब एएसआई पर दबाव बनाया तब जाकर कहीं उसने कुछ मजबूरन करीब 12 घंटे के बाद राजीव की पत्नी और उनके बच्चे को सुरेश के चंगुल से मुक्त कराया। राजीव ने इस पूरे घटना की एफआईआर दर्ज करवानी चाही लेकिन राजेन्द्र सिंह ने कोई भी शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; फसाद करने वाले मकान मालिक सुरेश कोई काम-काज नही करता है। उसका बस एक मात्र काम शराब, गांजा पीकर अश्लील हरकत करना, गंदी-गंदी गालियां देना है। झगड़े के समय भी सुरेश के पास गांजे की पुड़िया थी लेकिन एएसआई राजेन्द्र सिंह ने राजीव के कहने पर भी उस ओर कोई ध्यान नही दिया। इसके अलावा मकान मालिक सुरेश अपनी भाभी को जलाकर मारने के आरोप में हरियाणा की जेल में सजा भी काट चुका है। आखिरकार राजीव को उनकी पत्नी और बच्चा सकुशल मिल गया लेकिन घर के कुछ अन्य सामान आज तक नही मिल पाये। सामानों में  टीवी, सीलिंग फैन, ट्यूबलाइट व अन्य जरूरी दस्तावेज घर में ही रह गया। राजीव कुमार ने मकान तो बदल लिया किन्तु उनका सामान वापस नही मिला राजीव कुमार ने जब सुरेश से अपना सामान मांगा तो उसने राजीव को धमकी दिया कि यदि उसने अपना सामान वापस मांगा तो वो उसे और उसके परिवार को जान से मरवा देगा। अगर धमकी की शिकायत पुलिस से की तो उसके उपर पचास हजार की चोरी का झूठा आरोप लगवाकर जेल भिजवा देगा। सुरेश की ज्यादती और दिल्ली पुलिस की नाइंसाफी से तंग आकर आखिरकार राजीव ने जनसूचनाधिकार अधिनियम 2005 का उपयोग करते हुए दिल्ली पुलिस से घटना की विस्त्रृत जानकारी मांगी, साथ ही अपनी शिकायत कमिश्नर से कर पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों का भी  विवरण आरटीआई के तहत मांगा था। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके उत्तर में दिल्ली पुलिस कोई सटीक जवाब देने के बजाय गोलमटोल जवाब देकर राजीव को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने सूचना अधिकार के मूल नियमों को ठेंगा दिखाते हुए अधूरा जवाब भेज दिया कि राजीव का कोई भी सामान मकान मालिक के पास नहीं है, उस दिन मकान मालिक से कोई भी झगड़ा नही हुआ था। और मजबूर होकर राजीव ने मामले को केन्द्रीय सूचना आयोग के संज्ञान में लाने हेतु केन्द्रीय सूचना आयुक्त को पत्र भेजा है। उन्हें उम्मीद है कि सूचना आयोग के माध्यम से उन्हें सही जानकारी के साथ न्याय भी मिल सकेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-6203535600747937499?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/6203535600747937499/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=6203535600747937499' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6203535600747937499'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6203535600747937499'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='पुलिस की अधूरी जानकारी के विरूद्ध पत्रकार राजीव कुमार ने सीआईसी की शरण ली'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-732890493265839987</id><published>2010-07-27T01:41:00.000-07:00</published><updated>2010-07-27T01:42:54.402-07:00</updated><title type='text'>पुलिस अपना आचरण सुधारे-द्विवेदी</title><content type='html'>अखिल भारत हिन्दू महासभा  दिल्ली प्रदेश  के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार द्विवेदी ने पत्रकार  राजीव कुमार को जान से मारने की धमकी देने कीशिकायत पर स्थानिय बिन्दापुर पुलिस द्वारा कोई कदम न उठाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इससे साबित होता है कि पुलिस अपराधियों को संरक्षण देकर अपने कर्तव्य से विमुख हो रही है। इससे आम जनता के जान-माल की सुरक्षा की गारण्टी से आम जनता का विष्वास उठता जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    जारी बयान के अनुसार 22 अक्टूबर, 2009 को पत्रकार राजीव कुमार की पत्नी और उनके नन्हें बेटे को बंधक बनाकर उसके मकान मालिक सुरेष कुमार ने राजीव कुमार को भगा दिया था। सौ नंबर पर फोन करने के बाद 12 घण्टे के बाद स्थानीय एएसआई राजेन्द्र सिंह ने जनता के भारी दबाव के बाद हस्तक्षेप कर उनके पत्नी व बच्चे को सुरेष के बंधक से मुक्त करवाया, लेकिन उनका घर में रखा सामान बाद में दिलवाने का आष्वासन दिया गया। पत्रकार राजीव कुमार ने उसी वक्त किराये का नया मकान ले लिया था। जब राजीव को  अपना सामान वापस नही मिला तो उन्होने आर0टी0आई0 एक्ट 2005 के तहत जानकारी मांगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    पुलिस विभाग से राजीव को भेजी  गई जानकारी में मकान मालिक सुरेष के पास उसका कोई सामान नहीं होने और राजीव की षिकायत पर जाँच रिपोर्ट लंबित होने की भ्रमित करने वाली जानकारी देकर सच्चाई को बड़ी सफाई से छिपा लिया।  पुलिस विभााग की भ्रमित करने वाली आधी-अधूरी जानकारी के विरूद्ध  राजीव ने केन्द्रीय सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    श्री द्विवेदी ने जारी बयान में कहा कि पुलिस को आम नागरिकों के प्रति अपना आचरण सुधारना होगा, अन्यथा आम जनता का आक्रोष और जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के प्रति बढ़ती जागरूकता के सामने उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-732890493265839987?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/732890493265839987/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=732890493265839987' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/732890493265839987'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/732890493265839987'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/07/blog-post_27.html' title='पुलिस अपना आचरण सुधारे-द्विवेदी'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-4970789325033853357</id><published>2010-07-19T01:03:00.000-07:00</published><updated>2010-07-19T01:04:00.569-07:00</updated><title type='text'>इस्‍लाम शांति का मजहब है?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/TEQG6EQbB4I/AAAAAAAAAHg/KqAKvlq2AuY/s1600/islam2.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 247px; height: 320px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/TEQG6EQbB4I/AAAAAAAAAHg/KqAKvlq2AuY/s320/islam2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5495525039943649154" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5495524685543947970" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/TEQGWfGTh3I/AAAAAAAAAHI/zs5KW-LD7vg/s1600/islam1.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 247px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/TEQGWfGTh3I/AAAAAAAAAHI/zs5KW-LD7vg/s320/islam1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5495524428673681266" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-642123794242589949?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/642123794242589949/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=642123794242589949' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/642123794242589949'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/642123794242589949'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/07/blog-post_1737.html' title='इस्‍लाम शांति का मजहब है?'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/TEQGlcA8vsI/AAAAAAAAAHY/JItz2DQfRjg/s72-c/islam3.jpg' height='72' 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करता है। इसको देखकर साफ हो जाता है कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ही इस महंगाई को बढाने के लिए जिम्‍मेदार है। और इसकी चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी की चुप्‍पी भी इस महंगाई को बढाने के पक्ष में दिखती है। क्‍यों आजतक उनका एक भी वक्‍तव्‍य महंगाई को काबू में करने के लिए लिए नहीं आया। इसका मतलब की कांग्रेस की अध्‍यक्षा ही इस महंगाई को बढाने के लिए वास्‍तविक जिम्‍मेदार है&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4153802931059369153?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4153802931059369153/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4153802931059369153' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4153802931059369153'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4153802931059369153'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/07/blog-post_19.html' title='देश की महंगाई सुरसा की तरह मुंह बाये है इसके लिए कौन जिम्मेदार है सोनिया गाँधी जवाब दो ?'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/TEP-ynr8IcI/AAAAAAAAAG4/s8VKFR1P4_g/s72-c/mahangai+dayan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1542207050211773963</id><published>2010-07-12T02:16:00.000-07:00</published><updated>2010-07-12T02:17:25.636-07:00</updated><title type='text'>नई दिशायें</title><content type='html'>अंक-1                   नई दिशायें&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;रविन्द्र कुमार द्विवेदी&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    वातावरण में शाम की कालिमा अपने पंख फैलाने को आतुर थी। पवन का मन्द-मन्द झोंका मौसम को सुहाना बना रहा था। कनाॅट प्लेस के चैराहे पर एक कोने के एकांत में खड़े हमीद और अकबर बातचीत में मशगूल थे। अकस्मात अकबर थोड़ा जोश में आते हुए बोला-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘अगर तूने ऐसा कर दिखाया तो मैं तुझे मान जाऊंगा, अपना नाम बदल लूंगा।’ हमीद उसकी बात सुनकर खिलखिलाते हुए हँस पड़ता है। हमीद की हँसी अकबर को बहुत चुभती है। वो जोष में होष खोते हुए चीख पड़ता है-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘चुप, चुप हो जा हमीद।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    हमीद उस पर व्यंग्य कसता है- ‘किस-किस को चुप करायेगा अकबर? तेरी ऐसी बचकानी बात जो भी सुनेगा, तुझ पर बेपनाह हँसेगा।’ हमीद की बात सुनते ही अकबर की आँखें हैरत से फैल जाती हैं। वो अपनी चीख दबाते हुए कहता है-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘ मैंने ऐसा क्या कह दिया हमीद ’?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       हमीद अकबर को गौर से देखते हुए बोला-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       ‘पहले ये बता, तू अपना कौन-सा नाम बदलने की बात कर रहा है? जल्दी बता।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       ‘मेरा एक ही नाम है-अकबर!’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘लेकिन ये तो पहले से ही बदला हुआ नाम है। फिर इस नाम पर इतना घमण्ड क्यों दिखा रहा है। हुँह........ बदले हुए नाम पर मर्दानगी। अरे, ये मर्दानगी नहीं, नपुंसकता है।’ कहते ही हमीद उसे नफरत से देखता है। अकबर का चेहरा गुस्से से लाल हो जाता है। वो गुस्से में काँपते हुए कहता है-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘मेरे जमीर पर तोहमत मत लगा हमीद, वरना तेरे हक में अच्छा नहीं होगा।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘क्या अच्छा नहीं होगा? क्या पहले तेरा नाम राम आसरे नहीं था।?’ हमीद कटाक्ष करते हुए बोला।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘था, लेकिन तब मैं सनातनी था। अब सच्चा मुसलमान हूँ। खुदा की इबादत करता हूं।’ अकबर बेबाकी से बोला। हमीद के चेहरे पर कुटिल मुस्कान फैल जाती है। वो फिर व्यंग्य कसता है- ‘यानी नाम के साथ मजहब और चेहरा भी बदल जाता है। मूर्तिपूजक, मूर्तिभंजक बन गया। राम आसरे के नाम से मूंछे ऊंची रखने वाला मूंछे नीची करा बैठा। अरे, जो कौम का न रहा, जिसमें वो पैदा हुआ, तो हमारे मजहब से क्या वफादारी दिखायेगा।’ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     हमीद की बात सुनकर अकबर के मन में तूफान मच जाता है। यह क्या सुन लिया उसनें। वो सच्चे मन से इस्लाम में दीक्षित हुआ मिशनरी वालों ने भरोसा दिलाया कि उनक मजहब में सबको बराबरी का दर्जा मिला हुआ है। लेकिन यह क्या था? यहाँ तो उसका उपहास उड़ाया जा रहा है। क्या यही है बराबरी का दर्जा? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     हमीद ने मानो उसके मन के तूफान को समझ लिया। उसने बड़ी कुटिलता से कहा- हाँ, यही है बराबरी का दर्जा। गैर इस्लामियों को इस्लाम में लाने के बाद सबको तुम्हारी जैसा बराबरी का दर्जा दिया जाता है।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘तो फिर वो सब्जबाग, जो मुझे दिखाये गये थे?’ अकबर हकबका कर बोला। हमीद पहले से भी ज्यादा कुटिलता से बोला-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘सब्जबाग न दिखाये जाते तो तुम हमारा मजहब कबूल नहीं करते। अब समझे।’ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘यानी मेरे साथ धोखा हुआ।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘तुम्हारे लिये धोखा, लेकिन हमारे लिए मजहब की खिदमत’ हमीद ने फख्र्र  से कहा। अकबर के चेहरे पर आते-जाते भावों का जलजला उमड़ेने लगा। उसने मन में सोचा-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘इतना बड़ा धोखा। हमारे पुरखे सच ही कहा करते थे। यह सब विधर्मी हैं। इन पर कभी विश्वाश नहीं करना चाहिये, लेकिन मैं पुरखों के ये वचन भूल गया। वरना इन जालिमों के हाथ हपना नाम और धर्म कभी न गँवाता।’ हमीद अकबर के चेहरे को पढ़ते हुए बोला-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘अब सोचकर क्या फायदा अकबर। सोचना था तो हमारा मजहब कबूल करने से पहले सोचते’ अकबर उसकी बात सुनकर गंभीर स्वर में कहता है-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘सच कहा हमीद, बिलकुल सच कहा। लेकिन तुमने अपने मजहब की खिदमत की जो बात कही, वो मेरी समझ में नहीं आई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘तुम अपने पुरखों की बात भूल सकते हो अकबर, लेकिन हम कभी नहीं भूलते।’ हमीद जोशीले  स्वर में बोला-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;‘जब हिन्दुस्तान आजाद हुआ था तो हमारे पुरखों ने कहा था-‘लड़कर लिया है पाकिस्तान- हँस कर लेंगे हिन्दुस्तान।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    हमीद की बात सुनकर अकबर चैंका उसके मुँह से अकस्मात निकला- ‘क्या?’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    हमीद मुस्कुराया और बोला- ‘इसी लिए तो, हम तुम जैसे गैर इस्लामियों पर डोरे डालते हैं। लोभ-लालच देते हैं और अपने मजहब में शामिल कर लेते हैं। हम चाहते हैं कि हिन्द में हमारे मजहब के लोगों की आबादी सनातनियों से अधिक हो जाये। जानते हो न अकबर, तब क्या होगा?’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    अकबर का चेहरा हमीद की बातें सुनकर एकदम निस्तेज हो गया। उसे अपने उपर गुस्सा आने लगा कि वो उनके बहकावे में आया ही क्यों? पर अब क्या हो सकता था। सनातनियों ने उसे विधर्मी घोषित करके हमेषा के लिए उससे नाता तोड़ लिया था। इन विधर्मियों के साथ घुटते दम से वो कब तक जी पायेगा? आह! ये उससे कैसा पाप हो गया? अकबर की आत्मा उसे कचोटती हुई लहूलुहान करने लगी। अन्त में अकबर हिम्मत जुटाते हुए बोला-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘क्या होगा?’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘हम हिन्दुस्तान में इस्लामी हुकूमत कायम कर देंगे। फिर दिल्ली से लाहौर तक हमारे मजहब की हुकूमत होगी। हिन्द की धरती पर वो ही रहेगा, जो खुदा की इबादत करेगा।’ कहते-कहते हमीद कहकहा लगाने लगा। उसके कहकहे अकबर के कानों में शीषा बनकर पिघलने लगे। उसे लगा कि एक साथ सैकड़ों हमीद कहकहा लगा रहे हैं। उसे अपने कानों में पिघलता शीषा सहन नहीं हुआ। वो अपने दोनों कानों पर हाथ रखकर चीख उठा-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘बस करो हमीद, बस करो। वरना मैं इसी समय मैं तुम्हारा कत्ल कर दूंगा।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    अकबर के चीखते ही हमीद के कहकहे रूक गये। एकदम सन्नाटा छा गया और घिर आई शाम के सन्नाटे में विलीन होकर वातावरण को बड़ा भयानक बना दिया। अकबर ने अपने कान से हाथ हटाये और हमीद की ओर देखा। हमीद वहाँ से जा चुका था। अकबर की आँखों में आँसू भर आये। उसे सनातन धर्म से कटने पर आत्मग्लानि होने लगी। शायद वो आँसू पष्चाताप के आँसू थे। वो सनातनी होना चाहता था, पर क्या सनातनी विधर्मी को पुनः अपनायेंगे? अकबर एक विचित्र चैराहे पर खड़ा था। चैराहे के सारे रास्ते अंधकार में डूबे हुये थे। उसे कुछ सुझाई नहीं दे रहा था कि वो किस रास्ते पर आगे बढ़े। तभी एक रास्ते से उम्मीद की एक किरण स्वयं उसके पास चलकर पहुँची। उम्मीद की वो किरण दिल्ली उच्च न्यायालय की एक अधिवक्ता संजया शर्मा थी। वो अकबर के पास पहुंची और बोली- ‘मैंने तुम दोनों की सारी बातें सुनी। मेरा विचार है कि तुम पुनः पुराने घर जाने का मन बना चुके हो।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    अकबर ने उस अप्रतिम देवी स्वरूपा को एकटक देखते हुए ‘हाँ’ में गर्दन हिलायी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘मार्ग नहीं सुझाई दे रहा।’ वो फिर बोली-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    उसकी वाणी से मंत्रमुग्ध अकबर के मुंह से बड़ी मुष्किल से निकला-हाँ.....।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘मैं जिस रास्ते से आई हूं, उसी रास्ते से आगे बढ़ जाओ’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘वो रास्ता तो स्वामी नारायण मन्दिर जाता है।’ अकबर बोला।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘हाँ, मन्दिर के पास हिन्दू महासभा भवन है। भवन में स्वामी चक्रपाणि देव जी महाराज से मिलना। वही तुम्हारा मार्गदर्षन करेंगे। तुम्हारी हर समस्या, हर शंका समाधान है उनके पास। बड़ा ही दिव्य तेज है उनके मुखमण्डल पर। हमस सब उन्हें श्रद्धा और आदर से  ‘स्वामी जी’ कहते हैं। अगर उन्हें प्रसन्न करना है तो जाते ही ‘जय हिन्दू राष्ट्र’ के उद्घोष के साथ श्रद्धा से उनके चरण स्पर्ष कना। निष्चित रूप से वो तुम्हारा कल्यांण करेंगे।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    अकबर मानो सोते से जागा और बोला ‘षायद मैंने आपका चेहरा पहले कहीं देखा है। पर कहाँ? याद नहीं आ रहा।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    अकबर की बात पर मुस्कुराते हुए बोली-‘जरूर किसी कोर्ट कचहरी में देखा होगा। मैं एक वकील हूँ।’ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    वकील सुनकर अकबर चैंका।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘त-तुम वकील हो। वही वकील जो फोकस चैनल पर फोकस काउंसिल में टी.वी. पर आती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘ओह, तो तुमने मुझे टी.वी. पर देखा है। हाँ, मैं वही हूँ, एडवोकेट संजया।’ संजया ने अपने पर्स से एक विजिटिंग कार्ड निकालकर देते हुए कहा-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘ये लो, कभी जरूरत पड़े तो मिल सकते हो। और हाँ, और स्वामी जी को मेरा प्रणाम जरूर कहना।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘जी, जरूर कह दूंगा।’ अकबर गर्दन हिलाते हुए बोला। लेकिन उसकी प्रतिक्रिया देखे बिना वो जा चुकी थी। अकबर स्वामी नारायण मन्दिर के रास्ते पर चल पड़ा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    बीस मिनट बाद अकबर स्वामी जी के सामने विराजमान था। स्वामीजी बड़े ही ध्यानपूर्वक अकबर की बात ध्यानपूर्वक सुनी और मुस्कुराते हुए बोले-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो उसे भूला नही कहते बच्चा। तुम जीवन के मार्ग पर राह भटक गये थे। लेकिन तुम अब पुनः सही मार्ग पर आ गये हो। तुम्हारा सनातन समाज में स्वागत है। हम तुम्हारा शुद्धिकरण करेंगे।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘सच स्वामी जी मैं फिर से सनातनी होने का गौरव पा सकूंगा।’ अकबर खुष होते हुए बोला।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     ‘अवष्य, तुम्हारा नाम क्या है बच्चा।’  स्वामी जी की अमृत वाणी बरसने लगी अकबर उसमें भीगने लगा। उसके होंठ बरबस ही फड़फड़ा उठे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘अ......कबर’ &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;   ‘भूल जाओ इस नाम को’ ये तुम्हारा छद्म नाम है। हम तुमसे तुम्हारा सनातनी नाम पूछ रहे हैं।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    राम आसरे बाल्मीकि..........&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘ओह... तो तुम बाल्मीकि समाज के गौरव हो।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    ‘ज........जी स्वामी जी... ल...लेकिन मैं मार्ग भटक गया था।’&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    दोनों के बीच वार्तालाप चलता रहा। वार्तालाप के बाद स्वामी जी ने उससे ग्यारह बार गायत्री मंत्र का जाप करवाया। उस पर गंगा जल छिड़क कर उसे शुद्ध किया। अन्य कई वैदिक क्रियाओं के पष्चात अकबर फिर से सनातनी बन गया। उसकी जिन्दगी में फिर से सवेरा हो गया। उसके जीवन को नई  दिशा मिल गई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                                                                                                                                             गतांक से आगे --------&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1542207050211773963?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1542207050211773963/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1542207050211773963' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1542207050211773963'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1542207050211773963'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='नई दिशायें'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-3917838812859068030</id><published>2010-06-22T05:38:00.000-07:00</published><updated>2010-06-22T05:39:50.866-07:00</updated><title type='text'>आर0टी0आई0 कार्यकर्ता ने केन्द्रीय सूचना आयोग में अपील दायर की</title><content type='html'>आर0टी0आई0 कार्यकर्ता ने केन्द्रीय सूचना आयोग में अपील दायर की&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्रीराम अधार फाउण्डेशन के आर0टी0आई0 कार्यकर्ता राजीव कुमार(पत्रकार ) ने पुलिस मुख्यालय के &lt;br /&gt;जन सूचना अधिकारी से मांगी गई जानकारी आधा-अधूरी मिलने और वास्तविक तथ्यों को छिपाने का&lt;br /&gt;का प्रयास करने के विरोध में केन्द्रीय सूचना आयोग के जनसूचना आयुक्त के समक्ष अपील दायर की &lt;br /&gt;है। &lt;br /&gt;आज जारी बयान में राजीव कुमार ने बताया कि बिन्दापुर पुलिस ने उनकी शिकायत पर संज्ञान &lt;br /&gt;लेने की जगह उन्हीं को प्रताड़ित किया, जिस पर अखिल भारत हिन्दू महासभा की ओर से पुलिस &lt;br /&gt;आयुक्त को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन पर पुलिस मुख्यालय द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी पाने&lt;br /&gt;के लिए राजीव कुमार ने आर0टी0आई0 दायर की थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजीव कुमार ने आरोप लगाया है कि उन्हें पुलिस मुख्यालय की ओर से आधी-अधूरी जानकारी&lt;br /&gt;भेजी गई और वास्तविक तथ्यों को छिपाया गया। पुलिस मुख्यालय के जनसूचना अधिकारी से &lt;br /&gt;निराश होकर राजीव कुमार ने केन्द्रीय सूचना आयोग की शरण ली है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजीव ने जारी बयान में उम्मीद जताई है कि केन्द्रीय सूचना आयोग के माध्यम से उन्हें सही &lt;br /&gt;जानकारी हासिल होगी। बयान में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सूचना आयोग भी सही जानकारी&lt;br /&gt;दिलवाने में विफल रहा तो वो दिल्ली उच्च न्यायालय की शरण लेने पर बाध्य होंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-3917838812859068030?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/3917838812859068030/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=3917838812859068030' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3917838812859068030'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3917838812859068030'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/06/000.html' title='आर0टी0आई0 कार्यकर्ता ने केन्द्रीय सूचना आयोग में अपील दायर की'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1955268836921499427</id><published>2010-06-19T02:42:00.000-07:00</published><updated>2010-06-19T02:43:51.633-07:00</updated><title type='text'>हिन्दुओं और मुसलमानों में भेदभाव देश के लिए घातक -द्विवेदी</title><content type='html'>अखिल भारत हिन्दू महासभा दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष रविन्द्र कुमार &lt;br /&gt;द्विवेदी ने अमरनाथा यात्रा और माता वैष्णों देवी यात्रा पर जाने &lt;br /&gt;वाले हिन्दू श्रद्धालुओं से विशेष टैक्स लेने का निर्णय लेने पर केन्द्र&lt;br /&gt;सरकार से जम्मू-कश्मीर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि हिन्दू श्रद्धालुओं से भारी टैक्स वसूल करके मुस्लिम&lt;br /&gt;समाज पर सब्सीडी के नाम पर लुटाई जा रही धनराशी के भेदभाव&lt;br /&gt;को हिन्दू महासभा किसी कीमत पर सहन नहीं करेगी और अपनी &lt;br /&gt;मांगों के समर्थन में हिन्दू समाज के सहयोग से विराट जन आंदोलन&lt;br /&gt;शुरू करेगी। श्री द्विवेदी ने आज हस्तसाल विधानसभा मण्डल के उत्तम&lt;br /&gt;नगर में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन को मुख्य अतिथि के पद से संबोधित&lt;br /&gt;कर रहे थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री द्विवेदी ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और विशेष&lt;br /&gt;राज्य का दर्जा तुरन्त समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि मुस्लिम &lt;br /&gt;तुष्टिकरण के नाम पर हिन्दुओं और मुसलमानों में भेदभाव करना राष्ट्र&lt;br /&gt;की एकता अखण्डता के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि&lt;br /&gt;हिन्दुओं से अनाप-शनाप टैक्स वसूलकर मुसलमानों पर लुटाने का &lt;br /&gt;दुस्साहस देश में अघोषित इस्लाम शासन को लागू करने का प्रयास है, &lt;br /&gt;जो हिन्दू समाज के अस्तित्व को समाप्त करने गहरा षणयंत्र प्रतीत &lt;br /&gt;होता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्री द्विवेदी ने कहा कि इस षणयंत्र को हिन्दू स्वराज्य की स्थापना के बिना विफल&lt;br /&gt;नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारी संख्या में उपस्थित हिन्दू प्रतिनिधियों को हिन्दू&lt;br /&gt;स्वराज्य की स्थापना का संकल्प दिलाया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हिन्दू महासभा की प्रदेश कार्यकारी अध्यक्षा एडोवोकेट संजया शर्मा ने अपने संबोधन&lt;br /&gt;में कांग्रेस और भाजपा पर एक साथ निशाना साधते हुए उनकी नीतियों और आचरण&lt;br /&gt;को घोर हिन्दू विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम&lt;br /&gt;पर हिन्दुत्व पर सामने से प्रहार करती है तो भाजपा हिन्दू समाज की हितैषी&lt;br /&gt;बनकर हिन्दुत्व की पीठ में पीछे से छूरा भोंकती है। एडोवोकेट संजया ने हिन्दू&lt;br /&gt;जनसमुदाय से कांग्रेस और भाजपा के हिन्दू विरोधी षणयंत्रों से सावधान&lt;br /&gt;रहते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज के नेतृत्व में हिन्दू महासभा की&lt;br /&gt;नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र को मजबूत बनाने का &lt;br /&gt;आह्वान किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सम्मेलन में वरिष्ठ प्रदेश महामंत्री रोहित राघव ने कार्यक्रम संयोजक अजय वर्मा को दिल्ली&lt;br /&gt;प्रदेश का मंत्री मनोनीत करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि अजय वर्मा&lt;br /&gt;के दायित्व संभालने से दिल्ली में हिन्दू महासभा का संगठनात्मक ढांचा मजबूत होगा&lt;br /&gt;और नगर निगम चुनाव 2012 की तैयारियों में मदद मिलेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सम्मेलन की अध्यक्षता हस्तसाल विधान सभा मण्डल के अध्यक्ष विष्णु प्रकाश&lt;br /&gt;दूबे ने की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1955268836921499427?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1955268836921499427/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1955268836921499427' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1955268836921499427'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1955268836921499427'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='हिन्दुओं और मुसलमानों में भेदभाव देश के लिए घातक -द्विवेदी'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-2505493191308395006</id><published>2010-02-25T21:39:00.001-08:00</published><updated>2010-02-25T21:43:58.006-08:00</updated><title type='text'>वोटिंग मशीन पर प्रश्नचिह्न</title><content type='html'>चुनाव प्रक्रिया में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के माध्यम से मतदान पर बहस गरमा गई है। पिछले दिनों कुछ नागरिक संगठनों ने दिल्ली और चैन्नई में कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें उन्होंने ऐसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया था, जो यूरोप के कुछ देशों और अमेरिका के अधिकांश प्रांतों में वोटिंग मशीन में हेराफेरी सिद्ध करने वालों में शामिल रह चुके हैं। इन विशेषज्ञों में हालैंड के कंप्यूटर हैकर रोप गोंगरिज्प, यूनिवर्सिटी आफ मिशिगन में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर और इलेक्ट्रोनिक वोटिंग सुरक्षा के विशेषज्ञ डा. एलेक्स हाल्डरमैन और एटार्नी डा. टिल जैगर शामिल थे। रोप गोंगरिज्प ने एक टेलीविजन पर सीधे प्रसारण में वोटिंग मशीन को हैक कर दिखाया था और अपने देश में ईवीएम को प्रतिबंधित करवाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। डा. टिल जैगर ने जर्मन फेडेरल कंस्टीट्यूशनल कोर्ट में ईवीएम के खिलाफ जिरह की थी जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने जर्मनी में इन मशीनों से मतदान पर रोक लगा दी थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भारत की ओर से हैदराबाद के जाने-माने हैक्टिविस्ट ने ईवीएम की भेद्यता पर अपने विचार रखे। भारत में सबसे पहले इन्होंने ही ईवीएम आधारित चुनाव प्रक्रिया की ईमानदारी के खिलाफ लाल झंडा उठाया था। गोंगरिज्प और डा. हाल्डरमैन के अनुसार इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों की निर्माण प्रक्रिया के समय, मतदान के दौरान और मतदान के पश्चात जालसाजी की जा सकती है। इसके अलावा वोटिंग के दौरान पोलिंग बूथ पर भी इनके माध्यम से धांधली संभव है। वे आश्वस्त हैं कि भारतीय ईवीएम भी जर्मनी, हालैंड या आयरलैंड में प्रयुक्त की गई मशीनों से अलग नहीं हैं, जहां इन्हें नकार दिया गया है। चुनाव में धांधली ईवीएम की नियंत्रण इकाई में ट्रोजन चिप लगाकर भी की जा सकती है। यह चिप ईवीएम स्क्रीन पर मनचाहा परिणाम दिखाएगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दूसरे शब्दों में, मतदाताओं की पसंद जो भी हो, नियंत्रण इकाई हैकर्स की याजना के अनुसार ही संख्या दर्शाएगी। गोंगरिज्प चुनाव में पारदर्शिता, निष्पक्षता और पुष्टिकरण के मुख्य पक्षकार हैं। उनकी तकनीकी राय के आधार पर ही जर्मनी में इलेक्ट्रोनिक मशीनों को चुनाव प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। उनका कहना है, 'जब मशीन के भीतर वोटों की गिनती होती है तो परिणाम की पुनर्जांच का कोई रास्ता नहीं बचता और चुनाव में पारदर्शिता खत्म हो जाती है।' पारदर्शिता के अभाव में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग जालसाजी का माध्यम बन गई हैं। कोई नहीं जानता की मशीन के अंदर क्या चल रहा है। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर जर्मन कंस्टीट्यूशन कोर्ट ने ईवीएम मशीनों को असंवैधानिक घोषित कर दिया है। इसका कहना है कि संविधान चुनाव की सार्वजनिक प्रकृति पर जोर देता है और इसकी जांच के लिए तमाम जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;करता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन विशेषज्ञों के इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों को एकदम खारिज करने के बावजूद ईवीएम में भारत की जनता को बेहद भरोसा है और इसकी जबरदस्त साख है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन मशीनों की अविश्वसनीयता के बारे में जनता को जागरूक करने के लिए अभियान नहीं छेड़ा गया है। हालांकि, विभिन्न दलों के नेता इन मशीनों के बारे में चौकन्ने हैं और विपक्षी दल मशीनों के माध्यम से चुनाव में धांधली का आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन ये मशीनों की गड़बड़ी साबित करने के लिए पुख्ता साक्ष्यों का सहारा नहीं ले पाए थे। हालांकि हरी प्रसाद जैसे लोग चुनाव आयोग से यह मांग कर रहे हैं कि वह उन्हें ईवीएम में गड़बड़ी की संभाव्यता साबित करने का एक मौका दें। शुरुआत में तो आयोग ने इस दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए किंतु अचानक उसने पैर पीछे खींच लिए और पिछले सितंबर को हरी प्रसाद व उनके साथियों के ईवीएम मशीनों को चुनौती देने वाले प्रदर्शन पर रोक लगा दी। आयोग पीछे क्यों हटा? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दो अन्य भारतीय, ईवीएम के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले डा. सुब्रहमण्यम स्वामी और विख्यात चुनाव विश्लेषक व 'डेमोक्रेसी एट रिस्क : कैन वी ट्रस्ट आवर इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशींस' पुस्तक के रचियता जीवीएल नरसिंहा राव भी इस अभियान में कूद पड़े। इस पुस्तक में भारत, अमेरिका और यूरोप में ईवीएम मशीनों का इतिहास बताया है। राव के अनुसार, जिन राजनेताओं ने ईवीएम के प्रति शंका जताई है, उनमें भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी, उड़ीसा चुनाव में कांग्रेस की हार का दोष ईवीएम पर मढ़ने वाले केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात, जनता दल के अध्यक्ष शरद यादव, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, तेलुगू देशम नेता चंद्रबाबू नायडु, आल इंडिया अन्ना द्रविड मुनेत्र कड़गम नेता जयललिता और पीएमके के नेता शामिल हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस सूची को देखने से एहसास होता है कि तीनों ज्ञात राष्ट्रीय गठबंधनों और विभिन्न क्षेत्रों में हर किसी के मन में ईवीएम मशीनों को लेकर शंका है। इनमें से करात चुनाव आयोग को अधिकारिक रूप से लिखित शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर अनेक सवाल खड़े हो चुके हैं। इनमें शामिल हैं : निर्माण स्तर पर मशीन में ट्रोजन चिप लगाने की संभावना, उत्पादन स्तर पर चिप में फेरबदल करना, तकनीकी प्रक्रिया पर चुनाव आयोग का नियंत्रण न होना और तीसरे पक्ष द्वारा जांच-पड़तान करना संभव न होना। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को ईवीएम निर्माण का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेना चाहिए, तीसरे पक्ष द्वारा औचक निरीक्षण करने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए और ईवीएम मशीनों का विभिन्न राज्यों में औचक स्थानांतरण करना चाहिए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर राव ने निष्कर्ष निकाला है कि ईवीएम मशीनों के माध्यम से चुनाव में आठ तरह से धांधली की जा सकती है। चुनाव आयोग ने इस आधार पर इन दलीलों को गलत ठहराना चाहता है कि भारतीय ईवीएम किसी तंत्र (इंटरनेट) से जुड़ी न होकर स्वतंत्र मशीनें हैं। इसलिए ईवीएम के आपरेटिंग सिस्टम पर कोई भी जताना गलत है। जर्मनी में कंस्टीट्यूशन कोर्ट में याचिका दायर करने वाले सोफ्टवेयर इंजीनियर डा. उलरिच वीजनर इस प्रकार की दलीलों की धज्जिायां उड़ा चुके हैं। शपथपत्र में डा. स्वामी ने डा. वीजनर को उद्धृत करते हुए कहा है कि हालैंड, जर्मनी और आयरलैंड में भी ईवीएम इंटरनेट से जुड़ी न होकर स्वतंत्र मशीनें थीं। सीधी सी बात है कि जो भी इन मशीनों को खोलने और सोफ्टवेयर बदलने की पहुंच रखता है वह इनमें किसी भी प्रकार की कार्यात्मकता ला सकता है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर चुनाव आयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों का विश्वास कायम रखना चाहता है तो उसे इन विशेषज्ञों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना होगा। आयोग के जड़ व गैर-पारदर्शी रवैये से लगता है कि या तो उसके पास इन सवालों का कोई जवाब नहीं है या फिर वह कुछ छिपा रहा है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;[ए सूर्यप्रकाश: लेखक विधि मामलों के जानकार हैं] &lt;br /&gt;sabhar dainik jagran&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-2505493191308395006?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/2505493191308395006/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=2505493191308395006' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2505493191308395006'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2505493191308395006'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/02/blog-post_25.html' title='वोटिंग मशीन पर प्रश्नचिह्न'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-3627953179777311592</id><published>2010-02-16T04:35:00.000-08:00</published><updated>2010-02-16T04:37:22.351-08:00</updated><title type='text'>दिग्विजय की वोट यात्रा</title><content type='html'>26/11 के बाद विगत शनिवार को पुणे के जर्मन बेकरी रेस्त्रा में हुए आतंकी हमले में 9 लोगों की जान चली गई और 45 घायल हो गए। मृतकों में चार विदेशी महिलाएं हैं। सन 2001 के 9/11 के आतंकी हमले के बाद अमेरिका में एक भी आतंकवादी घटना नहीं हुई। इसके विपरीत भारत में यह सिलसिला थम नहीं रहा। क्यों? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या हम इस तथ्य से इनकार कर सकते हैं कि पुणे की यह दुखद घटना काग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की आजमगढ़ की 'तीर्थयात्रा' के कुछ दिनों बाद घटित हुई है? इस बीच समाचारपत्रों में यह चर्चा भी थी कि युवराज राहुल गाधी भी आजमगढ़ दर्शन का कार्यक्रम बना रहे हैं। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के बाद उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ देश की विभिन्न जाच एजेंसियों के निशाने पर है और खोजबीन से इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि देश में आतंकवाद के तार आजमगढ़ से गहरे जुड़े हैं। पिछले कुछ वषरें में उत्तर प्रदेश, खासकर आजमगढ़ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के आसपास का क्षेत्र जिहादियों का गढ़ बनता जा रहा है, जो दाऊद के गुगरें से लेकर कई आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में सामने आ रहा है। किंतु बटला हाउस मुठभेड़ के बाद से ही मुस्लिम समाज के कट्टरपंथी इसे फर्जी मुठभेड़ बताकर देश की सुरक्षा एजेंसियों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। मुस्लिम वोट बैंक पर गिद्ध दृष्टि रखने वाले राजनीतिक दल भी उनके साथ हैं। इस कथित मुठभेड़ के खिलाफ आजमगढ़ के कट्टरपंथियों की फौज एक पूरी ट्रेन को ही 'उलेमा एक्सप्रेस' बनाकर दिल्ली आ धमकी थी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादी आजमगढ़ के संजरपुर के निवासी थे। बाद में इस गाव से कई अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी भी हुई। इससे पूर्व अहमदाबाद बम धमाकों के सिलसिले में आजमगढ़ के ही एक मौलाना, अबू बशर को गिरफ्तार किया गया था। बशर की गिरफ्तारी के बाद उसके घर मातमपुर्सी के लिए सपा-बसपा और काग्रेस में होड़ लग गई थी। यह होड़ बटला हाउस मुठभेड़ के बाद और तेज हुई है। इसी सिलसिले में पिछले दिनों काग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह आजमगढ़ पहुंचे थे। वे कथित फर्जी मुठभेड़ में मारे गए युवकों के परिजनों से मिले और उसके बाद लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में यहा तक कहा कि 'न्याय में देरी, न्याय न देने के समान है।' जब सत्ताधारी दल राष्ट्रहितों की कीमत पर वोटबैंक की राजनीति करेगा तो स्वाभाविक है कि इससे सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल गिरेगा और राष्ट्रविरोधी शक्तियों को ताकत मिलेगी। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और गृहमंत्री पी चिदंबरम आतंकवाद के खात्मे को सरकार की बड़ी प्राथमिकता बताते हैं, दूसरी ओर काग्रेस का वरिष्ठ नेता आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ पर ऐसे समय में सवाल खड़ा करता है, जब न केवल साक्ष्य, बल्कि उसी मुठभेड़ का हिस्सा रहा एक आतंकवादी पुलिस की गिरफ्त में हो और पूछताछ में मारे जाने वालों के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की पुष्टि कर रहा हो। क्या इस दोमुंहेपन की नीति से आतंकवाद का सामना किया जा सकता है? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ के संवाददाता सम्मेलन में दिग्विजय सिंह ने जो कहा, उससे पलटते हुए दिल्ली में यह कहा कि वह मुठभेड़ को फर्जी बताने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बाद भोपाल में उन्होंने अपने आजमगढ़ दौरे का स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि आजमगढ़ के कई मुस्लिम युवाओं पर चार राज्यों में पचास से अधिक मामले लादे गए हैं और इसीलिए उन्हें लगता है कि इनके निपटारे के लिए विशेष न्यायालय व सीबीआई की मदद लेनी चाहिए और उन्हें जबरन फंसाने के लिए झूठे प्रकरण नहीं लादने चाहिए। यह कैसी मानसिकता है? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले दिनों पुलिस के हत्थे चढ़े शाहजाद अहमद पर दिल्ली के सीरियल बम ब्लास्ट के साथ बटला मुठभेड़ में शामिल होने का आरोप है। पूछताछ में उसने मारे गए युवाओं को अपना साथी बताया है। फिर इसके एक दिन बाद दिग्विजय उन मृतकों के परिजनों से मिलने क्यों गए? जाच एजेंसियों पर सवाल खड़ा करने वाले कठमुल्लों से मिलकर देश की कानून-व्यवस्था को लाछित क्यों किया? आजमगढ़ के कट्टरपंथी मुसलमानों को 'राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग' और उच्च न्यायालय द्वारा की गई जाच पर भरोसा नहीं है तो अब मुठभेड़ की जाच किससे कराई जाए? &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वस्तुत: आतंकवाद को लेकर काग्रेस का दोहरापन छिपा नहीं है। बटला हाउस मुठभेड़ में दो पुलिस कर्मियों की भी मौत हुई थी। अपने जवानों की शहादत को अपमानित करते हुए काग्रेस के कुछ नेता मुठभेड़ के फौरन बाद बटला हाउस पहुंचे थे, जहा मुस्लिम वोट बैंक की खातिरदारी में मुलायम सिंह यादव सरीखे नेता पहले से ही विराजमान थे। सत्तासीन काग्रेस ने अपने नेताओं को आतंकवादियों का साथ देने वाले कट्टरपंथी तत्वों से दूरी बनाने का निर्देश देने की बजाए सुरक्षाकर्मियों पर सवाल खड़ा किया, जिन्होंने सभ्य समाज को लहूलुहान करने वाले दहशतगदरें को गिरफ्तार करने के लिए अपनी जान दाव पर लगा दी थी। सुरक्षाकर्मियों द्वारा मुस्लिम समाज के उत्पीड़न का आरोप समझ से परे है। न तो पुलिस और न ही सरकार ने आतंकवाद को लेकर मुस्लिम समुदाय को कठघरे में खड़ा किया है। आजमगढ़ के मुसलमानों के लिए यदि यह देश सर्वोपरि है तो उन्हें अपने समुदाय में छिपे उन भेड़ियों की तलाश करनी चाहिए, जो दहशतगदरें को पनाह देते हैं। मुंबई पर इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ, क्या वह सीमा पार कर अचानक घुस आए जिहादियों के द्वारा संभव था? मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों द्वारा ऐसे मददगारों को संरक्षण क्यों मिलता है? और ऐसे कट्टरपंथियों के समर्थन में पूरा समाज किस जुनून में आ खड़ा होता है? आतंकवाद के सिलसिले में जिन युवकों की गिरफ्तारी हुई है, उन पर इस देश के संविधान के अनुरूप कानूनी कार्रवाई चल रही है। हाल में कोलकाता स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमला करने वालों को लंबी सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने दंडित किया है। वषरें की सुनवाई के बाद सन 1993 में मुंबई में बम विस्फोट करने वालों में से कुछ को अब सजा सुनाई गई है, कई रिहा कर दिए गए। इस देश की कानून-व्यवस्था की निष्पक्षता का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि मुंबई हमलों में जिंदा पकड़ा गया अजमल कसाब सरकारी मेहमान बना हुआ है। उसके खिलाफ वीडियो फुटेज हैं, चश्मदीद गवाह हैं, किंतु सुनवाई चल रही है। ऐसे में मुस्लिम प्रताड़ना का आरोप समझ से परे है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ काग्रेस का याराना नया नहीं है। शाहबानो प्रकरण इसका ज्वलंत प्रमाण है। सच्चर और रंगनाथ आयोग के बहाने मुसलमानों की दयनीय दशा के एकमात्र उद्धारक होने का ढोंग करने वाली काग्रेस ही वस्तुत: उनके पिछड़ेपन का कसूरवार भी है। करीब साठ सालों तक देश पर काग्रेस का शासन रहा है। यह समुदाय पिछड़ा ही बना रहा। वही काग्रेस अब उनके उत्थान के लिए अलग से आरक्षण देने का झासा दे रही है। काग्रेस के लिए मुस्लिम समुदाय एक वोट बैंक से अधिक नहीं है और यह बात जागरूक मुसलमानों की समझ में आने लगी है। &lt;br /&gt;[बलबीर पुंज: लेखक भाजपा के राज्यसभा सासद हैं] &lt;br /&gt;साभार दैनिक जागरण&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-3627953179777311592?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/3627953179777311592/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=3627953179777311592' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3627953179777311592'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3627953179777311592'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='दिग्विजय की वोट यात्रा'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-2021983488741818621</id><published>2010-01-20T23:05:00.000-08:00</published><updated>2010-01-21T00:34:01.273-08:00</updated><title type='text'>इण्डेन शर्मा गैस  एजेंसी उत्तम नगर  ने ग्राहकों को परेशान कर रखा है</title><content type='html'>&lt;div&gt;नई दिल्ली। &lt;strong&gt;इण्डेन  शर्मा गैस  एजेंसी उत्तम नगर&lt;/strong&gt; ने नए ग्राहकों को परेशान कर रखा है। यह गैस एजेंसी इण्डेन गैस की घर-घर सप्लाई व नए कनेक्शन बुक करती है। इन्होंने यह नियम बना रखा है कि ग्राहक को नया गैस कनेक्शन तीन बजे बाद ही मिलेगा। मगर यदि कोई ग्राहक यदि सुबह अपने नौकरी पर जाता हो तो उसे कनेक्शन कैसे मिलेगा। बार-बार विनम्रता पूर्वक कहने पर भी यहां का स्टॉफ मदद करने को नही तैयार होता। इसके साथ ये सारे डोकूमेंट होने पर भी नए-नए बहाने लेकर परेशान करते हैं।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;                                                                                             &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;ये नए कनेक्शन मांगने वाले को इतना तंग करते हैं कि या तो वो वहां जाना बन्द कर देता है या इनकी धन पूजा करे तभी काम होगा। डब्लूडब्लूडब्लू डॉट आईओसीएल डॉट कॉम पर जाने के बाद पता चलता है कि नया कनेक्शन उसे मिल सकता है जिसके पास इनमें से एक एक निवास पहचान हो- जैसे राशनकार्ड, बिजली बिल, टेलीफोन बिल, पासपोर्ट, इमप्लायर्स सर्टिफिकेट, फ्लैट एलाटमेंट, पजेशन लेटर, हॉउस रजिस्ट्रेशन पेपर, एलआईसी पॉलिसी, ओटर आइडेंटिटी कॉर्ड, रेंट रिसिप्ट, पैन कोर्ड या ड्राइवरी लाइसेंस रखता हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मगर उत्तम नगर की इण्डेन शर्मा गैस एजेंसी इण्डियन ऑयल कंपनी से भी उपर हो गई है। यदि कोई व्यक्ति राशन कार्ड रखता हो मगर रेंट पर हो तो उसके लिए एफीडेविट, बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट, ओटर आइडेंटिटी कॉर्ड आदि सब चाहिए। जब इस तरह के इतने डोकूमेंट चाहिए तो कंपनी क्यों नही इन सबको अपनी बेबसाइट में मेंशन किया। होना यह चाहिए कि जिस व्यक्ति के पास राशनकार्ड है और रेंट पर रह रहा है तो वो मकान मालिक से लिखवा के दे दे मगर ये लोग नए गैस कनेक्शन देने के नाम पर किसी व्यक्ति को इतना परेशान जलील करते हैं कि वो व्यक्ति आना ही छोड़ दे। क्या ये लोग इस तरह की हरकत कर जनता की सेवा कर रहे हैं। किसी शिकायत के लिए एसिस्टेंट मैनेजर, एरिया मैनेजर या स्टेट मैनेजर को फोन करो तो कोई फोन ही नही उठाता। ये लोग जनता की सेवा करने के लिए बैठे हैं या जनता को परेशान करने के लिए बैठे हैं।&lt;br /&gt;अभी आगे-आगे देखना है कि ये कितना पापड़ बेलवाते हैं। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;इण्डेन गैस शर्मा गैस  एजेंसी उत्तम नगर  ने ग्राहकों को परेशान कर रखा है&lt;br /&gt;नई दिल्ली। इण्डेन गैस शर्मा एजेंसी उत्तम नगर नए ग्राहकों को परेशान कर रखा है। यह गैस एजेंसी इण्डेन गैस की घर-घर सप्लाई व नए कनेक्शन बुक करती है। इन्होंने यह नियम बना रखा है कि ग्राहक को नया गैस कनेक्शन तीन बजे बाद ही मिलेगा। मगर यदि कोई ग्राहक यदि सुबह अपने नौकरी पर जाता हो तो उसे कनेक्शन कैसे मिलेगा। बार-बार विनम्रता पूर्वक कहने पर भी यहां का स्टॉफ मदद करने को नही तैयार होता। इसके साथ ये सारे डोकूमेंट होने पर भी नए-नए बहाने लेकर परेशान करते हैं।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; ये नए कनेक्शन मांगने वाले को इतना तंग करते हैं कि या तो वो वहां जाना बन्द कर देता है या इनकी धन पूजा करे तभी काम होगा। डब्लूडब्लूडब्लू डॉट आईओसीएल डॉट कॉम पर जाने के बाद पता चलता है कि नया कनेक्शन उसे मिल सकता है जिसके पास इनमें से एक एक निवास पहचान हो- जैसे राशनकार्ड, बिजली बिल, टेलीफोन बिल, पासपोर्ट, इमप्लायर्स सर्टिफिकेट, फ्लैट एलाटमेंट, पजेशन लेटर, हॉउस रजिस्ट्रेशन पेपर, एलआईसी पॉलिसी, ओटर आइडेंटिटी कॉर्ड, रेंट रिसिप्ट, पैन कोर्ड या ड्राइवरी लाइसेंस रखता हो। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; &lt;br /&gt; मगर उत्तम नगर की इण्डेन शर्मा गैस एजेंसी इण्डियन ऑयल कंपनी से भी उपर हो गई है। यदि कोई व्यक्ति राशन कार्ड रखता हो मगर रेंट पर हो तो उसके लिए एफीडेविट, बिजली बिल, रेंट एग्रीमेंट,  ओटर आइडेंटिटी कॉर्ड आदि सब चाहिए। जब इस तरह के इतने डोकूमेंट चाहिए तो कंपनी क्यों नही इन सबको अपनी बेबसाइट में मेंशन किया। होना यह चाहिए कि जिस व्यक्ति के पास राशनकार्ड है और रेंट पर रह रहा है तो वो मकान मालिक से लिखवा के दे दे मगर ये लोग नए गैस कनेक्शन देने के नाम पर किसी व्यक्ति को इतना परेशान जलील करते हैं कि वो व्यक्ति आना ही छोड़ दे। क्या ये लोग इस तरह की हरकत कर जनता की सेवा कर रहे हैं। किसी शिकायत के लिए एसिस्टेंट मैनेजर, एरिया मैनेजर या स्टेट मैनेजर को फोन करो तो कोई फोन ही नही उठाता। ये लोग जनता की सेवा करने के लिए बैठे हैं या जनता को परेशान करने के लिए बैठे हैं।&lt;br /&gt; अभी आगे-आगे देखना है कि ये कितना पापड़ बेलवाते हैं।&lt;br /&gt;                                                                                                                                                      राजीव कुमार &lt;br /&gt;                                                    9911850406&lt;br /&gt;                                              rajeevkumar905@gmail.com&lt;br /&gt;                                                                                                                                                  &lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-2021983488741818621?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/2021983488741818621/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=2021983488741818621' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2021983488741818621'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2021983488741818621'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/blog-post_20.html' title='इण्डेन शर्मा गैस  एजेंसी उत्तम नगर  ने ग्राहकों को परेशान कर रखा है'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-3853275749243903611</id><published>2010-01-06T02:28:00.000-08:00</published><updated>2010-01-06T02:31:17.303-08:00</updated><title type='text'>मकर संक्राति – पतंगो का रंगबिरंगी त्यौहारगुजरात में आंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव की धूम</title><content type='html'>मकर संक्राति – पतंगो का रंगबिरंगी त्यौहारगुजरात में आंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव की धूम&lt;br /&gt;32 देशो से 87 पतंगबाज इस महोत्सव में भाग लेंगेमहोत्सव के दौरान अहमदाबाद का आसमान रंगीन हो जाता है300 करोड का बिजनस गुजरात को मिलता हैः गुजराती जानते है कि त्यौहारो से भी कैसे मुनाफा कमाया जा सकता है।&lt;br /&gt;-          &lt;span style="font-size:78%;"&gt;निलेष शुक्ला&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;विश्वभर में भारत ही एक ऐसा देश है जहां सबसे अधिक त्यौहार मनाये जाते है। भारत वर्ष की परंपरा रही है कि वह त्यौहारों को उत्सव के रुप में मनाकर खुशी हांसिल करता है। इसमें भी गुजराती उत्सव को मनाने में सबसे आगे रहते है और मजे की बात यह है कि वे उत्सव मनाने के साथ-साथ उससे भी अपना मुनाफा कमाना नहीं छोडते। शायद इसीलिए कहा जाता है कि गुजरातीयों की नस-नस में बिजनस बसा हुआ है। मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबसे गुजरात में उत्सवो को मनाने का सिलसिला शुरु किया है तबसे गुजरात का होटल बिजनस तिगुना बढ गया है। मोदी जी कहते है कि हमने हमारी पहचान केवल 12 रुपये की किंमत से बनाई है फिर वो पतंग हो या डांडिया, जबकि अन्य लोग इसी पहचान के लिए लाखो रुपये खर्च करते है। &lt;br /&gt;गुजरात में वर्ष के अंत में नवरात्रि और कच्छ उत्सव का सफलता पूर्वक आयोजन करने के बाद नववर्ष की शुरुआत अंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव से की जाती है। यह त्यौहार 10 से 14 जनवरी 2010 तक अहमदाबाद में मनाया जायेगा। इस उत्सव में केवल घरेलु पतंगबाज ही नहीं अपितु आंतराष्ट्रीय स्तर के पतंगबाज हिस्सा लेते है। इस वर्ष 32 देशो से 87 पतंगबाज इसमें भाग लेने के लिए आनेवाले है। जिसमें विदेशो से बल्गारीया, फ्रांस, कोलंबिया, मलेशिया, युनाईटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्युजिलेन्ड, स्वीट्जरलेन्ड, सिंगापुर, स्वीडन वगेरे देश भाग लेंगे। श्री पी.के गेरा, निवासी आयुक्त, दिल्ली, गुजरात सरकार ने जानकारी दी कि गुजरात सरकार ने इन सभी देशो के एम्बेसेडर व डिप्लोमेट्स को आमंत्रित किया गया है एवं अपने देश में से राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के पतंगबाज इसमें भाग लेंगे।  पतंग महोत्सव को आंतराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का श्रेय गुजरात के मुख्यमंत्री को जाता है। इससे गुजरात को 300 करोड रुपयो का व्यापार मिलता है। गुजराती अच्छी तरह से जानते है कि त्यौहारो से भी कैसे मुनाफा कमाया जा सकता है। इससे गृह उद्योग को भी बहुत लाभ होता हैं। घर में ही औरते और बच्चे पतंग बनाने का काम करते हैं कमाई करते हैं। यहां तरह-तरह की पतंगे जैसे गोल, चील, चांदपर, आखियो, पावलो, पोणीया या फिर रोकेट और रात के समय उडाने के लिए लालटेनवाली पतंग खास बिकती है। पूरा आकाश रंग-बिरंगी पतंगो से घिरा रहता हैं।  &lt;br /&gt;            प्राचीन काल के बहुत से चित्र ऐसे हैं जिसमें भगवान कृष्ण को पतंग उडाते देख सकते हैं। उस समय की पुस्तको में भी पतंग का उल्लेख मिलता है। भारत में मुगल समय में पतंगबाजी का शौक लोकप्रियता के शिखर पर था। अनेक मुगल बेगमो और शहजादो को पतंग उडाने का शौक था। उस समय पतंग का उपयोग प्रेमी को संदेश पहुंचाने के लिए किया जाता था। मध्य काल में संपूर्ण भारत पतंगो से प्रसिद्ध हो गया था। लखनउ व दिल्ली में पतंगो की प्रतियोगिताएं योजी जाती थी। अंतिम बादशाह बहादूरशाह जफर भी पतंग उडाने का शौक रखते थे। उनके समय में यमुना के दोनों किनारो पर पतंग उडाने की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। दिल्ली व उत्तर भारत के अन्य शहरों में सावन-भादों में पतंग उडाने का रिवाज है। 15 अगस्त के दिन तो आसमान तिरंगी पतंगो से घिर जाता है। &lt;br /&gt;      पतंग उडाने का आनंद केवल भारतीय ही लेते हैं ऐसा नहीं हैं। विदेशो में भी पतंग बहुत ही आनंद के साथ उडाई जाती हैं। अमरिका में तो पतंग उडाने के इतिहास को जानने के लिए एक म्युजियम बनाया गया हैं। जिसमें पतंग बनानेवाले कारीगरों के बारे में और जग प्रसिद्ध अलग-अलग तरह की पतंगो के बारे में रोचक जानकारी दी गई हैं। इस म्युजियम का उदघाटन 21 अगस्त 1990 को हुआ था। &lt;br /&gt;      थाईलेन्ड में पतंगः यहां 13वीं सदी में पतंग बौद्ध धर्म के लोग भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए उडाते थे। और जब वे पतंग उडाते थे तब वे एक अनोखा "हमींग" जैसी आवाज भी करते थे जिससे भगवान तक उनकी आवाज पहुंच सके। आजकल वे वर्षा ऋतु के प्रारंभ में पतंग उडाते हैं जिसमें वे एक बडी सी पतंग जिसे "चुला" कहा जाता है और उसके साथ अन्य छोटी-छोटी पतंगे जिसे "पाकापाओस" कहा जाता हैं उसे उडाते हैं। दो अलग प्रकार की पतंगों को एक-दूसरे को अपनी ओर खिंचने का प्रयास किया जाता है और इस खेल को देखने के लिए मैदान में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठे होते हैं। &lt;br /&gt;      मलेशिया में पतंगः मलेशिया की पतंगे थाईलेन्ड की पतंगो से जरा अलग होती हैं। यहां पर मोटे तौर पर चकोर पतंग बनाई जाती हैं लेकिन उसकी खासियत यह है कि उसमे कलाकारी की हुई लंबी पूंछ लगाई जाती हैं क्योंकि वहां हवा बहुत तेज चलती हैं।       इन्डोनेशिया में पतंगः यहां भी पतंग बहुत समय पहले से ही उपयोग में ली जाती हैं। यहां जो सबसे पहले पतंग बनाई गई थी वह पेड के पत्तो से बनाई गई थी, जिसका उपयोग सागर में दूर मछली पकडने के लिए किया जाता था। इन्डोनेशिया के चारों और आईलेन्ड हैं इसलिए वहां तेज हवाएं चलती हैं इसलिए य़हां पर बडी-बडी पतंगे वनाई जाती हैं जो पक्षी या पशु के आकार की होती हैं। इन पतंगो को बनाने के लिए बांस की लकडी, सूती कपडा या नायलोन का उपयोग किया जाता हैं। &lt;br /&gt;      चीन में पतंगः ऐसा कहा जाता है कि चीन में सबसे पहले पतंग का उपयोग दूरी मापने के लिए किया था। वहां भी पतंग उडाने का आनंद एक उत्सव की तरह ही मनाया जाता है। चीन में नौंवे महीने का नवां दिन पतंग उडाने का दिन माना जाता है। कहा जाता है कि 3000 वर्ष पहले चीन के सेनापति ह्युन त्स्यांग ने पतंग को बांस के टुकडे के साथ बांधकर उसे शत्रु के देश में भेजते थे, और जब पतंग में से हवा पास होने से उसमें से सीटी जैसा आवाज निकलता जिसे सुनकर दुश्मन भाग जाते थे। अपने लश्कर के जवानो को संदेश पहुंचाने के लिए भी पतंग का उपयोग किया जाता था। चीन में 300 तरह की अलग-अलग प्रकार की पतंगे बनाई जाती है। चीन की राजधानी बीजिंग में सबसे बडा पतंग का संग्रहालय बनाया गया है। &lt;br /&gt;पतंग का उपयोग लश्कर के अलावा वैज्ञानिक शोध के लिए भी किया जाता था। 1749 में स्कोटलेन्ड के एलेकजेन्डर विल्सन ने पतंग की मदद से विविध उंचाइयों पर उष्णतामान का माप निकाला था। राइट बंधुओने ओस्ट्रिया के लोरेन्स हाग्रेवना 1884 में सिडनी में बक्से के आकार का पतंग बनाकर उसमें वजन डालकर उसे उडाने में सफलता हांसिल की थी।&lt;br /&gt;      इस पर्व में जहां लोग पतंग उडाने का आनंद उठाते हैं वहीं मासुम पक्षी भी इसका शिकार हो जाते हैं। क्योंकि अचानक से उनके स्वच्छंद आकाश में पतंग रुपी अनेक डोर की बाधाएं आ जाती हैं जो उन्हें उडने में बाधा डालती हैं और ये निर्दोष या तो घायल होते हैं या मारे जाते हैं। एक अंदाज अनुसार एक ही दिन में करीब 10,000 पक्षी घायल होते हैं या मर जाते हैं। इसलिए पतंग रसिको को चाहिये की वे पतंग उडाते समय इस बात का भी ध्यान रखे की कोई निर्दोष पक्षी घायल न हो। &lt;br /&gt;      तो चलिए हम भी पतंग उडाने की तैयारी करते हैं लेकिन जरा संभलकर इससे किसी को कोई नुकसान न हो.... चली रे चली रे पतंग मेरी चली रे..... ये काटा..... वो काटा.....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-3853275749243903611?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/3853275749243903611/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=3853275749243903611' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3853275749243903611'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/3853275749243903611'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/blog-post_5216.html' title='मकर संक्राति – पतंगो का रंगबिरंगी त्यौहारगुजरात में आंतराष्ट्रीय पतंग महोत्सव की धूम'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-5835420588013571757</id><published>2010-01-06T00:58:00.000-08:00</published><updated>2010-01-06T00:59:17.718-08:00</updated><title type='text'>फिर हुआ एक पत्रकार पर जानलेवा हमला</title><content type='html'>कटिहार, बिहार ।बिहार मैं अपराधिओं के हौसले फिर से बुलंद नजर आने लगे हैं . तजा घटनाक्रम मैं अधिकारीयों और दलालों के गठजोर से पनपे गुंडों ने एक टी वी पत्रकार को अपना निशाना बनाया है . इ टीवी बिहार से जुड़े पत्रकार प्रवीण ठाकुर पर बीते बुधवार की रात को कटिहार के सदर अस्पताल मैं कुछ गुंडों ने उस समय हमला बोल दिया जब वे समाचार संकलन कर रहे थे , इस हमले मैं मैं वे बुरी तरह घायल हो गएँ हैं और अस्पताल मैंभर्ती हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बताया जाता है की बिहार खासकर कटिहार के सरकारी अस्पतालों मैं स्वास्थ विभाग के अधिकारीयों और डाक्टरों की मिलीभगत से एक मजबूत माफियातंत्र काम करता है जो न केवल अस्पतालों मैं घटिया दवाईओं अवं अन्य जीवन रक्षक चीजों की आपूर्ति करता है वरन मरीजों को डाक्टरों द्वारा लिखे घटिया दवाओं को खास दुकानों से खरीदने को मजबूर भी करता है , और यही कारण है की यह तत्वा नहीं चाहते की अस्पताल परिसर मैं पत्रकारों की आवाजाही हो और इसका सबसे बड़ा सबूत है पत्रकार प्रवीण ठाकुर पर हमला ....क्योंकि श्री ठाकुर की माने तो वे एक फोलोउप न्यूज़ करने गए थे जिसमे की अस्पताल प्रशासन के पहल पर एक मानसिक मरीज को इलाज के लिए सरकारी खर्च पर बहार भेजा जाना था ..जो की अस्पताल प्रशासन के मनविये चहरे को ही दिखता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालाँकि इस परिसर मैं ये कोई नई घटना नहीं है अन्य पत्रकारों की मने तो यहाँ औए दिन पत्रकारों के साथ दुर्वेव्हार होते रहते है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस पुरे घटनाक्रम मैं प्रशाशन की भूमिका वैसी ही है जैसा आमतोर पर होता है . पत्रकारों के लाख निवेदन के बाबजूद प्रशासन इस माफिया तंत्र के खिलाफ कोई ठोस जाँच करवा कार्रवाई करने के पक्ष मैं नजर नहीं आता.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;रमेश मिश्र , कटिहार&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5835420588013571757?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5835420588013571757/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5835420588013571757' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5835420588013571757'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5835420588013571757'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/blog-post_06.html' title='फिर हुआ एक पत्रकार पर जानलेवा हमला'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-625157031611664988</id><published>2010-01-04T22:25:00.000-08:00</published><updated>2010-01-04T22:28:16.436-08:00</updated><title type='text'>हिन्दू संस्कृति से ही मानवता की रक्षा संभव - डॉ. मोहनराव भागवत</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/S0Lb5hMjDSI/AAAAAAAAAGo/nJz1XZvgeAE/s1600-h/bhagvat.JPG"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 313px; DISPLAY: block; HEIGHT: 320px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5423138682517523746" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/S0Lb5hMjDSI/AAAAAAAAAGo/nJz1XZvgeAE/s320/bhagvat.JPG" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;प्रयाग, 03 जनवरी (विश्व संवाद केन्द्र)। राश्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन राव भागवत ने माघ मेला स्थित परेड ग्राउण्ड में आयोजित संघ समागम में हजारों गणवेशधारी स्वयंसेवकों व नागरिकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भोगवादी, प्रकृतिविरोधी, पिश्चमी जीवन शैली को छोड़कर और हिन्दू संस्कृति को अपनाकर ही पर्यावरण एवं मानवता की रक्षा की जा सकती है।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;उन्होंने कहा कि यदि दुनिया के सभी देश पर्यावरण को लेकर समय रहते अगर नहीं चेता तो कुछ ही दिनों में दुनिया से मानव जीवन ही समाप्त हो जायेगा। इसका एकमात्र उपाय त्यागपूर्ण भारतीय संस्कृति से संभव है। इसलिए हम सबको प्रकृति के एक अंग होने के नाते प्रकृति से उतना ही लें जितना मूझे चाहिए। श्री भागवत ने बहती उर्जा का इस्तेमाल करने पर बल दिया और कहा कि बहती रुपी उर्जा जैसे सूर्य, नदी, जंगल, व खनिज सम्पदा का इस्तेमाल शोशण के बजाय दोहन के रुप में करें, तो सब कुछ नियंत्रित हो सकता है।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;संघ प्रमुख ने कहा कि स्वयंसेवकों द्वारा एक लाख से अधिक सेवा के कार्य बिना सरकार के सहयोग से चलायें जा रहें है। इस प्रकार के कार्यो में समान जनता के सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण करना है। यदि संघ को जानना हो तो बड़ी संख्या में स्वयंसेवक बनकर जान सकते है। उन्होंने अधिक से अधिक स्वयंसेवक बनने का आह्वान किया। श्री भागवत ने कहा कि संघ का कार्य न किसी के विरोध में और नहीं ही किसी के प्रतिक्रिया में है, इसे समझने के लिए संघ की शाखा में आना जरुरी है। उन्होंने शाखा में आने का आह्वान करते हुए कहा कि आइए संघ के दरवाजे खुले हैं। जब तक इसकी कार्य प्रणाली को नहीं समझेगें, तब तक आत्मा नहीं समझ पायेंगे। संघ का काम अनुभव का है। अनुभव करके ही इसकी कार्य प्रणाली को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि संघ की नीतियां सनातन हिन्दू संस्कृति की रही हैं। जो त्याग, सहिश्णु व सर्वधर्म समभाव पर टिकी हैं। इसका कट्टरता से कोई वास्ता नहीं है। भारतीय संस्कृति कभी यह नहीं सिखाती `केवल हम सही हैं। बाकी सब गलत।´ विश्व बन्धुत्व का इससे बड़ा उदाहरण अन्य किसी संस्कृति में नहीं है।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;उन्होंने कहा कि जहां हिन्दू जनसंख्या प्रभावी नहीं है वहां ‘सडयन्त्रकारी शक्तियों द्वारा देश विरोधी गतिविधियों बढ़ रही है। इन सारे समस्याओं को समाधान हिन्दुत्व में है। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतों द्वारा यह विभ्रम फैलाया जा रहा है कि हिन्दू भी आतंकवादी होता है जबकि संघ का मानना है कि हिन्दू आतंकवादी हो ही नहीं सकता है यदि कोई हो गया भी तो हिन्दू समाज उसके साथ कभी खड़ा नही हो सकता। जबतक हिन्दुत्व की विचारधारा के आधार पर देश के सभी वर्गो, समुदायों एवं जातियों को एकसूत्र में बांधा नहीं जायेगा तब तक वैभवशाली राश्ट्र का निर्माण नहीं हो सकता।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि तथाकथित राजनेता अपनी निजि स्वार्थो के कारण जाति, पन्थ, भाशा, सम्प्रदाय व क्षेत्रवाद को बढ़ावा दे रहे है। इन नेताओं का देश की सुरक्षा व समस्या से कोई लेना देना नहीं है इनको सिर्फ कुर्सी चाहिए। तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर कहा कि ये तुच्छ राजनीति करने वाले राजनेताओं की देन है। आज उनका कुछ नहीं बिगड़ रहा है उनके इस करतुत के कारण देश की सम्पति जल रही है। उन्होंने सन् 1952 के श्री गुरुजी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा उनका मानना था कि भाशावाद के नाम पर राज्य का बंटवारा नहीं होेना चाहिए। आज इस प्रकार की समस्या हम सबके सामने दिख रही है।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;उन्होंने कहा कि भारत की सीमाऐं चारो तरफ से असुरक्षित है। चीन अपने सामंतवादी नीति के तहत हमको चारों तरफ से घेर रहा है। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लेकर कहा कि वह भारत से दुश्मनी छोड़ नहीं सकता है क्योंकि उसका जन्म ही दुश्मनी से हुयी। बांग्लादेश हमारे सैनिकों को मारता है और हमारे सीमाओं के अन्दर घुसपैठ करके अपना दावा ठोकता है। धीरे-धीरे बाग्लादेश आतंकवादियों का गढ़ बनता जा रहा है समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में हमारे सामने खतरा बढ़ेगा। इसलिए जोर देकर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद भी सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर भेंजने में असफल है। राजनीतिक स्वार्थो के चलते घुसपैठियों को राशन कार्ड, मतदाता सूची में नाम अंकित कर उनसे सहानुभूति जतायी जा रही है। उन्होंने इन सभी समस्याओं के पिछे सरकार की ढुलमुल नीति को जिम्मेदार ठहराया। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;श्री भागवत देश की आन्तरिक समस्याओं पर बोलते हुए कहा कि नक्सलवाद, उग्रवाद सहित अन्य प्रकार की समस्या जो हमारे सामने आ रही है उसके मूल में विदेशी ताकतें है। रंगनाथ कमेटी का बिना नाम लिये बगैर कहा कि संविधान के खिलाफ दिये जा रहे आरक्षण देश को बॉटने का काम करेगा न कि जोड़ने का इसलिए इस प्रकार के आरक्षण से सरकार को बचना चाहिए।। उन्होंने कहा कि भारत में तथाकथित अल्पसंख्यकों को इतनी अधिक सुविधाऐं दी जा रही है कि देश में बहुसंख्यक होना अपराध सा हो गया है।&lt;br /&gt;उद्बोधन के प्रारम्भ में स्वयंसेवक घोश की थाप पर पथसंचलन करते हुए संघ समागम स्थल पर पहुंचे। सभा में सरसंघचालक जी के आने पर स्वयंसेवकों ने सरसंघचालक प्रणाम किया। तत्पश्चात ध्वजारोहण हुआ। श्री भागवत के उद्बोधन के पूर्व स्वयंसेवकों ने सूर्य नमस्कार, दण्ड, नियुद्ध आदि का प्रदर्सन किया।&lt;br /&gt;इस संघ समागम में प्रमुख रुप से विहिप के अन्तर्राश्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल, पूर्व मानवसंसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी, पूर्व मंत्री डॉ नरेन्द्र सिंह गौर, लखनउ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं संघ के सह क्षेत्र संघचालक प्रो. देवेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष प्रान्त संघचालक प्रो. कृश्ण बिहारी पाण्डेय, क्षेत्र प्रचारक अशोक बेरी, क्षेत्र कार्यवाह राम कुमार वर्मा, विद्याभारती के क्षेत्र संगठन मंत्री िशवकुमार, एंव प्रान्त प्रचारक िशवनाराण सहित अन्य स्वयंसेवक व कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रान्त शारीरिक िशक्षण प्रमुख रत्नाकार एवं अतिथियों का परिचय प्रान्त कार्यवाह डॉ विश्वनाथ लाल निगम ने किया। &lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-625157031611664988?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/625157031611664988/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=625157031611664988' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/625157031611664988'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/625157031611664988'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/blog-post_1970.html' title='हिन्दू संस्कृति से ही मानवता की रक्षा संभव - डॉ. मोहनराव भागवत'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/S0Lb5hMjDSI/AAAAAAAAAGo/nJz1XZvgeAE/s72-c/bhagvat.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-8379529670014700412</id><published>2010-01-04T01:28:00.000-08:00</published><updated>2010-01-04T01:32:16.231-08:00</updated><title type='text'>इस टीके पर टीका टिपण्णी  क्यों</title><content type='html'>&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal"&gt;&lt;strong&gt;सुभाष गाताडे&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal"&gt; सर्वाइकल कैंसर से मुक्ति का शर्तिया इलाज के नाम से एक मल्टीनेशनल कंपनी द्वारा तैयार किए गए एचपीवी वैक्सिन के विज्ञापन को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तमाम लोगों ने देखा होगा। इस कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए कंपनी आपको सलाह देती है कि आप अपनी बेटी को यह टीका अवश्य लगवाएं और सुरक्षित व निश्चिंत हो जाएं। यह अलग बात है कि इस टीके का प्रभाव सिर्फ चार साल तक ही रहता है और इसके चलते जिन किशोरियों-बच्चियों को यह टीका लगाया भी जा रहा हो, उन्हें अगर यौन संसर्ग की अवस्था में सक्रिय होने वाले इस वायरस से बचना है तो फिर इसे लगाना पड़ सकता है। पिछले दिनों चंद महिला संगठनों ने दिल्ली के इंडियन वुमेंस प्रेस का‌र्प्स में एक आमसभा करके इस मसले पर अपने सरोकार का इजहार किया और बताया कि किस तरह देसी-विदेशी बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे के लिए स्ति्रयों के शरीरों का दोहन कर रही हैं। गौरतलब है कि इस मसले पर उनकी सक्ति्रयता जुलाई 2009 में शुरू हुई थी, जब उन्हें पता चला कि आंध्र प्रदेश और गुजरात के ग्रामीण इलाकों की लगभग तीस हजार आदिवासी किशोरियों को (जिनकी उम्र 10 से 14 साल के बीच थी) गार्डासिल नामक एक टीका लगाया जा रहा है और यह दावा किया जा रहा है कि इससे सर्वाइकल कैंसर को रोका जा सकेगा। इन महिला संगठनों ने जब चिकित्सा विशेषज्ञों की सहायता से अधिक जानकारी हासिल करने की कोशिश की तो उन्हें इस संबंध में कई अन्य विस्फोटक तथ्य उजागर हुए। उन्हें यह पता चला कि विकसित मुल्कों में पहले से प्रचलित इस टीके को लगाने के तमाम खतरनाक परिणाम सामने आ चुके हैं। इन टीकों से कई स्वस्थ किशोरियों की मौत मौत होने की खबरें भी आई हैं, जिससे कई कंपनियों को इस टीके की खेपों को बाजार से हटाना भी पड़ा है। इस बात को मद्देनजर रखते हुए कि प्रस्तुत परीक्षणों की तरफ भारत सरकार आंखें मूंदे हुए है, उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन भी स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा। यह अलग बात है कि अब भी मंत्रालय इस मसले पर मौन है और एक तरह से मल्टीनेशनल कंपनियों और एनजीओ के साथ परीक्षणों में साझेदारी में संलिप्त है। निश्चित ही एचपीवी वैक्सिन के प्रसार से उजागर हुई प्रक्ति्रया में नया कुछ नहीं है। गौरतलब है कि आउटसोर्सिग के बढ़ते प्रचलन के दौर में बड़ी-बड़ी बहुदेशीय दवा कंपनियों द्वारा अपनी नई दवाओं के परीक्षण का बोझ तीसरी दुनिया के मुल्कों की जनता पर छोड़ने के मामले में कुछ भी अनोखा नहीं है। पिछले दिनों मुंबई में आयोजित पहले इंडिया फार्मा सम्मिट में इससे जुड़ी तमाम बातें सामने आई थीं। यह बात स्पष्ट हुई कि स्वास्थ प्रणाली की खामियों के चलते ऐसे प्रयोगों में वालंटियर बने लोगों की सुरक्षा का मसला अक्सर उपेक्षित ही रह जाता है। यहां तक कि मरीजों से हासिल की गई सहमति भी विवादास्पद दिखती है। यह अकारण नहीं कि ऐसे लोगों की सहज उपलब्धता के चलते जो गैर-जानकारी में या अपनी गरीबी के चलते ऐसी नई दवाओं का अपने शरीर पर प्रयोग करने के लिए तैयार रहते हैं और इन देशों की लचर स्वास्थ्य प्रणाली और उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते आउटसोर्स किए गए चिकित्सकीय परीक्षणों का बाजार आज 12,000 हजार करोड़ रुपये से आगे निकल चुका है। मुंबई में आयोजित सम्मेलन में उद्योगपतियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज यानी फिक्की की तरफ से एक रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें यह जोर भी दिया गया कि राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए उपयोगी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है। न्यूयॉर्क के फोर्डहैम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर फाल्गुनी सेन द्वारा तैयार की गई प्रस्तुत रिपोर्ट में राष्ट्रीय हितों को भी अलग ढंग से परिभाषित किया गया था। इसके मुताबिक चिकित्सकीय परीक्षणों के लिए राष्ट्रीय हित का मतलब है ऐसी दवाएं, जो भारतीय आबादी के हिसाब से अधिक प्रासंगिक हों और अन्य मुल्कों में इसी किस्म की वरीयता नहीं हो। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परीक्षणों के लिए भारत की परिस्थिति के मुताबिक, ऐसे पैमाने भी तय किए जा सकते हैं कि कौन-सी जांच यहां संभव नहीं होगी। इस फेहरिस्त में अन्य मुल्कों में पाबंदी लगाई गई दवाएं भी शामिल की जा सकती हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के मेडिकल रिसचर्स इस बात को लेकर चकित थे कि वर्ष 2007 में जिन नए ड्रग्स पर परीक्षण चले थे, उसके संबंध में एक तिहाई से अधिक परीक्षण अमेरिका के बाहर हुए थे। प्रस्तुत अध्ययन में अमेरिका की बीस बड़ी फार्मास्युटिकल्स कंपनियों ने 500 से अधिक चिकित्सकीय परीक्षणों का विश्लेषण किया था। अधिक महत्वपूर्ण बात यह थी कि जिन बाहर के मुल्कों में इन परीक्षणों को अंजाम दिया गया, उसके बारे में कंपनियों के लिए पहले से स्पष्ट था कि उनकी इन दवाओं के लिए कोई खास बाजार मिलने वाला नहीं है। सभी जानते हैं कि तीसरी दुनिया के मुल्कों की बीमारियों और पहली दुनिया की बीमारियों में कुछ समानताएं मिल सकती हैं, लेकिन काफी फर्क भी है। ऐसी तमाम बीमारियां, जो यहां कभी-कभी महामारी का रूप धारण करती दिखती हैं, उनसे वहां लगभग काबू पा लिया गया है। टीबी जैसी बीमारी हो या दूषित जल से पैदा होने वाली डायरिया जैसी बीमारियां हों, वे कभी वहां उस किस्म का कहर नहीं बरपाया करतीं, जैसे कि वे तीसरी दुनिया के हिंदुस्तान जैसे मुल्कों में करती हैं। यह अकारण नहीं कि इन अध्ययनकर्ताओं को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि टीबी जैसी बीमारी के लिए तीसरी दुनिया के इन लोगों पर कोई चिकित्सकीय परीक्षण नहीं चले, भले ही यह बीमारी विकासशील देशों में आज भी बड़े पैमाने पर विद्यमान हो। गौरतलब है कि आम हिंदुस्तानी का बड़ी-बड़ी कंपनियों की दवाओं के लिए गिनीपिग बनने का सिलसिला कोई नया नहीं है। वर्ष 1997 में देश के प्रमुख कैंसर संस्थान इंस्टीटयूट फॉर साइटॉलॉजी एंड प्रिवेंटिव एनकोलॉजी के तहत चला एक अध्ययन काफी विवाद का विषय बना था, जब पता चला था कि 1100 ऐसी स्ति्रयां, जो सर्वाइकल डिसप्लेसिया (गर्भाशय के मुख पर कोशिकाओं के विकास) से पीडि़त थीं, का इलाज केवल इसलिए नहीं किया गया ताकि बीमारी किस तरह बढ़ती है, उसका अध्ययन किया जाए। इसके बाद भी जब अस्वाभाविक बढ़त देखी गई और सर्वाइकल कैंसर की आशंका महसूस की गई, तब भी न तो उन स्ति्रयों को इसके बारे में चेतावनी दी गई और न ही उनका इलाज किया गया, बल्कि चूहों की तरह उन पर परीक्षण जारी रहा। ज्यादा विचलित करने वाली बात यह थी कि यह समूचा अध्ययन देश के एक अग्रणी चिकित्सकीय खोज संस्थान के बैनर तले संचालित हो रहा था, जिस पर चिकित्सकीय शोध की नैतिक मार्गदर्शिका बनाने की प्रमुख जिम्मेदारी थी। इसमें कोई दोराय नहीं कि जब तक चिकित्सकीय नैतिकता के केंद्र में जानकारी के साथ सहमति का मसला नहीं रहेगा, तब तक ऐसे प्रयोगों का बार-बार दोहराव हम देखते रहेंगे। इसके लिए तैयार की जा रही मार्गदर्शिकाओं में न केवल नई तकनीकों व शोधों से उत्पन्न चुनौतियों का जिक्र होना चाहिए, बल्कि बदली सामाजिक परिस्थितियां जैसे भारत जैसे समाज में व्याप्त लिंग व वर्ग असमानता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal"&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="font-size:78%;"&gt;साभार दैनिक जागरण&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-8379529670014700412?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/8379529670014700412/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=8379529670014700412' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8379529670014700412'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/8379529670014700412'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/blog-post_04.html' title='इस टीके पर टीका टिपण्णी  क्यों'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-2580493574544739977</id><published>2010-01-04T01:17:00.000-08:00</published><updated>2010-01-04T01:18:20.763-08:00</updated><title type='text'>केंद्र सरकार की मज़बूरी</title><content type='html'>&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal"&gt;नक्सलियों से निपटने की रणनीति में बदलाव समय की मांग हो सकती है, लेकिन यह शुभ संकेत नहीं कि पश्चिम बंगाल और झारखंड की नई सरकार का रवैया केंद्र से मेल नहीं खा रहा। नक्सलियों से चाहे जैसे निपटा जाए, लेकिन केंद्र और नक्सलवाद प्रभावित राज्यों में तालमेल होना प्राथमिक आवश्यकता है। यह निराशाजनक है कि नक्सलवाद का मुकाबला करने के तमाम वायदों और तैयारियों के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आवश्यक तालमेल कायम होता नजर नहीं आ रहा। नि:संदेह इसका लाभ नक्सली संगठन उठा रहे हैं। उन्होंने न केवल आपस में बेहतर संपर्क स्थापित कर लिए हैं, बल्कि खुद को आधुनिक हथियारों से भी लैस कर लिया है। यही कारण है कि वे पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले करने और जनजीवन को बाधित करने में सक्षम हो गए हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में तो वे जब चाहते हैं तब आसानी से बंद आयोजित करने में सफल हो जाते हैं। यह समझ पाना कठिन है कि जब केंद्र सरकार को उनके खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं करनी थी तो फिर ऐसा माहौल क्यों बनाया गया कि उनसे दो-दो हाथ किए जाएंगे? यह विस्मृत नहीं किया जा सकता कि नक्सलियों के खिलाफ सैन्य बलों और यहां तक कि वायुसेना के इस्तेमाल को लेकर भी व्यापक चर्चा छिड़ी। अब यह कहा जा रहा है कि नक्सलियों को निशाना बनाने के बजाय उनकी घेरेबंदी की जाएगी और उन तक हथियारों एवं अन्य सामग्री की आपूर्ति को रोका जाएगा। यह जानना कठिन है कि इसके पहले इस पर विचार क्यों नहीं किया गया कि नक्सलियों को हथियारों की आपूर्ति रोकने की जरूरत है? पिछले कुछ वर्षो में नक्सलियों ने जैसे आधुनिक हथियार एवं विस्फोटक पदार्थ जुटा लिए हैं उससे यही प्रतीत होता है कि इसके पहले उनकी सप्लाई लाइन को बाधित करने पर विचार ही नहीं किया गया। देखना यह है कि अब ऐसा करने में सफलता मिलती है या नहीं? निश्चित रूप से केवल इतने से ही नक्सलियों के मनोबल को तोड़ना कठिन है, क्योंकि अब वे इतने अधिक दुस्साहसी हो गए हैं कि हथियारों के लिए पुलिस थानों पर भी हमला करने में संकोच नहीं कर रहे हैं। पुलिस थानों और सुरक्षा बलों के ठिकानों पर नक्सलियों के हमले यह भी बताते हैं कि किस तरह पुलिस को आवश्यक संसाधनों से लैस करने में अनावश्यक देरी की गई। यह निराशाजनक है कि इस मोर्चे पर राज्य सरकारें अभी भी तत्पर नजर नहीं आतीं। यह एक तथ्य है कि पुलिस सुधारों के मामले में राज्य सरकारों का रवैया ढुलमुल ही अधिक है। यह विचित्र है कि राज्य सरकारें पुलिस सुधारों के मामले में न तो उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर अमल करने के लिए आगे बढ़ रही हैं और न ही सुरक्षा विशेषज्ञों के सुझावों पर। आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में रेखांकित किए जा रहे नक्सलवाद का मुकाबला करने के मामले में सबसे अधिक निराशाजनक यह है कि केंद्र और राज्यों के बीच इस पर कोई आम सहमति कायम नहीं हो पा रही है कि नक्सलियों को सही रास्ते पर कैसे लाया जा सकता है?&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal"&gt;साभार दैनिक जागरण &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-2580493574544739977?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/2580493574544739977/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=2580493574544739977' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2580493574544739977'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/2580493574544739977'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='केंद्र सरकार की मज़बूरी'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-5365086112055632730</id><published>2010-01-04T00:20:00.000-08:00</published><updated>2010-01-04T00:25:06.011-08:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/S0Glu4FTN5I/AAAAAAAAAGg/fX8Hj-mEWnM/s1600-h/untitled.bmp"&gt;&lt;img style="TEXT-ALIGN: center; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 109px; DISPLAY: block; HEIGHT: 78px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5422797651077969810" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/S0Glu4FTN5I/AAAAAAAAAGg/fX8Hj-mEWnM/s320/untitled.bmp" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;मात्र नौ वर्ष का एक छोटा सा बालक सन् 1675 में पिता के साथ आसाम से पंजाब आया। पिता (गुरू तेगबहादुर) का दिन-रात देश और समाज का चिन्तन तथा धर्म रक्षा का संकल्प बालक के मन को अन्दर तक छू रहा था। एक दिन गुरू तेगबहादुर कश्मीरी पंडितों पर हुए मुगलों के अमानवीय अत्याचारों की कथा सुनते-सुनते कहने लगे - इस समय धर्म रक्षा का एक ही उपाय है कि कोई बड़ा धर्मात्मा पुरूष बलिदान दे। यह बात बालक गोविन्द बड़े ध्यान से सुन रहा था। सभी लोग विषय की गम्भीरता को देख मौन थे। अचानक बालक गोविन्द बोल पड़ा - पिताजी, आज के समय में आप से बढ़कर दूसरा महात्मा व धर्मात्मा पुरूष और कौन हो सकता है। नौ वर्षीय बालक के इस उत्तर पर गुरू तेगबहादुर बहुत प्रसन्न हुए।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी सन् 1675 को पिता के बलिदान के पश्चात् बालक गोविन्द नौ वर्ष तक आनन्द पुर में रहे जहाँ उन्होंने अपनी भावी जीवन की योजना बनाई। अपने बलिदान से पूर्व गुरू तेग बहादुर ने यहीं पर उन्हें गुरूता गद्दी प्रदान करते हुए देश, धर्म व दुखी जनता का उद्धार करने का आशीर्वाद दिया। बालक गोविन्द से गुरू गोविन्द बने गुरू गोविन्द सिंह जी ने सिख समुदाय को हुक्मनामे भेज-भेज कर अस्त्र, शस्त्र और धन एकत्रित किया तथा सामाजिक धारा को क्रांतिकारी रूप देने के लिए एक छोटी सेना भी बनाई।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;भारत में मुगल शासकों के निरन्तर बढ़ते आक्रमणों से देश और धर्म को बचाने के लिए सन् 1699 में बैसाखी के दिन गुरू गोविन्द सिंह जी ने अपने अनुयाईयों की एक विशाल सभा बुलाई जिसे सम्बोधित करते हुए उन्होंने हाथ में नंगी तलवार लेकर प्रश्न किया कि है कोई, जो धर्म के लिए अपने प्राण दे सकेर्षोर्षो उनकी इस प्रेरणादायक ललकार को सुनकर बारी-बारी से दयाराम खत्री, धर्म दास जाट, मोहकम चंद धोबी, हिम्मत सिंह रसोइया तथा साहब चंद नाई अग्रसर हुए जिनके पश्चात् सारा निश्तेज समाज जोश में भर, उठ खड़ा हुआ। उन्होंने यहीं पर जात-पात के भेदभाव में बिखरे हिन्दू समाज को समिन्वत कर खालसा के रूप में खड़ा किया और इस प्रकार खालसा पंथ की स्थापना हुई।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;गुरू गोविन्द सिंह एक बड़े समाज सुधारक थे। सती प्रथा, कन्या वध, अस्पृश्यता (छूआ-छूत) इत्यादि सामाजिक बुराईयों से दूर समानता पर आधारित सामाजिक संरचना के वे पक्षधर थे। वीरता व पराक्रम में उनका मुकाबला नहीं था। चिड़ियों के समान डरपोक भारतीय युवकों को वे कहा करते थे कि&lt;br /&gt;Þसवा लाख से एक खड़ाऊ,&lt;br /&gt;चिड़ियों से मैं बाज लड़ाऊं,&lt;br /&gt;तबै गोविन्द सिंह नाम कहाऊँÞ।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;औरंगजेब समर्थक, पंजाब के पर्वतीय नरेशों को, भंगाणी के युद्ध में पराजित किया और 1703 में उन्होंने चमकौर के युद्ध में केवल 40 सिखों की सहायता से मुगलों की विशाल सेना के छक्के छुड़ा दिये थे। इसमें गुरू गोविन्द सिंह के दो बड़े पुत्रों अजीत सिंह व जुझार सिंह के साथ पांच प्यारों में से तीन प्यारे शहीद हो गये।&lt;br /&gt;सन् 1703 में सरहिन्द के नवाब वजीर खाँ ने उनके दो छोटे पुत्रों जोरावर सिंह और फतेह सिंह को, इस्लाम स्वीकार न करने के कारण दीवार में जीवित चिनवा दिया। चारों पुत्रों और पत्नी की क्रुर हत्या होने के बावजूद भी गुरूजी एक महान योगी की तरह बिल्कुल भी विचलित नहीं हुए 1706 में उन्होंने खिदराना का युद्ध लड़ा। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;वे महान योद्धा तो थे ही, संगीत, साहित्य व कला के क्षेत्र में उनकी गहरी रूचि थी। वे रचनाकार कवि भी थे। उनके द्वारा रचित दशम ग्रन्थ हैं जिसमें - जापु साहेब, अकाल स्तुति, विचित्र नाटक, चण्डी चरित्र, चण्डी दीवार, जफरनामा, चौबीस अवतार, ज्ञान प्रबोध आदि प्रमुख हैं। उनके दरबार में 52 कवि थे। इनमें दया सिंह, नंदलाल, सेनापति चन्दन, खानखाना आदि प्रमुख थे। उनकी रचनाओं में वीर रस की प्रधानता थी। उन्होंने अपने बाद श्री गुरू ग्रन्थ साहेब को गुरू मानने का आदेश देकर गुरूता गद्दी पर आसीन किया। संवत् 1765 अर्थात् ईसवी सन् 1708 में नांदेड़ में गोदावरी के तट पर गुरूजी ने देह त्याग कर स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया। उनके द्वारा जलाई गई स्वतन्त्रता ज्योति तथा अन्याय के विरूद्ध लड़ने की भावना आज भी भारतीयों के लिए प्रेरणा स्त्रोत है।&lt;br /&gt;गऊ रक्षा के लिए उनका मत था&lt;br /&gt;`यही दे हु आज्ञा तुरकन गहि खपाऊं,&lt;br /&gt;गऊ घात का दोख जगसों मिटाऊं।&lt;br /&gt;-उग्रदन्ती&lt;br /&gt;अर्थात् हे मां भवानी, मुझे आशीर्वाद और आदेश दे कि धर्म विरोधी अत्याचारी तुर्कों को चुन-चुनकर समाप्त कर दूं आर इस जगत से गौ हत्या का कलंक मिटा दूं। वे देवी दुगाZ भवानी के अनन्य उपासक थे। `खालसा´ सृजन से पहले उन्होंने शक्ति यज्ञ का अनुष्ठान किया था। उनकी इच्छा थी कि&lt;br /&gt;सकल जगत मो खालसा पंथ गाजै,&lt;br /&gt;जगै धरम हिन्दुक तुरक दुंंद भाजै।&lt;br /&gt;-उग्रदन्ती&lt;br /&gt;अर्थात्, सारे जगत में खालसा पंथ की गूंज हो, हिन्दू धर्म का उत्थान हो तथा तुर्कों द्वारा पैदा की गयी विपत्तियां समाप्त हों।&lt;br /&gt;खालसा के लक्षण पूछने पर दशमेश गुरू ने एक बार कहा कि खालसा वह है जिसने काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार पर काबू पा लिया हो तथा अभिमान, परस्त्री गमन, पर-निन्दा तथा मिथ्या विश्वासों के भ्रमजाल से सदा दूर रहता हो। जो दीन दुखियों की सेवा व दुर्जन-दुष्टों का विनाश कर निरन्तर श्रद्धापूर्वक प्रभु नाम के जप में लीन रहता हो। खालसा को चरित्रवान व पराक्रमी बनाये रखने के लिए उन्होनें पांच ककार धारण करने के लिए कहा। ये हैं - 1. कृपाण 2. केश 3. कंघा, 4. कच्छा व 5. कड़ा।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;विनोद बंसल&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5365086112055632730?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5365086112055632730/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5365086112055632730' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5365086112055632730'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5365086112055632730'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2010/01/1675-1675-1699-1703-40-1703-1706-52.html' title=''/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/S0Glu4FTN5I/AAAAAAAAAGg/fX8Hj-mEWnM/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1076252505976865355</id><published>2009-12-31T00:18:00.000-08:00</published><updated>2009-12-31T00:21:37.076-08:00</updated><title type='text'>घुट-घुट कर जी रहा कानू सान्याल</title><content type='html'>&lt;div class="art_headline" align="justify"&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal" class="art_content" align="justify"&gt;ठ्ठमधुरेश, हाथीघिसा (पश्चिम बंगाल) विचारधारा जीवन को एक दायरे में बांधती है और जीने का जोश देती है, लेकिन जब वह भटक जाती है, तो जी का जंजाल बन जाती है। झंडाबरदारों को तो दुर्दिन दिखाती ही है, विकृति बन उस समाज को भी पेरती है, जो उसके केंद्रबिंदु में होता है। कुछ ऐसा ही हुआ है नक्सलवादी विचारधारा के साथ। कम से कम कानू सान्याल को देखकर तो यही लगता है। कभी देश-समाज को बदलने का सपना देखने वाले शख्स को हर उस व्यक्ति से शिकायत है, जिससे उसने उम्मीद बांधी थी। वैचारिक रिश्ते तो साथ छोड़ गए, अंतत: खून का रिश्ता ही काम आ रहा है। भाई के खर्च पर 81 साल के कानू की जिंदगी की गाड़ी जैसे-तैसे खिंच रही है, अब कोई हाल-खबर लेने भी नहीं आता है। पश्चिम बंगाल के एक गांव की झोपड़ी में नक्सलवाद का कथा पुरुष घुट-घुटकर मर रहा है। भाई पैसा न दे, तो कानू सान्याल सांस चालू रखने वाली दवा भी न खा सकें। ठीक बगल की झोपड़ी में रोज मौत की बुलाती एक औरत, साथियों की चरम दगाबाजी की निशानी है। फिर भी दोनों को कोई मलाल नहीं; मदद की अपेक्षा भी नहीं। और ऐसे ही कई और गुणों के चलते दोनों जनता के लड़ाकों के लिए नसीहत हैं। दोनों गवाह हैं कि कैसे और क्यों कोई आंदोलन बीच रास्ते से भटक जाता है; जनता बेच दी जाती है? वाकई, कानू सान्याल और लखी होना मुश्किल है। अभी के दौर में तो असंभव। कानू दा, नाम के मोहताज नहीं हैं। मगर लखी को हाथीघिसा पहुंचकर ही जाना। वे भारत में नक्सलवादी आंदोलन के प्रारंभिक कमानदारों में एक जंगल संथाल की बेवा हैं। जंगल, नक्सलबाड़ी का लड़ाका। चारु मजूमदार, खोखोन मजूमदार, सोरेन बोस, कानू सान्याल का हमकदम। खैर, कानू दा 81 साल के हो चुके हैं। बीमार हैं। दो अखबार लेते हैं। सामने के खेत, खुला आकाश, उड़ते पंछी, चरते जानवर, चिथड़ों में लिपटे नंगे पांव स्कूल जाते नौनिहाल ..,चश्मे के पीछे से सब देखते हैं। कुछ भी तो नहीं बदला! यही उनकी घुटन है। उन्होंने इसी सबको बदलने के लिए भारतीय व्यवस्था को चुनौती दी थी। कई राज्यों की पुलिस तलाशती थी। .. और अब गुटीय लाइन पर अपने भी मिलने नहीं आते। कानू की जिंदगी बड़ी मुश्किल से गुजर रही है। प्रदीप सान्याल (भाई) के पैसे से दवा खरीदी जाती है। चूंकि कार या पेट्रोल की हैसियत नहीं है, सो चाहते हुए भी कहीं निकल नहीं पाते। कानू दा को यह बात बहुत कचोटती है कि कभी साथी रहे लोग या उनकी सरकार (पश्चिम बंगाल का माकपा राज) ने मरणासन्न अवस्था में भी उनकी सुधि नहीं ली। बुद्धदेव भट्टाचार्य (मुख्यमंत्री) सार्वजनिक सभाओं में अक्सर कहते हैं-पश्चिम बंगाल में अब कोई नक्सली नहीं रहा। एक कानू बाबू है। उनको भी हम अपने साथ करना चाहते हैं। यह मुनादी है कि कैसे नक्सल आंदोलन के किरदारों को उनके ही पुराने साथियों (माकपा) ने दबाया, कुचला? ऐसे में सहयोग की अपेक्षा बेकार है। और हम ऐसा करते भी नहीं-कानू दा बोले। झोपड़ी में रह रहे कानू सान्याल बैचलर हैं।&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal" class="art_content" align="justify"&gt;സഭാര്‍ ദൈനിക്‌ ജഗ്രന്‍ &lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal" class="art_content" align="justify"&gt;sabhar dainik jagran&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1076252505976865355?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1076252505976865355/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1076252505976865355' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1076252505976865355'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1076252505976865355'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_9316.html' title='घुट-घुट कर जी रहा कानू सान्याल'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1969397859245691676</id><published>2009-12-31T00:13:00.000-08:00</published><updated>2009-12-31T00:14:35.580-08:00</updated><title type='text'>तार-तार हो गया उल्फा का आधार</title><content type='html'>&lt;div align="justify"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="art_headline" align="justify"&gt;तार-तार हो गया उल्फा का आधार&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal" class="art_content" align="justify"&gt;गुवाहाटी : असम को भारत से अलग करने के ख्वाब के साथ 1979 में बनाया गया यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा) इन दिनों उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है। अपने आधार की वजह से उल्फा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संरक्षण में बांग्लादेश में अपने पांव जमा लिए थे, लेकिन उसे अब वहां बने रहने में दिक्कत हो रही है। पिछले साल शेख हसीना की सरकार की स्थापना, धार्मिक कट्टरवाद और उग्रवाद के विरोध में उठाए गए कदमों और शायद इस एहसास की बदौलत कि अब भारत को और नाराज नहीं किया जा सकता, उस देश में सक्रिय उल्फा तथा दूसरे उग्रवादी संगठन हताशा में सुरक्षित पनाहगाहों की तलाश में हैं। इसलिए उल्फा प्रमुख, परेश बरुआ के चीन पहंुच जाने और बांग्लादेश में मौजूद इस संगठन के सदस्यों के म्यांमार से संरक्षण मिलने की खबरों से हैरानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन म्यांमार में भी उन्हें हालात की प्रतिकूलता का अंदाजा होने लगा है। खबर थी कि नवंबर के पहले सप्ताह में म्यांमार आर्मी ने उल्फा के एक कैंप को घेर लिया था और वहां करीब 100 उग्रवादियों पर हमला बोल दिया था। इस पृष्ठभूमि में संगठन के दो शीर्ष नेताओं विदेश सचिव शशधर चौधरी और वित्त सचिव चित्रबन हजारिका की गिरफ्तारी महत्वूपर्ण हो जाती है। बीएसएफ के अनुसार इन दोनों ने त्रिपुरा में आत्मसमर्पण किया था। इससे महज 48 घंटे पहले उल्फा ने दावा किया था कि इन दोनों को 1 नवंबर को ढाका में उनके घरों से गिरफ्तार किया गया था। 7 नवंबर को चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के बाद जब इन दोनों को गुवाहाटी लाया गया, तो उन्होंने मीडिया को बताया कि उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया था बल्कि सादी वर्दी में कुछ लोगों ने उन्हें ढाका में उनके घरों से उठाया था और फिर उन्हें भारत को सौंप दिया था। खैर हकीकत यह है कि दोनों जेल में हैं। यही नहीं इसके कुछ दिन बाद ही उल्फा का चेयरमैन अरबिंद राजखोवा और डिप्टी कमांडर इन चीफ राजू बरुआ की गिरफ्तारी ने तो उल्फा की कमर ही तोड़ दी। उल्फा के लिए यह गठन के 30 साल में सबसे बड़ा झटका था। सवाल उठता है कि अब उल्फा क्या रुख अपनाएगा? जून 2008 से इकतरफा संघर्ष विराम करने वाले वार्ता-समर्थक धड़े के चोटी के एक उल्फा लीडर, मृणाल हजारिका के हवाले से एक अखबार ने लिखा है कि अगर राज्य को पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करने की हमारी मांग पर वे सहमत हो जाते हैं, तो शांति वार्ता शुरू करने का हम आधार तैयार कर सकते हैं। हम समझ चुके हैं कि असम के लिए पूर्ण प्रभुसत्ता की मांग करना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए हम, लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए शांति वार्ता के पक्ष में हैं। ऐसे में या तो शशधर-चित्रबन की जोड़ी, शांति वार्ता की बजाए अपने क्रांतिकारी रुख पर कायम रहते हुए जेल जाना पसंद करेंगे, या वे मृणाल हजारिका गुट में शामिल हो जाएंगे और शांति प्रक्रिया को सार्थक बनाएंगे, या फिर वे अपने कानूनी और तथाकथित मानवाधिकार सलाहकारों की मदद से एक नई साजिश के लिए कोई चतुराई भरा कदम उठाएंगे। साथ ही, हो सकता है कि वार्ता-विरोधी धड़ा इन दो लोगों के पकड़े जाने का बदला लेने के लिए अपने परिचित तौर-तरीकों से मासूम स्त्री-पुरुषों और बच्चों को आतंकित करे। ऐसे किसी हमले को रोकने के लिए खुफिया विभाग को कुशलता और सतर्कता का परिचय देना होगा। परेश बरुआ के नेतृत्व वाला गुट यह साबित करने की पुरजोर कोशिश करेगा कि अभी उसमें दम है। अपने शुरूआती सालों में समाज सुधार के अपने स्वरूप से उल्फा ने एक लंबा रास्ता तय करके संगठन के खिलाफ भारतीय सेना के आपरेशन बजरंग और आपरेशन राइनो के बाद 1990 के सालों में असम छोड़कर बांग्लादेश चले जाने के बाद आईएसआई के समर्थन से उसने आतंकवादी नकाब ओढ़ लिया है। इसी प्रकार से असम के लोगों ने भी एक लंबा सफर तय किया है। अब वे उल्फा द्वारा दिखाए गए सपने से दूर होकर उसके आतंकवादी स्वरूप को पहचान चुके हैं, जो आज विदेशी ताकतों के इशारों पर खेल रहा है। (अडनी)&lt;/div&gt;&lt;div style="FONT-FAMILY: Mangal" class="art_content" align="justify"&gt;sabhar dainik jagran&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1969397859245691676?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1969397859245691676/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1969397859245691676' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1969397859245691676'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1969397859245691676'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_31.html' title='तार-तार हो गया उल्फा का आधार'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-4492112585792441555</id><published>2009-12-29T23:49:00.000-08:00</published><updated>2009-12-29T23:56:28.808-08:00</updated><title type='text'>नवेली साल का आना बधाई हो बधाई हो</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/SzsHLTGDGSI/AAAAAAAAAGI/8z1zXMus0Hw/s1600-h/badhai.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 221px; FLOAT: left; HEIGHT: 166px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5420934467156121890" border="0" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/SzsHLTGDGSI/AAAAAAAAAGI/8z1zXMus0Hw/s320/badhai.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;नवेली साल&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;- विमलेश बंसल ‘आर्या’&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नवेली साल का आना बधाई हो बधाई हो । &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;खुशी के गीत मिल गाना बधाई हो बधाई हो॥&lt;br /&gt;1. कमाई धर्म की करके, जगत खुशियों से भर दें हम। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;गरीबों दीन दुःखियों और, सभी के पेट भर दें हम। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;अतिथि विद्वान का आना बधाई हो बधाई हो॥ &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;मान से पान करवाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ _ &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;2. प्रेम भर-भर के बाटें हम, खुशी का पार न भगवन। &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;सभी हँस मिल के खेलें हम, खिले आर्यों का यह उपवन।&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;खुशी के गीत तब गाना बधाई हो बधाई हो॥ साजो संगीत हो जाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ &lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;_3. ईर्ष्या द्वेष को छोड़ें प्रेम कर मित्र बन जावें। कँटीले कंटकों से भी, सुलझ कर हम निकल जावें। निडरता वीरता लाना बधाई हो बधाई हो॥ गंभीरता धीरता लाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ _&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;4. पंचयज्ञों का पालन कर, जगत में आर्य कहलावें। ॠण से उॠण हो तभी, कर्म निष्काम बन जावें। ॠषि के गीत तब गाना बधाई हो बधाई हो ॥ यज्ञ घर-घर में करवाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ _&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;5. तुम्हारी ज्योति से चमकें, सभी को रोशनी दे कर। विकल्पों से हटा संकल्प, सबके उर में भर-भर कर। उरों का दीप बन जाना बधाई हो बधाई हो॥ दीप से दीप जल जाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ _&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;6. बजे स्वर ज्ञान की दुंदुभी, पताका ओ3म् के नीचे। वैदिक धर्म की जय हो, चलें मिलकर के सब पीछे। प्रभु के गीत तब गाना बधाई हो बधाई हो॥ विमल सब आर्य बन जाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ _&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;7. विदेशी संस्क्रति को तज स्वदेशी को ही अपनायें। जनवरी मंथ को त्यज दें, चैत्र शुरुआत बन जाये।&lt;br /&gt;बसंत नव वर्ष का आना बधाई हो बधाई हो॥ उमंग उल्लास भर जाना बधाई हो बधाई हो॥ नवेली _ _ _ _खुशी के गीत मिल गाना बधाई हो बधाई हो॥&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4492112585792441555?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4492112585792441555/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4492112585792441555' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4492112585792441555'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4492112585792441555'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_4820.html' title='नवेली साल का आना बधाई हो बधाई हो'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_4HuwH0LgS8Q/SzsHLTGDGSI/AAAAAAAAAGI/8z1zXMus0Hw/s72-c/badhai.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-973573190133189441</id><published>2009-12-29T22:36:00.000-08:00</published><updated>2010-01-05T03:41:20.880-08:00</updated><title type='text'>मुस्लिम लॉ बोर्ड के प्रस्ताव दकियानूसी विचारों का पुलिंदा</title><content type='html'>&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="font-size:130%;"&gt;&lt;br /&gt;मुस्लिम लॉ बोर्ड के प्रस्ताव पर घोर आपित्त है-द्विवेदी&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;अखिल भारत हिन्दू महासभा दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष &lt;strong&gt;रविन्द्र कुमार द्विवेदी&lt;/strong&gt; ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लखनउ बैठक में पारित प्रस्ताव को मुस्लिम समाज के दकियानूसी विचारों का पुलिन्दा बताया है। &lt;strong&gt;उन्होंने कहा कि राजस्थान के एक मामले में न्यायालय द्वारा एक मुस्लिम महिला को उसके शौहर से गुजारा भत्ता दिलाना मुस्लिम महिला की बुनियादी और मानवीय आवश्यकता है।&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;लेकिन मुस्लिम लॉ बोर्ड का प्रस्ताव मुस्लिम महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित करने का संदेश दे रहा है&lt;/strong&gt;।&lt;strong&gt; द्विवेदी का आगे कहना था कि मुस्लिम समाज को आरक्षण की जगह एक दकियानूसी विचारों से मुक्त कराने की आवश्यकता है ताकि उनका पूरा विकास हो सके।&lt;/strong&gt; और यह तभी संभव है जब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे देश में दोहरे कानून (राष्टीय कानून और शरीयत) की वकालत करने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगेगा और मुस्लिम समाज को आधुनिक समाज से जोड़ा जा सकेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आगे द्विवेदी का कहना था कि देश पिछले 62 सालों से दोहरे कानून के नाम पर दोनों संप्रदाय नफरत की आग में झुलस रहा है। इस आग को दोनों संप्रदायों को एक राष्टीय य कानून के नीचे लाये बिना नही बुझाया जा सकता। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-973573190133189441?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/973573190133189441/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=973573190133189441' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/973573190133189441'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/973573190133189441'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_2002.html' title='मुस्लिम लॉ बोर्ड के प्रस्ताव दकियानूसी विचारों का पुलिंदा'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-5346174629076899082</id><published>2009-12-29T03:10:00.000-08:00</published><updated>2009-12-29T03:13:10.398-08:00</updated><title type='text'>नव वर्ष को काला दिवस देशवासी मनाएं</title><content type='html'>&lt;p align="justify"&gt; &lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;अखिल भारत हिन्दू महासभा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष &lt;strong&gt;रविन्द्र कुमार द्विवेदी&lt;/strong&gt;   और &lt;strong&gt;राम आधार फाउंडेशन&lt;/strong&gt; की कोषाध्यक्ष एडोवोकेट संजया शर्मा ने देशवासियों से अपील की है कि वे &lt;strong&gt;अंतराष्टीय नव वर्ष 1&lt;/strong&gt; &lt;strong&gt;जनवरी 2010 को काला दिवस मनाएं।&lt;/strong&gt; आगे उन्होंने कहा कि आज से साठ साल पूर्व 1 जनवरी 1949 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध विराम के बाद से जम्मू और लद्दाख का एक बहुत बड़ा भाग आज भी पाकिस्तान के कब्जे में है, जिसे गुलाम कश्मीर के नाम से जाना जाता है। गुलाम कश्मीर के लोग आज भी पाकिस्तान के सिर्फ गुलाम बनकर जीते हैं।&lt;br /&gt;    &lt;br /&gt;  दोनों नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में देश के लोगों का आह्वान किया कि नए वर्ष में खुशियां न मनाए बल्कि इस दिवस को काला दिवस के रूप में मनाए क्योंकि यह देश के लिए शर्म की बात है कि भारत का भू-भाग देश के बड़े नेताओं ने कैसे गंवा दिया और हम अज्ञानतावश इन नेताओं को कैसे पूजते हैं। दोनों नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि सन् 1948 में संयुक्त राष्ट संघ के सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान से गुलाम कश्मीर के इलाके खाली  कराने का प्रस्ताव पारित किया था, मगर दुष्ट देश पाकिस्तान ने आज तक इसे अंगीकार नही किया। पाकिस्तान के इस घिनौनी करतूत के लिए विश्व स्तर पर विरोध और सन् 1948 में सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्ताव को सम्मान न देते हुए इलाके को अपने कब्जे में रखने के कारण वैश्विक विरोध होना चाहिए।&lt;/p&gt;&lt;p align="justify"&gt;      द्विवेदी व संजया वर्मा ने कहा कि गुलाम कश्मीर का भारत में विलय होने तक देश वासियों को अंतर्राष्टीय नव वर्ष को काला दिवस के रूप में मनाना चाहिए। इस तरह से करने पर पाकिस्तान के इस काली करतूत पर पूरे विश्व का ध्यान केन्द्रित होगा और गुलाम कश्मीर को भारत में विलय करने का उस पर दबाव पड़ेगा। 1 जनवरी 2010 को हिन्दू महासभा दिल्ली प्रदेश और श्री राम आधार फाउंडेशन काला दिवस के रूप में मनाते हुए गुलाम कश्मीर को भारत में विलय करने के लिए पूरे देश में आंदोलन चलाएगी जिससे भारत को अखंड राज्य बनाया जा सके। क्योंकि गुलाम कश्मीर भारत के लिए कूटनीतिक रूप से बहुत जरूरी है।&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5346174629076899082?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5346174629076899082/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5346174629076899082' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5346174629076899082'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5346174629076899082'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_29.html' title='नव वर्ष को काला दिवस देशवासी मनाएं'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-4797575416968894045</id><published>2009-12-28T01:00:00.000-08:00</published><updated>2009-12-28T01:01:43.392-08:00</updated><title type='text'>गोहत्या भारत की हत्या है--राघवेश्वर भारती</title><content type='html'>&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;दिल्ली, 27 दिसंबर।गोहत्या भारत की हत्या है।  गाय की जितनी हत्या मुगल और अंग्रेजी राज में नहीं हुई उससे अधिक हत्या आज स्वाधीन भारत में हो रही है। यह अत्यंत दुर्भाग्य का विषय है कि आज देश के सत्ताधीशों को यह बताना पड़ रहा है कि गाय आपकी माता है और इसका संरक्षण यदि नहीं किया गया तो भारत का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। शंकराचार्य आज यहां उत्तमनगर में एक विशाल सभा को संबोधित कर रहे थे।&lt;br /&gt;उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की कि वह गोरक्षा का केन्द्रीय कानून बनाकर देश को विनाश से बचाए। उन्होंने कहा कि इस अभियान में यदि उनका जीवन भी अर्पित हो गया तो वे इसे अपना सौभाग्य समझेंगे।&lt;br /&gt;नेताजी सुभाश प्लेस पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए यात्रा के राष्टीय मार्गदर्शक  श्री सीताराम केदिलाया ने कहा कि रामराज्य के लिए ग्राम राज्य का निर्माण जरूरी है। इसीलिए गांधीजी ने ग्राम रक्षा का आहवान किया था। उन्होंने कहा कि गाय आौर ग्राम देश की दो आंखें हैं और आज ये दोनों ही आंखें संकट में हैं। उन्होंने कहा कि आज विदेशी जीवन प़द्धति के कारण हमारी सोच भी विदेश केन्द्रित त हो गयी है। इस यात्रा में संतों ने तीन मंत्र दिये हैं और वे तीन मंत्र हैं --चलें गांव की ओर, चलें गाय की ओर और चलें प्रकृति की ओर।जिस प्रकार विश्वामित्र श्रीराम व लक्ष्मण को ग्राम में ले गये थे उसी प्रकार आज के वरिश्ठ संत इस यात्रा के प्रवर्तक हैं। गाय, ग्राम व प्रकृति के साथ भारत का संरक्षण और भारत के साथ पूरे विश्व का संरक्षण आवश्यक है। सुप्रसिद हिन्दी कवि श्री गजेन्द्र सोलंकी ने अपनी कविताओं  से श्रोताओं को झकझोर दिया।&lt;br /&gt;यमुना विहार की विशाल सभा को संबोधित करते हुए यात्रा समिति के राश्ट्रीय सचिव श्री शंकरलाल ने भारतीय नस्ल की देशी गायों के कृत्रिम गर्भाधान पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि केन्द्र में गाय के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना की जाए, जिसके माध्यम से खेतों में गोवंश के उपयोग और जैविक खाद, उर्जा संयंत्रों आदि को बढ़ावा दिया जा सके।&lt;br /&gt;उन्होने बताया कि तीस सितंबर को कुरूक्षेत्र से आरम्भ होकर यह यात्रा अब तक 19,000 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी है। इस दौरान हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पिश्चम बंगाल, उडीसा, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, तमिलनाडु ,केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराश्ट्र, गुजरात और राजस्थान का प्रवास कर यात्रा ने कल सायंकाल दिल्ली में प्रवेश किया। दिल्ली में आयानगर, अन्धेरिया मोड़ और लाडोसराय में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। युवकों ने बड़ी संख्या में वाहन रैली में भाग लिया और गोमाता के जयकारों के साथ गोरथ की अगवानी की। दिल्लीवासियों ने सड़क के दोनों ओर खड़े होकर जोरदार पुष्पवर्षा  की।&lt;br /&gt;आज यात्रा ग्रेटर कैलाश से आरम्भ होकर त्रिलोकपुरी, यमुना विहार और पीतमपुरा में बड़ी सभाओं को संबोधित करते हुए सायंकाल उत्तम नगर पहुंची। आज दिल्ली में दो सौ से अधिक स्थानों पर यात्रा का अभूतपूर्व स्वागत किया गया।&lt;br /&gt;मुख्य यात्रा का एक हिस्सा सिलिगुड़ी से अलग होकर उत्तर पूर्वांचल के राज्यों का भ्रमण कर रहा है, जिसका समापन 13 जनवरी को अरूणाचल प्रदेश के परशुराम कुण्ड पर होगा। मुख्य यात्रा का समापन 17 जनवरी, 2010 को नागपुर में होगा और 31, जनवरी, 2010 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल जनसभा के बाद देशभर से संग्रहीत करोड़ों हस्ताक्षर महामहिम राश्ट्रपति को सौंपकर देश में संपूर्ण गोवंश की हत्या पर कठोर प्रतिबंध की मांग की जाएगी।&lt;br /&gt;अभी तक देशभर में दस हजार से अधिक उपयात्राओं का आयोजन हो चुका है। दिल्ली में 18 से 26 दिसंबर तक 175 उपयात्राओं का आयोजन किया गया। दिल्ली प्रांत से 26 लाख से अधिक हस्ताक्षर संग्रहीत कर संतों को सौंपे गये।&lt;br /&gt;यमुना विहार की सभा को संबोधित करते हुए वरिश्ठ संत महंत नवल किशोरदास ने देशवासियों से अपील की कि वे गोरक्षा के लिए चमड़े से बनी सभी वस्तुओं का बहिश्कार करें और पंचगव्य तथा गाय से प्राप्त अन्य पदार्थों से निर्मित वस्तुओं का अपने दैनिक जीवन में उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक घर से गाय के लिए एक रोटी एवं एक रूपया प्रतिदिन अलग निकाला जाना चाहिए। गाय के धार्मिक महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि गाय की परिक्रमा से जहां समस्त तैतीस करोड़ देवी-देवताओं की परिक्रमा हो जाती है वहीं एक गाय की हत्या से समस्त देवताओं का अपमान होता है।&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4797575416968894045?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4797575416968894045/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4797575416968894045' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4797575416968894045'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4797575416968894045'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_28.html' title='गोहत्या भारत की हत्या है--राघवेश्वर भारती'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1139692737887835042</id><published>2009-12-24T00:59:00.000-08:00</published><updated>2009-12-24T01:00:43.448-08:00</updated><title type='text'>गडकरी उवाच</title><content type='html'>&lt;strong&gt;भाजपा अध्यक्ष की पहली प्रेस कांफ्रेंस&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में अपनी पहली प्रेस कांफ्रेस में राष्ट्रीय मीडिया जगत के मित्रों से मिलने पर मुझे अपार हर्ष हो रहा है। मैं आप सबका हाÆदक स्वागत करता हूं। मैं आपको और आपके माध्यम से समस्त देशवासियों को आनंददायी क्रिसमस दिवस की और समृद्ध - 2010 की शुभकामना देना चाहता हूं। मैं हमारे प्रेरणास्रोत आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर उनके दीघZ और स्वस्थ जीवन की कामना भी करता हूं।&lt;br /&gt;पार्टी द्वारा इस नए महान उत्तरदायित्व को सौंप कर जो भरोसा और विश्वास मुझ में व्यक्त किया गया है, उससे मैं पूर्णत: अभिभूत हूं। मुझे इसका पूर्ण ज्ञान है कि मेरे कंधों पर एक भारी उत्तरदायित्व आ गया है। किंतु, मेरी पार्टी के किसी भी निष्ठावान कार्यकर्ता के लिए कोई कार्य असाध्य नहीं है, यदि वह पार्टी की मूल विचारधारा और आदर्शवाद के प्रति निष्ठावान रहने का संकल्प ले लेता है जैसाकि डॉå श्यामा प्रसाद मुखजÊ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन में साक्षात अभिव्यक्त हुआ था( यदि वह हमारे समकालीन दो शीर्षस्थ नेताओं - श्री अटल बिहारी वाजपेयी और श्री लाल —ष्ण आडवाणी की प्रेरणादायी विरासत से निर्देशित होता रहता है, यदि वह टीम वर्क और अनुशासन के माहौल में अपने से वरिष्ठ तथा कनिष्ठ सहयोगियों से सीखने की उत्सुकता दर्शाता है जोकि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की सदैव से ही परंपरा रही है, और यदि वह अपने साथी कार्यकर्ताओं की विराट सेना, जिसमें पार्टी की सबसे छोटी और दूरस्थ इकाइयों के कार्यकर्ता भी शामिल हैं, से शक्ति ग्रहण करता है तथा बदले में उन्हें शक्ति प्रदान करता है।&lt;br /&gt;मैं प्रथम और सर्वप्रथम एक कार्यकर्ता हूं। मैं जानता हूं और आज इसकी पुन: पुष्टि करता हूं कि मेरे सहयोगी कार्यकर्ताओं की राष्ट्र तथा पार्टी के लिए अथक त्याग-भावना और संघर्ष मेरी पार्टी की दृढ़ता के सबसे बड़े आधार हैं। जहां तक संगठन का सवाल है अनुशासन, दृढ़ संकल्प, परस्पर विश्वास एवं सम्मान यह हमारी कार्य पद्धति की आधारशिला होगी।&lt;br /&gt;विचारधारा का आधार राष्ट्रवाद : भाजपा भारत प्रथम सूत्र पर काम करने वाला दल है। हम भाजपा को राष्ट्र निर्माण के एक उपकरण के रूप में देखते हैं।&lt;br /&gt;मेरी पार्टी की विचारधारा का आधार राष्ट्रवाद था, राष्ट्रवाद है और राष्ट्रवाद रहेगा और यही मेरी पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता का प्रेरणास्रोत भी बना रहेगा। भारतीय राष्ट्रवाद की जड़ें हमारी पुरातन संस्—ति में निहित हैं, जो समावेशी भी है और समिन्वत भी और वही प्रत्येक राष्ट्रभक्त भारतीय की प्ररेणा का स्रोत भी है। भाजपा वास्तविक सर्वधर्मसमभाव के प्रति प्रतिबद्ध है, वोट-बैंक की पंथ निरपेक्षता के जैसी नहीं। इसके अंतर्गत जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र अथवा नस्ल के आधार पर भारत के नागरिकों के बीच भिéता और भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। भारत सबका है और सभी भारत के, सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं। साथ ही सभी का भारत को सुदृढ़ और एकी—त बनाने का समान दायित्व भी है।&lt;br /&gt;अत: भाजपा उस हर नीति और उस हर प्रयास का विरोध करती रहेगी, जिससे राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा को खतरा पहुंचने की संभावना हो। हमारा विरोध जम्मू और कश्मीर में पनपता अलगाववाद तथा असम एवं देश के अन्य भागों में अवैध घुसपैठ, जिसे कांग्रेस पार्टी वोट बैंक की राजनीति के तहत प्रोत्साहित किया है के प्रति हमारा विरोध भारत की एकता और सुरक्षा के लिए सदैव है।&lt;br /&gt;आतंकवाद और नक्सलवाद का संपूर्ण विरोध :&lt;br /&gt;भारत की एकता और सुरक्षा के प्रति ऐसी ही चिंता मुझे आज अपनी पार्टी की वही अविचल स्थिति स्पष्ट करने के लिए विवश कर रही है कि भारत को आतंकवाद और नक्सलवाद से लड़ने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। 26/11 को मुंबई पर हुए आतंकी हमलों में लिप्त डेविड कोलमैन हेडली जैसे अंतर्राष्ट्रीय जेहादी षड्यंत्रकारी द्वारा भारत के खुफिया भेद लेने के लिए बार-बार किए गए दौरों के बारे में हाल के खुलासों और प्रधान कमेटी रिपोर्ट में निकाले गए चिंताजनक निष्कषो± से संकेत मिलता है कि हमारी सुरक्षा प्रणाली में ऐसी खामियां मौजूद हैं, जिनका लाभ राष्ट्र के शत्रु कभी भी उठा सकते हैं। आतंकवाद की तरह ही माओवाद की राष्ट्र विरोधी विदेशी विचारधारा से प्रोत्साहित हुआ नक्सलवाद भी अनेक अबोध जिंदगियों को निगल रहा है, जिसमें हमारे सुरक्षाकÆमयों की जिंदगियां भी शामिल हैं। मेरा संप्रग सरकार से अनुरोध है कि वह इस दोहरे संकट के साथ दृढ़ता से निपटे और मैं इस दिशा में उठाए गए हर उचित कदम के प्रति अपनी पार्टी के समर्थन का विश्वास व्यक्त करता हूं।&lt;br /&gt;राजनीति, सामाजिक-आÆथक सुधारों और राष्ट्र निर्माण का साधन :&lt;br /&gt;जहां मैं राष्ट्रवाद के प्रति प्रतिबद्ध हूं, जिसने मुझे राजनीति की तरफ आकÆषत किया है, वहीं भारत की समृद्धि और इसके सभी लोगों के कल्याण मेरे वैचारिक विश्वास के मूल में है। सार्वजनिक जीवन में मेरे बाद के अनुभव और विधायक तथा मंत्री के रूप में मेरे कार्यकाल ने मेरे इस विश्वास को और अधिक दृढ़ कर दिया है कि राजनीति शक्ति हेतु छीना-झपटी का मैदान नहीं बन सकती, बल्कि इसको सामाजिक-आÆथक सुधार और राष्ट्र-निर्माण का साधन बनना चाहिए। मेरा विश्वास है कि वह समय आ पहुंचा है जब भारत को विकास पर पूरा ध्यान केिन्द्रत करना होगा। भाजपा का समतावादी विकास में विश्वास है। इसकी प्राप्ति के लिए हमारी पार्टी आंतरिक निष्पादन परीक्षा-तंत्र विकसित करने का प्रयास करेगी, ताकि जहां-जहां भी भाजपा सत्ता में है वहां-वहां हर स्तर पर सुशासन सुनिश्चित हो सके।&lt;br /&gt;खेद की बात है कि कांग्रेस ने उस पथ का अनुसरण किया है, Þजहां कुछ लोगों का विकास हो तथा शेष वंचितß। यह निश्चय ही असमर्थनीय भी है और खतरनाक रूप से अस्थिरकारी भी। प्रधानमंत्री के आÆथक सलाहकार डॉ. सुरेश तेंदुलकर की अध्यक्षता वाली समिति का हाल का यह खुलासा चेतावनी का संकेत है कि भारत में गरीबों की संख्या में 10 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि ग्रामीण भारत में गरीबी 42 प्रतिशत है न कि 28 प्रतिशत जैसाकि पूर्व में अनुमान लगाया गया था। गरीब लोगों और मध्यम वर्ग के लोगों की दुर्दशा को आसमान छूती मूल्यवृद्धि ने और अधिक बढ़ा दिया है - उस दुर्दशा को जिस पर काबू पाने में संप्रग पूरी तरह विफल हुआ है।&lt;br /&gt;इस वास्तविकता को बदलना किसी भी राजनीतिक स्थापना का पहला कर्तव्य होता है। अत: मैं अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि वे अपने वंचित भाई-बंधुओं के चेहरों पर मुस्कान लाने की इच्छा से अभिप्रेरित हों, वे उन किसानों का संकट समाप्त करें, जिन्होंने हजारों की संख्या में आत्महत्याएं कर ली हैं, वे उस कुपोषण का उन्मूलन करें, जो हजारों जनजातीय बच्चों को काल का ग्रास बना रहा है, वे हमारे प्रतिभाशाली युवकों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करें।&lt;br /&gt;अंत्योदय के प्रति प्रतिबद्धता : श्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदÆशतापूर्ण प्रधानमंत्रित्व के अंतर्गत भाजपा-नीत राजग सरकार ने जनादेश का विकास की गति बढ़ाने तथा उसे व्यापक करने के लिए उपयोग किया था। आज मैं अपनी पार्टी के विकास दर्शन को निम्नलिखित नारे में संक्षिप्त रूप में व्यक्त करना चाहूंगा : राष्ट्रवाद अब हमारी प्रेरणा है, सुशासन द्वारा विकास हमारा साधन है और अंत्योदय (जिसका अर्थ है पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति अर्थात् अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, पिछड़े तथा अन्य दुर्बल वगो± सहित अत्यधिक वंचित लोगों को अग्रता प्रदान करना)े हमारा उद्देश्य है। इस नारे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की ठोस अभिव्यक्ति के रूप में भाजपा के प्रत्येक सदस्य से अपेक्षा करूंगा कि वह अपने कार्यक्षेत्र में कम से कम एक विकास और सेवा प्रकल्प से संबद्ध हो।&lt;br /&gt;आगामी तीन वषो± में भाजपा सुदृढ़तर होकर उभरेगी : मैं इस बात को अधोरेखित करना चाहूंगा भाजपा सुशासन, गतिशील तथा सर्वसमावेशक विकास और आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा को प्रतिबद्ध एक स्वाभाविक शासक दल है। कांग्रेस का एकमात्र विकल्प है। भाजपा को गर्व है कि उसने भारत के राजतंत्र को कांग्रेस की प्रधानता वाली एक धु्रवीय प्रणाली से दो धु्रवीय प्रणाली में रूपांतरित कर दिया है। भाजपा को इस बात पर भी गर्व है कि उसने उस राष्ट्रीय जनतांत्रिक का गठबंधन का नेतृत्व किया था, जिसने ऐसा प्लेटफार्म प्रदान किया, जिस पर कांग्रेस और कम्युनिस्ट पाÆटयों से इतर सभी पाÆटयों का स्वागत हुआ था। मेरा उद्देश्य यह देखना है कि आगामी तीन वषो± में भाजपा उन राज्यों में, जहां वह पारंपरिक रूप से सुस्थापित है और जहां उसकी अब तक उपस्थिति हाशिये पर बनी हुई है, और अधिक मजबूत बनकर उभरे। इसी के साथ-साथ भाजपा राजग को और अधिक विस्तार देने तथा मजबूत करने के लिए भी प्रयास करेगी ताकि वह प्रतिपक्ष की एकता हेतु एक मजबूत मंच बन सके।&lt;br /&gt;इस उद्देश्य की पूÆत के लिए पहली अपेक्षा यह है कि सभी स्तर पर भाजपा का पार्टी संगठन मजबूत हो। पार्टी का भौगोलिक विस्तार करना और उसको और अधिक एकत्व तथा मजबूती प्रदान करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी।&lt;br /&gt;अंतत: जो लोग मुझे पुष्प या पुष्पहार देना चाहते है उनसे मेरी अपील है कि उतनी धन राशि किसान सहायता कोष में जमा करें, जिसे आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों के कल्याण के लिए उपयोग में लाया जाए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1139692737887835042?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1139692737887835042/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1139692737887835042' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1139692737887835042'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1139692737887835042'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_24.html' title='गडकरी उवाच'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-7571088712166899954</id><published>2009-12-23T21:43:00.000-08:00</published><updated>2009-12-23T21:45:16.127-08:00</updated><title type='text'>कब देश में गौओं पर अत्याचार बंद होगा</title><content type='html'>&lt;div&gt; &lt;/div&gt;&lt;div&gt;गत दिनों  प्रात: पूर्वी दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में गौकशी की घटना जैसे-जैसे क्षेत्र में फैलती गयी लोगों में सन्नाटा छा गया। दर्जन भर गायों व बछड़ों के छत विक्षत अंग देखकर लोग स्तब्ध रह गये। विहिप, बजरंग दल व अन्य कई हिन्दू संगठनो के कार्यकर्ता देखते ही देखते सोनिया विहार के पास घटना स्थल पर एकत्रित हो गये और पुलिस तथा प्रशासन की नाकामी के खिलाफ नारे बाजी करने लगे। &lt;/div&gt;&lt;div&gt; सोनिया विहार थानान्तर्गत हुई गौकशी की दर्दनाक घटना की जानकारी जैसे ही क्षेत्र में फैली, लोग अपने घरों से निकलकर गउ रक्षार्थ सड़को पर आ गये। विश्व हिन्दू परिशद् करावल नगर जिला के अध्यक्ष श्री मदन सिंह विश्ट, उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्र शर्मा, सहमंत्री सतीश कौशिक , बजरंग दल के जिला संयोजक शिव कुमार, जिला सुरक्षा प्रमुख तरूण बसंल, सेवा भारती के जिला मंत्री रूप किशोर, सोनिया विहार की निगम पारसद  अन्नपूर्णा शर्मा व करावल नगर की पारसद  ऊशा शास्त्री, राश्ट्रवादी शिव  सेना के अध्यक्ष जय भगवान गोयल के साथ बड़ी संख्या में गौभक्तों ने घटना से क्षुब्ध होकर नारेबाजी की। सोनिया विहार के एस एच ओ सफदर अली व ए सी पी सागर के इस आश्वासन के बाद कि हम एफ आई आर दर्ज कर अपराधियों को तुरन्त पकडे़गे, मामला शान्त हुआ बाद में पुलिस ने एफआई दर्ज कर कार्यवाही शुरू की। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-7571088712166899954?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/7571088712166899954/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=7571088712166899954' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/7571088712166899954'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/7571088712166899954'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_23.html' title='कब देश में गौओं पर अत्याचार बंद होगा'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-4712522399559061533</id><published>2009-12-21T23:58:00.000-08:00</published><updated>2009-12-22T00:04:41.494-08:00</updated><title type='text'>किन्नरों का आतंक और प्रशासन लाचार</title><content type='html'>शाहजहांपुर, जागरण कार्यालय। सोमवार की रात में सप्त क्रांति सुपर फास्ट एक्सप्रेस में आधा दर्जन से अधिक किन्नरों ने तीन दर्जन बिहार प्रांत के यात्रियों को पीटकर मोबाइल समेत हजारों रुपये लूट लिए।&lt;br /&gt;2558 डाउन सप्त क्रांति सुपर फास्ट एक्सप्रेस शनिवार की सायं आठ बजे बरेली रेलवे स्टेशन से शाहजहांपुर के लिए चली। इंजन से दूसरी बोगी द्वितीय श्रेणी कोच 04463 में बिहार के यात्री खचाखच भरे थे। बरेली से ट्रेन चलने पर आधा दर्जन से अधिक किन्नर बोगी में घुस गए। बरेली से चलने के बाद किन्नर यात्रा कर रहे यात्रियों की जेब से जबरन रुपये व मोबाइल फोन निकालने लगे। जिस यात्री ने रुपये देने का विरोध किया उसे किन्नरों ने थप्पड़ व घूसों से पीट दिया। पिटाई को लेकर यात्री घबरा गए और शोर मचाना शुरु कर दिया। बिलपुर व कटरा के बीच किन्नरों ने ट्रेन की चेन पुलिंग कर दी और बोगी से उतर गए। चेन पुलिंग के बाद ट्रेन में चल रहा आरपीएफ का स्कॉर्ट, गार्ड व ड्राइवर बोगी के पास आए। यात्रियों ने बताया कि आधा दर्जन से अधिक किन्नर बोगी में थे और यात्रियों की पिटाई करने के बाद मोबाइल फोन व रुपये लूटकर ले गए है। बिहार राज्य के बेतिया जिले के यात्री निराहसन से सौ रुपये व एक मोबाइल, मुजफ्फरनगर के कुदरत से सौ रुपये व मोबाइल, देवरिया जिले के दुर्गेश से डेढ़ सौ रुपये, मोतिहारी जिले के गुड्डन से पांच सौ रुपये, राम खिलावन से दो सौ रुपये, एक मोबाइल, पन्ना लाल से दो सौ रुपये, दरभंगा जिले के निम्मा से सौ रुपये, वीरेश से पचास रुपये, जानकी से सौ रुपये लूटकर ले गए है। जीआरपी थानाध्यक्ष अरविंद सिंह ने बताया कि लुटे यात्रियों को बोगी से नीचे उतारा गया। उनसे किन्नरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा तो कोई यात्री रिपोर्ट दर्ज कराने को तैयार नहीं हुआ।&lt;br /&gt;किन्नरों के खिलाफ चलेगा अभियान&lt;br /&gt;स्टेशन अधीक्षक ओमशिव अवस्थी ने बताया कि ट्रेन में चलने वाले किन्नरों के खिलाफ आरपीएफ व जीआरपी को लेकर अभियान चलाया जायेगा। यदि कोई किन्नर यात्री से पैसे अवैध रूप से वसूलते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।&lt;br /&gt;&lt;div&gt;साभार दैनिक जागरण &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-4712522399559061533?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/4712522399559061533/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=4712522399559061533' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4712522399559061533'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/4712522399559061533'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_21.html' title='किन्नरों का आतंक और प्रशासन लाचार'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-1055411053972454759</id><published>2009-12-12T02:30:00.000-08:00</published><updated>2009-12-12T02:32:40.280-08:00</updated><title type='text'>पैसे लेकर मर्डर की खबर पी गए?</title><content type='html'>जिलों में भ्रष्ट मीडिया और करप्ट ब्यूरोक्रेशी का घातक गठजोड़ कहर बरपाने लगा : बिहार के कटिहार जिले के इलेक्ट्रानिक मीडिया के एक पत्रकार ने किया खुलासा : कनीय अभियंता की हत्या के आरोपी अधिकारी को मीडिया का अभयदान : मीडियाकर्मियों के आगे इंसाफ के लिए गुहार लगा रही कनीय अभियंता की पत्नी : किसी ने हत्यारोपी के खिलाफ खबर नहीं दिखाई : जिसने खबर पर काम करने की कोशिश की उसे पत्रकारों ने ही गालियां दीं और धमकाया : हत्यारोपी के प्रभावशाली होने से पुलिस हाथ नहीं डाल रही : मेरा नाम नीरज कुमार झा है। मैं बिहार के कटिहार में लाइव इंडिया के लिए काम करता हूं। मुझे ये कहते हुए काफी शर्म आ रही है की यहां की पत्रकारिता की हालत बहुत ही खराब है। कटिहार में पत्रकारों का मन न्यूज का काम करने से ज्यादा पैसे के लेन-देन में लगता है। यहां 'खबरों की खबर' नाम से एक लोकल न्यूज़ चैनल कटिहार के डीएम की मेहरबानी पर चलता है। इसका काम बस यही है कि पत्रकारिता के नाम पर लोगो को परेशान करना और उनसे पैसे लेना।&lt;br /&gt;इन लोगों का दबदबा बहुत ज्यादा है। यहीं के एक स्थानीय पत्रकार ने राज्य सूचना आयोग में इस चैनल के अवैध प्रसारण को बंद करने की गुहार लगाई थी। आयोग से इसे बंद करने का आदेश भी कटिहार के डीएम को मिला फिर भी आज 4 माह बीत जाने के बाद भी चैनल धड़ल्ले से चल रहा है। इस चैनल के लोगों और कटिहार की मीडिया के ज्यादातर लोगों का मतलब खबर को ईमानदारी से चलाना नहीं बल्कि खबरों को जरिया बनाकर पैसे लेना होता है।&lt;br /&gt;जो पत्रकार इनके साथ इस धंधे में नहीं रहता वो या तो किसी चैनल में काम करने के काबिल नहीं माना जाता या फिर उसके काम में तरह-तरह की अड़चन पैदा की जाती है। एक घटना का जिक्र करना चाहूंगा। कटिहार के जिला शिक्षा अधीक्षक प्रेमचंद्र कुमार एक कनीय अभियंता की हत्या के आरोपी हैं। उन पर बिहार के मुख्यमंत्री के आदेश पर कटिहार के सहायक थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। केस नंबर 372/09 है। इसकी खबर कटिहार की मीडिया ने प्रसारित नहीं किया। वजह, जिला शिक्षा अधीक्षक प्रेमचंद्र कुमार से मोटी रकम इन लोगों ने हासिल कर लिया था।&lt;br /&gt;कटिहार की पुलिस में गहरी पैठ रखने वाले जिला शिक्षा अधीक्षक प्रेमचंद्र कुमार की गिरफ़्तारी तक नहीं हुई। दो छोटे-छोटे बच्चे के साथ रोती बिलखती कनीय अभियंता शशि भूषण प्रशाद की पत्नी कुमारी संगीता सिन्हा ने कटिहार के हर मीडिया वाले के सामने इंसाफ की गुहार लगाई पर जिले की मीडिया को किसी भावना या कर्तव्य से कोई लेना-देना नहीं। इनका ईमान सिर्फ पैसा है। पैसे जिला शिक्षा अधीक्षक प्रेमचंद्र कुमार ने दे ही दिया है तो खबर काहे की चलानी है। इन्होंने तो खबर अपने ऊपर वालों को भी नहीं बताया। लेकिन मैंने इसी खबर को अपने उपर बताया और मुझे खबर भेजने को कहा गया। लेकिन जब मैं जिला शिक्षा अधीक्षक प्रेमचंद्र कुमार के पास बाइट लेने गया तो उन्होंने कोई भी बाइट देने से इनकार कर दिया। कटिहार के मेरे मीडिया के भाई लोग मुझे गाली देने लगे और कहा कि तुम्हें जान से हाथ धोना है तो इस खबर को करो।&lt;br /&gt;मैं कटिहार का नहीं हूं इसलिए यहां के स्थानीय पत्रकार मुझे कुछ ज्यादा ही डराते धमकाते हैं। पर मेरी चिंता कनीय अभियंता शशि भूषण प्रसाद की पत्नी और उनके बच्चे हैं जो इंसाफ के लिए भटक रहे हैं पर उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले में अगर कोई मदद कर-करा पाए तो हम सब उम्मीद कर सकते हैं कि बहुत सारी खराब स्थितियों-परिस्थितियों के बावजूद पीड़ितों को अंततः न्याय मिल जाता है।&lt;br /&gt;-नीरज कुमार झा&lt;br /&gt;09431664370&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-1055411053972454759?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/1055411053972454759/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=1055411053972454759' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1055411053972454759'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/1055411053972454759'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post_12.html' title='पैसे लेकर मर्डर की खबर पी गए?'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-6186909593433080211</id><published>2009-12-10T23:17:00.000-08:00</published><updated>2009-12-10T23:24:40.042-08:00</updated><title type='text'>संसदीय परंपरा पर सवाल</title><content type='html'>&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राष्ट्र प्रश्नाकुल है। राष्ट्रजीवन में प्रश्नकाल है। ढेर सारे प्रश्न हैं, लेकिन संसद में शून्यकाल है। संसद देशकाल का दर्पण है। करोड़ों लोगों के हर्ष, विषाद, आस्था, अपेक्षा का सर्वोच्च प्रतिनिधि सदन है। सासद अपने क्षेत्र की जनता के प्रवक्ता और आशादीप हैं। वे इसीलिए मान्यवर हैं और सरकार की प्रत्येक गतिविधि पर सवाल करने, जवाब पाने के अधिकारी हैं, लेकिन बीते 30 नवंबर को सवाल पूछने वाले अधिकाश 34 मान्यवर अनुपस्थित थे। प्रश्नकाल थोड़ी ही देर चला। आहत लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि यह गंभीर मसला है। कार्यवाही का यह एक घटा ही लोकतंत्र का सार है। पिछले डेढ़-दो दशक से यह प्रवृत्ति बढ़ी है। 1989 में दो बार, 1988 में तीन और 1985 में पांच बार ऐसी ही स्थितिया आई हैं। हर दफा गंभीर वक्तव्य आते हैं, लेकिन अनुपस्थिति की मूल वजहों पर गंभीर चिंतन नहीं होता। कानून निर्माण के समय भी कोरम का अभाव रहता है। बजट चर्चा के समय भी सदस्य संख्या घट जाती है। महंगाई जैसे अखिल भारतीय आर्थिक प्रश्न पर भी उपस्थिति संतोषजनक नहीं थी। मूलभूत प्रश्न यह है कि मान्यवरों की सर्वोच्च प्राथमिकता क्या है? क्या उनके अपने उद्योग-व्यापार ही उनकी प्रथम वरीयता हैं? क्या राजनीति संसदीय कामकाज से ज्यादा सर्वोपरि है? क्या निमंत्रण, भोज या उद्घाटन संसदीय कार्यवाही और बहुमूल्य प्रश्नकाल की तुलना में ज्यादा औचित्यपूर्ण हैं?&lt;br /&gt;प्रश्नोत्तर संसदीय परंपरा का प्राणतत्व है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने काफी संघर्ष के बाद अंग्रेजी सत्ता से प्रश्नकाल की बहाली करवाई थी। अंग्रेज अपने यहा पार्लियामेंट चलाते थे, लेकिन उपनिवेशों में तानाशाही थी। भारत, अमेरिका आदि उपनिवेश जवाबदेह संसदीय परंपरा की माग कर रहे थे। 1857 के स्वाधीनता संग्राम में ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। 1861 के भारतीय परिषद अधिनियम में भारत की विधान परिषद को कानूनी कामकाज तक ही सीमित किया गया था। भारतवासी प्राचीन प्रश्नकाल परंपरा की बहाली चाहते थे। संघर्ष के चलते 1892 के अधिनियम में प्रश्न करने का अधिकार स्वीकार हुआ। अनुपूरक प्रश्नों की छूट नहीं थी। अंग्रेजों ने 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम से यह छूट भी दी, लेकिन प्रश्न पूछने और उत्तर पाने की वास्तविक स्थिति 1919 के मोंटेगो चेम्सफोर्ड सुधारों से मिली। ब्रिटिश संसद स्वयं में संप्रभु थी, लेकिन भारतीय विधान परिषद पर गवर्नर जनरल का वीटो था। इसी पद्धति के विकास से भारत ने ब्रिटिश संसदीय परंपरा अपनाई।&lt;br /&gt;कायदे से ब्रिटिश संसद के 1935 के अधिनियम को शून्य करके अपनी संसदीय प्रणाली बनानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केंद्रीय सत्ता संसद के प्रति जवाबदेह है। प्रश्नकाल संसद का दिव्य मुहूर्त है। प्रश्नाकुल राष्ट्र के जनप्रतिनिधि प्रश्नाकुल होने चाहिए, लेकिन खामिया भी हैं। पहली लोकसभा में स्वीकार 43,725 प्रश्नों में से केवल 61 प्रतिशत प्रश्नों के ही उत्तर मिले। दूसरी लोकसभा में 24,631 प्रश्न स्वीकृत हुए, लेकिन 47 प्रतिशत का ही जवाब मिल पाया। तीसरी में 56,355, चौथी में 93,538, पाचवीं में 98,606, छठवीं में 50,144 और सातवीं में 1,02,959 प्रश्न स्वीकृत हुए। उत्तर का प्रतिशत 35 से 39 के बीच ही रहा। नौवीं से लेकर बारहवीं लोकसभा में उत्तर प्रदेश 20 से 25 प्रतिशत के आसपास रहा। संसदीय प्रश्नों की गुणवत्ता घटी है। सरकार की जवाबदेही गैर-जिम्मेदाराना हुई है। प्रश्नों के उत्तर की तैयारी में लाखों रुपये खर्च होते हैं। एक घटे के प्रश्नकाल पर 15-20 लाख रुपये का खर्च होता है। प्रश्नों से सरकार को मदद मिलती है। सरकारी कामकाज और प्रशासन में चुस्ती आती है। राष्ट्र के समक्ष हजारों प्रश्न हैं। गरीबी, भुखमरी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजी-रोजगार और सरकार प्रायोजित पुलिस अत्याचार के चीखते प्रश्न हैं। नक्सलपंथ, जिहादी आतंक, अलगाववाद और क्षेत्रीयताओं के प्रश्न नींद हराम कर चुके हैं। भाषाई हिंसा, बाग्लादेशी घुसपैठ और बाजारवादी अर्थव्यवस्था से कमजोर होती राष्ट्र-राज्य की शक्ति के प्रश्न अनुत्तरित हैं। यहा प्रश्न ही प्रश्न हैं। प्रश्नों का देशकाल है। बावजूद इसके प्रश्न पूछने वाले ही गायब हो रहे हैं।&lt;br /&gt;सवाल पूछने वाले भी उत्तर देने को बाध्य किए जाने चाहिए। पहले ऐसी परंपरा थी। पहली लोकसभा की अनुपस्थिति संबंधी समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि लोकसभा को अधिकार है कि वह अनुपस्थित सदस्य से कारण पूछे। सभा के प्रति सदस्यों का कर्तव्य सर्वोपरि है। वे सभा से तभी अनुपस्थित हों जब अनुपस्थित होने के लिए विवश किए जाएं। नियम समिति ने छुट्टी लेने के नियम 1950 में बनाए। अनुपस्थिति संबंधी समिति ने जुलाई 1957 में कहा कि अनुपस्थिति का कारण बीमारी बताए जाने पर डाक्टरी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी, लेकिन गैरहाजिरी से चिंतित सदन ने एक सदस्य से डाक्टरी प्रमाण पत्र भी मागा। अध्यक्ष मावलंकर ने तमाम आदर्श अपनाए। उन्होंने 1951 में मा की बीमारी व 1953 में स्वयं की बीमारी की छुट्टी मागी। सदन में उनके संदेश पढ़े गए। 1953 में सिंचाई मंत्री गुलजारी लाल नंदा ने भी लिखित छुट्टी मागी। 1952 में वित्त मंत्री देशमुख ने राष्ट्रमंडल की बैठक में जाने के लिए और कृषि मंत्री एसके पाटिल ने 1960 में अमेरिका यात्रा के लिए लिखित छुट्टी ली। लोकसभा में सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति छुट्टी वाले आवेदनो पर विचार करती है। समिति को उपस्थिति के संबंध में अनेक अनुषंगी अधिकार हैं। संसद या विधानमंडल की सदस्यता विशेषाधिकार देती है। मोटा भत्ता, वेतन, ढेर सारी सुविधाएं, हनक और ठसक देती हैं। सदस्यता अपराधी और माफिया को भी माननीय बनाती है, लेकिन सदस्य उन्मुक्त नहीं हैं। वे सदन की सेवा के लिए ही वेतन पाते हैं। उनकी अनुपस्थिति प्रत्येक दृष्टि से अक्षम्य है। लोकसभा के अध्यक्ष सदस्यों की अनुपस्थिति संबंधी समिति को गैरहाजिरी की बढ़ती प्रवृत्ति पर रिपोर्ट देने के निर्देश दें। एक दिन की भी गैरहाजिरी पर कारण बताओ नोटिस जारी होना चाहिए। दलों के सचेतक और नेता केवल वोट वाले दिन ही उपस्थिति सुनिश्चित कराते हैं। शेष समय अपने सदस्यों को छुट्टा रखते हैं। सदन की कार्यवाहिया निराश करती हैं। राष्ट्रीय समस्याओं पर भी गंभीर चर्चा नहीं होती। संसद और विधानमंडलों को गरिमामय बनाना राष्ट्रीय आवश्यकता है।&lt;br /&gt;संसद की सेवा ही हमारे सासदों की सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों नहीं है? भारत में प्राचीनकाल से ही प्रश्नोत्तर परंपरा है। ऋग्वेद में सैकड़ों प्रश्न हैं। उत्तर वैदिक काल का समूचा दर्शन प्रश्नोत्तर है। वाल्मीकि रामायण में राम ने भरत से खेती-किसानी और राज्य व्यवस्था से जुड़े तमाम प्रश्न पूछे थे। यक्ष-युधिष्ठिर सवाल-जवाब विश्वविख्यात हैं। महाभारत का सभापर्व संसदीय परंपरा की शान है। सभा में जानबूझकर न जाना और जाकर चुप रहना पाप है। सभा में घटित दोष का आधा पाप अध्यक्ष पर, एक चौथाई मौन सदस्यों पर और बाकी एक चौथाई गलती करने वालों पर पड़ता है। प्राचीन भारत के राजकाज में प्रश्न थे, उनके उत्तर थे, लेकिन इस्लामी, अंग्रेजी राज ने राजा की जवाबदेही घटाई। स्वाधीनता संग्राम सेनानियों ने इसकी पुनस्र्थापना की। स्वतंत्र भारत की राजनीति ने इसका कबाड़ा कर दिया है। संसदीय परंपरा को संवारना, संव‌िर्द्धत करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है। जनता सर्वोच्च न्यासी है। जनगणमन देखे, जाचे कि उसके प्रतिनिधि क्या कर रहे हैं?&lt;br /&gt;[हृदयनारायण दीक्षित: लेखक उप्र सरकार के पूर्व मंत्री हैं]&lt;/p&gt;साभार दैनिक जागरण&lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;br /&gt; &lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-6186909593433080211?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/6186909593433080211/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=6186909593433080211' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6186909593433080211'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6186909593433080211'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='संसदीय परंपरा पर सवाल'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-5378525424642457615</id><published>2008-08-30T07:08:00.000-07:00</published><updated>2008-08-30T07:11:12.078-07:00</updated><title type='text'>इस्लामी आतंकवाद का असली पैरोकार बना सिमी</title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;&lt;strong&gt;राजीव कुमार&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt; यूं तो भारत वर्षों से आतंकवाद  का दंश झेलता रहा है, लेकिन पहले यह केवल कश्मीर घाटी तक सीमित था। किन्तु समय बीतने के साथ-साथ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ने अपना ध्यान देश के अन्य शहरों में भी देना शुरू किया। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति बदलते  हुए भारत के अंदर आतंकी समूह बनानी शुरू की और  स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया अर्थात सिमी के रूप में उसे एक मजबूत और भरोसेमंद साथी भी मिला। आज हालात यह है कि सिमी अपने दम पर देश भर में आतंकी कार्रवाइयों को बेखौफ होकर अंजाम दे रहा है। सिमी का मानस पुत्र इंडियन मुजाहिदीन इस्लाम के नाम पर अपने कुकृत्यों को जायज ठहराता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     भारत ही नही विश्व भर में आतंकियों का एक ऐसा संगठन है, जो इस्लाम के नाम पर अन्य धर्मावलंबियों की खात्में की बात करता है। इन संगठनों के द्वारा चलाये जा रहे इस्लामिक आतंकवाद ने पूरे दुनिया में तांडव मचा रखा है। इसके आतंक से पूरी दुनिया त्राहि माम-त्राहि माम कर रही है। ये इस्लामिक आतंकवादी  कुरान की कुछ आयतों का सहारा लेकर पूरी दुनिया से काफिरों को खत्म कर इस्लामिक राज्य की स्थापना करने का दु:स्वप्न देख रहे हैं। ये आतंकी अपनी आतंककारी, विध्वंसक घटनाआें को अंजाम देने में कुरान के आयतों का हवाला देकर इसे जायज ठहराने से गुरेज नही करते।  वैसे आमतौर पर देखा जाता है कि इस्लाम के मानने वाले कट्टर मुसलमान कहीं भी हो वो उस देश के कानून, संविधान, राष्ट्रीय गीत को नही मानते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     हिन्दुस्तान में भी मुसलमानों का एक कट्टरपंथी वर्ग जो जिन्ना के मानसिकता का है, वो आतंकियों के इस इस्लामिक जेहाद का समर्थन कर रहा है। और वह पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी आईएसआई के हांथों का खिलौना बनने को तैयार हो गया है। कश्मीर का ही उदाहरण लिया जाए तो वहां भारत सरकार ने कितना आर्थिक सहयोग किया है, कितनी सुविधाएं मुहैया कराईं हैं मगर कश्मीर के मुसलमान उस सहयोग को हवा में उड़ा देते हैं। वे सिर्फ पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने और वहां के झंडे फहराने में ही अपनी वफादारी समझते हैं। कश्मीरी मुसलमानों कीे भारत की धर्म निरपेक्षता में जरा सी भी आस्था नही है। वहां की पीडीपी, नेशनल कांग्रेस जैसी सरीखी पार्टियां भी अलगाववादियों के सुर में अपना सुर मिला रही हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     आज विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकियों व देश में इनका समर्थन करने वाले कट्टरपंथियों के कारण हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे में है। वैसे इस देश में लोकतंत्र तभी तक कायम रहेगा जब तक हिन्दू बहुसंख्यक है। मुसलमानों के बहुसंख्यक होने पर यह अपने धर्मनिरपेक्ष छवि को कायम नही रख पाएगा। दुरर्र्र््भाग्य से कुछ राजनीतिक पार्टियां अपने मुस्लिम परस्ती रणनीति व वोट बैंक के चलते आतंकवाद को और बढ़ाने का काम कर रही हैं। सपा के आका मुलायम सिंह खुलकर सिमी का समर्थन कर रहे हैं। अभी हाल ही में माननीय न्यायधीश श्रीमती गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली पंचाट पीठ ने  सरकार पर  सिमी पर प्रतिबंध जारी रहने के पक्ष में पर्याप्त सबूत न देने का आरोप लगाते हुए सिमी पर से प्रतिबंध हटा दिया तो लालू यादव, राम विलास पासवान जैसे नेता बड़ी बेशर्मी  और बेहयाई से इसका स्वागत किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     जिस राष्ट्र के नेता आतंकवाद जैसी देश को विध्वंस करने वाली घटनाओं का जिसमें हजारों बेगुनाहों की अकाल मौत हो जाती है, का भी पूरी तरह से राजनीतिकरण कर दिये हों, वहां पर आतंकवाद नासूर बनेगा ही। संभव है कि देश को रसातल में जाने में देर नही लगेगी। इतिहास साक्षी है कि यह देश अपने देश के गद्दारों के कारण ही हारा है। आज इतिहास अपने आप को एक बार फिर दुहरा रहा है। भला हो उच्चतम न्यायालय का जिसने अपने विवके का इस्तेमाल करते हुए सिमी पर प्रतिबंध जारी रखा। इस केन्द्र सरकार से पूंछा जाना चाहिए कि जो साक्ष्य व तथ्य वो अब उच्चतम न्यायालय के समक्ष रख रही है वही साक्ष्य व तथ्य उच्च न्यायालय के  पंचाट के समक्ष क्यों नही रखा। पूरे देश को यह जानने का अधिकार है कि श्रीमती गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली पंचाट पीठ ने ऐसा आरोप क्यों लगाया कि ''सरकार ने सिमी पर प्रतिबंध लगाने के पर्याप्त सबूत नही पेश किये''। मगर सच्चाई यही है कि संप्रग की सरकार ने पोटा जैसे कानून को आतंकियों के भलाई के लिए हटाया। आज आतंकवाद का बढ़ना इसी का दुष्परिणाम है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    इस देश में आतंकियों का समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को इंडिया टुडे में छपे अप्रैल, 2003 के उस साक्षात्कार को जरूर पढ़ना चाहिए जिसमें सिमी के मुखिया सफदर नागौरी ने बड़े बेबाकी से कहा था कि हिन्दुस्तान को सबक सिखाने के लिए आज महमूद गजनवी की जरूरत है। मुस्लिमों के रहने के लिए यह देश तभी मुकम्मल होगा जब यहां इस्लाम का शासन होगा। इतना ही नही सिमी खुलकर अलकायदा व आजाद कश्मीर का समर्थन करता है। सिमी के आका नागौरी के नारको टेस्ट के बयान को सुनें तो पता चलता है कि अलीगढ़ में सिमी की व्यापक गतिविधियां हैं। सिमी अब सिमी के नाम से ही नही बल्किी इंडियन मुजाहिदीन के नाम से भी अपनी गतिविधियों को जारी किये हुए हैं।&lt;br /&gt;     सिमी का संबंध अरब की राबता कमेटी के छात्र संगठन बामी और इंटरनेशनल इस्लामिक फेडरेशन ऑफ स्टूडेंट से भी है। सिमी के ही गुर्गों ने 2002 में गुप्तचर ब्यूरो के राजन शर्मा का अपहरण कर अलीगढ़ मुस्लिम विश्व विद्यालय के हबीब हॉल में ले जाकर बर्बरता पूर्वक वस्त्र विहीन करके पीटा था। 1997 में अलीगढ़ के सिविल लाइन क्षेत्र में सिमी का राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, जिसमें सिमी के कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। उन दिनों नागौरी सिमी का राष्ट्रीय महासचिव था। खुफिया सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2001 में सिमी पर प्रतिबंध लगा तो इस संगठन के दो फाड़ हो गए। एक गुट हार्ड लाइन था तो दूसरा लिबरल कोर।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     इतना ही नही सिमी के कार्यकर्ता आतंकवाद का प्रशिक्षण लेने पाकिस्तान-अफगानिस्तान के दौरे पर  अक्सर जाते रहते हैं। गुजरात, कर्नाटक बम विस्फोट इसके ताजा उदाहरण हैं। सिमी कानपुर में भयानक दंगा करा चुका है। इसमें सिमी ने कानपुर में कुरान जलाने की झूठी अफवाह फैला दी, इससे कानपुर कई दिनों तक दंगों की आग में जलता रहा। कई बेकसूरों की बलि चढ़ी और अरबों-खरबों की संपत्ति श्वाहा हो गई। सिमी को भारत की धर्म निरपेक्षता फूटी आंखों भी नही सुहाती है। सिमी भारत को एक इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है। इसी के कारण उसका आदर्श अमेरिका का मोस्ट वांटेड ओसामा बिन लादेन व  दुनिया में तबाही मचाने वाला तालिबान हैं।&lt;br /&gt;    यही नही मदरसों में भी सिमी की भारी घुसपैठ है। क्योंकि यहां इस्लाम और कट्टरता की शिक्षा उसके कंटकाकीर्ण मार्ग को और सुगम बना देते हैं। इन मदरसों को चलाने के लिए सिमी को विपुल मात्रा में अरब देशों से धन मिल रहा है। कुछ अर्सों से अरब, सीरिया, ईरान का रूझान मुस्लिम कट्टरपंथी देशों की तरफ हुई है। ये मुस्लिम देश भारत में अपने पक्ष में भारी जनमत बनाना चाहते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    विशेषकर अमेरिका विरोधी जेहाद में क्यूबा, ईरान, सीरिया आदि देशों की संदेहास्पद भूमिका से खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। सिमी के पक्ष में कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं का आना मुस्लिम तुष्टीकरण का भी तुष्टीकरण है। मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए यह गंदा खेल पूर्व में कांग्रेस खेलती थी मगर इस खेल में अब क्षेत्रीय दल भी पारंगत हो गए हैं। यहां तक कि वामदल भी मुस्लिमों को तुष्ट करने में किसी से पीछे नही है। उनके द्वारा पश्चिम बंगाल में सत्ता के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों को समर्थन देना जग जाहिर है। पिछले केरल विधानसभा चुनाव में वामपंथी दलों ने मुस्लिमों को रिझाने में कोई कोई कोर-कसर नही छोड़ी। राजनीतिक दलों द्वारा वोट बैंक के खातिर मुस्लिमों के प्रति पूर्ण समर्पण  देश को कहीं का नही छोड़ेगी। क्योंकि जब सिमी जैसे आतंकी संगठनों की तरफदारी खुलकर राजनीति के बाजार में होने लगती है तो देश का हित चाहने वाले लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचना स्वाभाविक है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     अभी हाल ही में राजस्थान और कुछ दूसरे प्रदेशों में जेहादी घटनाओं को अंजाम देने वाले लश्कर और सिमी मोर्चे के एक संगठन ने एक घोषणा पत्र निकाला। इस घोषणा पत्र में चंद पंक्तियों को पढ़ने के बाद  सब कुछ स्पष्ट हो जाता है कि वे हिन्दुओं के प्रति कितनी घृणा रखते हैं, उसके कुछ अंश इस प्रकार हैं - ''हिन्दुओं के खिलाफ जेहाद करना अल्लाह की इजाजत है। हिन्दू व कुछ अन्य हमारे विरोधी हैं। इसलिए उनके विरूध्द ज़ेहाद हमारी मजहबी अनुमति है। अगर हम लड़ते-लड़ते खत्म हो जाते हैं तो जन्नत में हमारे लिए काफी स्थान है।''&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     इस घोषणा पत्र में और भी विष-वमन किया गया है-''हिन्दुओं को अपने 33 करोंड़ नंगे और गंदे देवताओं को मानने की गलती समझ लेना चाहिए। ये सारे हिन्दू मिलकर  भी हमारे हांथों से कटती हुई गर्दनों की रक्षा नही कर पाएंगे।'* इस घोषणा पत्र में धमकी दी गई है कि ''अगर हिन्दू  अपना रवैया नही बदले तो मुहम्मद गोरी और गजनवी फिर आकर इस देश में कत्लेआम करेंगे। हम यह भी दुनिया को दिखला देंगे कि इस धरती पर हिन्दुओं का खून सबसे सस्ता है।'' बाबरी ढांचा जमींदोह होने के बाद सिमी ने देश को गोरी, गजनवी द्वारा रौंदे जाने की याद दिलाई थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     एक ओर सिमी जैसे आतंकवादी संगठनों की आक्रामकता तो दूसरी ओर कांग्रेस की आतंकवाद पर लुंजपुंज, ढीली व नरम रवैया देश में विध्वंसकारी घटनाओं को बढ़ाने में भारी मदद कर रही है। इस देश को पता है कि आंध्र प्रदेश में कांग्रेस ने माओवादियों के साथ समझौता करके चुनाव जीता था। बाद में उन्हें भारी रियायतें दी गई। इसी प्रकार पूर्वोत्तर के राज्यों में उसने उल्फा के साथ गठजोड़ कर  फतह हासिल किया। यह सभी को विदित है कि चुनावों में उल्फा जैसे आतंकी संगठनों की मदद से चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उन्हें तमाम तरह के छूट व मदद करने की कांग्रेस की पुरानी चाल रही है। जम्मू-कश्मीर में तो उसकी लंबी फेहरिस्त है। वहां तो कांग्रेस आतंकियों को कबाब और बिरियानी भी खिलाती थी। उनके पकड़े जाने की स्थिति में आतंकवादियों को सुरक्षित रास्ता भी देती थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     भोले-भोले बेगुनाह नागरिकों के खून की कीमत पर वोट बैंक की राजनीति करने का काम उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे अनेंक राज्यों में होता रहता है। कांग्रेस हमेशा इस बात से भय खाती रही कि आतंकवाद को सख्ती से कुचलने पर उसका मुस्लिम वोट-बैंक बिगड़ जाएगा। इससे यही साबित होता है कि कांग्रेस ने मुसलमानों को आतंकवाद का समर्थक मान लिया है। एक प्रकार से उसने आतंकवाद को मुस्लिम वोट बैंक से जोड़कर देश के धर्म निरपेक्ष मुसलमानों के साथ घोर अन्याय का काम किया है। यही वजह है जिसके चलते संसद पर हमला करने का मुख्य आरोपी अफजल गुरू की फांसी अनिश्चित काल के लिए रोक लगा दी गई है। और तो और कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री गुलामनवी आजाद ने यह धमकी दी कि अगर अफजल गुरू को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार फांसी दी गई तो श्रीनगर जलकर खाक हो जाएगा। कांग्रेस ने इसके बाद बड़े बेहयाई से घुटने टेक दिये।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     हकीकत यह है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में आतंकवाद के मसले पर सबसे नाकाम, नपुंसक और अक्षम सरकार साबित हुई है। कांग्रेस अपने विपक्षी पार्टी को बहुत सफाई से उत्तर देती है कि कारगिल पर हमला, तीन खूंखार आतंकवादियों को कंधार छोड़ना और अक्षरधाम पर हमला क्या था। यानी कि विपक्षी पार्टियों के शासन काल में आतंकवाद की  घटनाएं हुई थी इसलिए हमारे शासन काल में ये घटनाएं दुहराई जाएंगी। यह सच्चाई है कि आतंकवाद की घटनाएं राजग सरकार के समय में हुई थी। ये घटनाएं अमेरिका तक में हो गई हैं और अभी हाल में चीन के सिक्यांग प्रांत में भी हुईं है। राजनीतिक दलों को चाहिए कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करें। वे एकता का परिचय देते हुए आतंकवाद के नासूर को जड़ से खत्म करें। इस मुद्दे पर राजनीति की जाएगी तो देश खोखला हो जाएगा। आज एक कड़े कानून की सख्त जरूरत है, जिससे आतंकवाद पर लगाम लगाया जा सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;    कांग्रेस का कहना है कि पोटा से आतंकवाद पर काबू नही पाया जा सकता। इस कानून के द्वारा किसी एक वर्ग को परेशान किया जा रहा है। मगर कांग्रेस को यह याद रखना चाहिए कि जब एक ही वर्ग आतंकवाद में लिप्त पाया जा रहा है तो क्या हमारे सुरक्षा एजेंसियों को उनसे पूंछतांछ भी करने का हक नही है। उसके लिए भी सबूत दिया जाएगा तब बात हो सकती है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अगर कोई दल राजनीति करता है तो यही समझा जाएगा कि वो इस देश का दुश्मन है। आने वाली पीढ़ियां ऐसी राष्ट्रद्रोही पार्टियों को कभी माफ नही करेंगी। मुसलमानों को भी पोटा जैसे सख्त कानून को लागू करवाने के लिए आगे आना चाहिए। आज कोई आतंकवादी घटना होती है तो यदि कोई मुसलमान पकड़ा जाता है तो कुछ मानवाधिकार संगठन झूठ-मूठ का हो-हल्ला मचाते हैं कि बेवजह मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है। जबकि सैकड़ों लोग जब बम विस्फोटों में मारे जाते हैं तो ये मानवाधिकार संगठन सोए रहते हैं। मानों ये मानवाधिकार संगठन न होकर दानवाधिकार संगठन हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;     अभी हाल ही में यह निर्णायक प्रमाण मिले हैं कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन तथा उसके मित्र दलों का आतंकवाद के प्रति बिल्कुल नरम रवैया है, प्रमाण यह है कि कांग्रेस पार्टी के राम नरेश यादव, बसपा के  अकबर अहमद डंपी और समाजवादी पार्टी के अबू आजमी ने मुफ्ती अबू बशीर  के आजमगढ़ गांव का दौरा किया था। इसके अतिरिक्त दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम सैय्यद बुखारी ने भी मुफ्ती  अबू बशीर के गांव का दौरा किया था- वो बशीर जो सिमी का मास्टर माइंड  है तथा जिसे अहमदाबाद के धमाकों में लिप्त पाये जाने के कारण गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सनद रहे कि इन  धमाकों में 55 बेगुनाह लोग मारे गए थे और करीब 150 घायल हो गए थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  जहां पूरे देश में गुजरात पुलिस द्वारा मुफ्ती अबू बशीर तथा अन्य नौ लोगों की इन धमाकों तथा देश के अन्य राज्यों में धमाके में लिप्त होने पर त्वरित गिरफ्तारियां होने तथा मामले का शीघ्रताशीघ्र खुलासा करने के लिए हर जगह प्रसंशा हो रही है वहीं कांग्रेस, सपा, बसपा और कांग्रेस के नेताओं ने आतंक के इन दोषियों के विरूध्द साक्ष्य की परवाह किये बिना उनके गांव का दौरा किया। इन राजनैतिक दलों के कुत्सित इरादे तब प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं, जब वे आतंक के विरोध में की जाने वाली किसी भी ठोस कार्रवाई को किसी संप्रदाय विशेष के विरूध्द कार्रवाई बताकर उनकी निंदा करते हैं।&lt;br /&gt;    &lt;br /&gt;    गृहमंत्री हकीकत जानने से इंकार करते हैं और इस्लामी आतंकवादियों को गुमराह किये गए बच्चे बताते हैं। इससे बड़ा तुष्टीकरण और क्या हो सकता है। सपा, बसपा, लोजपा और कांग्रेस द्वारा आतंकवादियों के साथ हमदर्दी का प्रत्यक्ष प्रदर्शन आतंकवाद को समर्थन देने के समान है। पूरे देश की जनता को चाहिए कि आतंक का समर्थन करने वाले इन नेताओं का चुनाव के समय बहिष्कार किया जाए। वर्ना इस देश का भविष्य ही विध्वंस हो जाएगा। जनता को चाहिए कि ऐसे नेताओं का विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरें। तभी आतंकवाद पर लगाम लग सकता है। क्योंकि राजनीतिक नेता जनता की सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझ रहे हैं।&lt;br /&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-5378525424642457615?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/5378525424642457615/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=5378525424642457615' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5378525424642457615'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/5378525424642457615'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2008/08/blog-post_30.html' title='इस्लामी आतंकवाद का असली पैरोकार बना सिमी'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-6934265350828934834</id><published>2008-08-18T20:11:00.000-07:00</published><updated>2008-08-18T20:28:49.369-07:00</updated><title type='text'>कश्मीरियत का मतलब</title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;स्वप्न दास  गुप्ता&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;                                               &lt;br /&gt;कश्मीरियत का मतलब सभ्य समाज के लिए इंटरनेट के फायदों से कौन इनकार कर सकता है, लेकिन संचार का यह माध्यम अब चरमपंथ और अलगाववाद का भी उपकरण बन गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में मुझे किसी डा. अब्दुल रुफ कोलाचल का लेखन पढ़ने को मिला। वह जेएनयू में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के स्कालर होने का दावा करते हैं। उनके बारे में थोड़ी-बहुत और खोजबीन करने पर पता चला कि कोलाचल का जन्म तमिलनाडु में हुआ और वह मैसूर विश्वविद्यालय में अध्यापन कर चुके हैं। उनके कुछ लेख एक कश्मीरी समाचार पत्र में भी छप चुके हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अलगाववाद समर्थक कश्मीरवाच डाट काम में वह भारत के खिलाफ अपना गुस्सा उतारते हैं-भारतीय मीडिया ने पैसे और समर्थन के आधार पर छद्म राष्ट्रवादी शक्तियों के एक बड़े वर्ग का निर्माण कर भारतीय शासकों की सफलतापूर्वक मदद की है। अपने आरोप के समर्थन में वह बीजिंग में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा के मीडिया में छा जाने का उदाहरण देते हैं। वह लिखते हैं-जब एक भारतीय ने निशानेबाजी में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता तो पूरे देश और खासकर मुस्लिम विरोधी मीडिया ने उनकी बड़ी-बड़ी तस्वीरों के साथ उनकी उपलब्धि को आजादी के बाद की सबसे महत्वपूर्ण घटना बताया। निशानेबाजी तो आतंकी गतिविधियों के लिए जरूरी कौशल है और भारतीय जिस तरह शूटिंग में मिले पदक की सराहना कर रहे हैं उससे भारतीयों की आतंकवाद समर्थक मानसिकता उजागर होती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; भारतीय मानसिकता के संदर्भ में इस नवीन अंतदर्ृष्टि में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि ऐसी मानसिकता का क्या वास्तव में अस्तित्व है, बल्कि यह है कि इसके बीज उन लोगों द्वारा बोए जा रहे हैं जो इस्लाम की आजादी के आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। सोचे-समझे ढंग से किया जा रहा यह प्रयास कश्मीर घाटी में तेजी से अपना असर फैला रहा है। शायद इस कोशिश से हमें चौंकना नहीं चाहिए। पिछले दो दशक से घाटी के अलगाववादी नेता ने दोहरे आचरण और दोहरी भाषा में महारथ हासिल कर ली है। उदाहरण के लिए हुर्रियत कांफ्रेंस के नेतृत्व ने अपनी एक भाषा मीडिया, बौद्धिक जनों तथा पश्चिमी राजनयिकों के लिए आरक्षित कर ली है। इस भाषा में सशक्तीकरण, सभ्य समाज, दोहरी संप्रभुता जैसे शब्दों का जमकर इस्तेमाल किया जाता है। अलगाववादियों का एक और पक्ष तब प्रकट हो जाता है जब उनके नेता अपने साथियों से बात करते हैं। जरा हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के उस बयान पर निगाह डालिए जो उन्होंने अमरनाथ यात्रा के संदर्भ में दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; गिलानी कहते हैं-भारत सरकार ने एक खास मकसद से अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को कश्मीर भेजा है। इस कृत्रिम तीर्थस्थल में यात्रियों और पर्यटकों को भेजने के पीछे कश्मीर पर अपना कब्जा मजबूत करने का मकसद है ताकि आगे चलकर कश्मीर के संदर्भ में भी वैसा ही दावा किया जा सके जैसा दावा फलस्तीन क्षेत्र के लिए यहूदी करते हैं। इस मकसद को पूरा करने के लिए ही अमरनाथ श्राइन बोर्ड की स्थापना की गई। कश्मीरियों को अमरनाथ यात्रा से कभी परेशानी नहीं हुई, लेकिन एक बार जब यह यात्रा अपना कब्जा मजबूत करने का उपकरण बन गई तो कश्मीरियों को चिंता हुई। अब जरा कल्पना करें कि तोगडि़या जैसे लोग यदि यह कहने लगें कि हज का स्थान आतंकवादी विचारधारा के प्रसार का उपकरण बन गया है और इसे रोका जाना चाहिए तब क्या होगा? यह भी तो कहा जा सकता है कि पहले से तंग हमारे हवाई अड्डे हाजियों के आवागमन का बोझ नहीं उठा सकते और यह भी कि विशेष हर्ज टर्मिनल स्थापित करना भारतीय पहचान को नष्ट करने का कार्य करेगा। क्या ऐसे विचार व्यक्त करने वाले लोगों को एक दिन के लिए भी बख्शा जाएगा? कश्मीर में चल रहे आंदोलन का न तो कश्मीरी पहचान से कोई लेना-देना है और न ही उस विशिष्ट कश्मीरियत से जिस पर गिलानी जोर दे रहे हैं। यह एक स्पष्ट अलगाववादी आंदोलन है, जो इस मान्यता पर आधारित है कि एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एक पृथक इस्लामी राज्य अवश्य होना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; अब इसे गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में हुए बम धमाकों से अलग नहीं रखा जा सकता। ये बम धमाके भी इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा लोकतंत्र और राष्ट्रवाद की अस्वीकृति की घोषणा हैं। दूसरी तरह कहें तो भारत की एकता और व्यक्तित्व पर दोहरा आघात किया जा रहा है। इसका दिखाई देने वाला एक स्वरूप घाटी में है और दूसरा अदृश्य स्वरूप अन्यत्र हमारे शहरों में बम धमाकों के रूप में महसूस किया जा सकता है। इन दोनों स्वरूपों को नियंत्रित करने वाली ताकतें एक ही हैं, जैसा कि गुजरात पुलिस ने गत दिवस खुलासा किया। कश्मीरी अलगाववादी भारत से अलग हो जाना चाहते हैं, क्योंकि वे अपने लिए पृथक राज्य चाहते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; इसके लिए उन्होंने 1990 में घाटी से अल्पसंख्यक हिंदुओं को बाहर निकाल दिया। सिमी और इंडियन मुजाहिदीन हिंदू भारत को तबाह कर देना चाहते हैं, क्योंकि वे केवल एक इस्लामिक राज्य में रह सकते हैं। हुर्रियत कांफ्रेंस के पास खासा जन समर्थन है और अब आतंकवाद ने व्यापक घरेलू नेटवर्क बना लेने के प्रमाण दिए हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब घाटी की घटनाओं को राष्ट्रीयता के लिए खतरा बताते हैं तब वह सही होते हैं, लेकिन आश्चर्य है कि वह जम्मू के आंदोलन की तुलना कश्मीर में चल रहे घटनाक्रम से कर बैठते हैं। इस दृष्टिकोण का खोखलापन श्रीनगर में स्वतंत्रता दिवस पर उजागर हो गया जब अलगाववादियों ने लाल चौक पर भारतीय ध्वज तहस-नहस कर दिया और उसके स्थान पर पाकिस्तान का झंडा फहरा दिया। दूसरी ओर जम्मू में यह आम जनता का स्वतंत्रता दिवस था, जहां केवल एक ध्वज-भारतीय तिरंगा लहरा रहा था। क्या हम अब भी राष्ट्रवादियों की तुलना उन लोगों से कर सकते हैं जो भारत को तोड़ देना चाहते हैं? (लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं,&lt;br /&gt; दैनिक जागरण)&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/5538096573682186144-6934265350828934834?l=deshhit.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://deshhit.blogspot.com/feeds/6934265350828934834/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=5538096573682186144&amp;postID=6934265350828934834' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6934265350828934834'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/5538096573682186144/posts/default/6934265350828934834'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://deshhit.blogspot.com/2008/08/blog-post.html' title='कश्मीरियत का मतलब'/><author><name>Rajeev Kumar</name><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='16' height='16' src='http://img2.blogblog.com/img/b16-rounded.gif'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-5538096573682186144.post-2437267957119039241</id><published>2007-07-24T02:11:00.002-07:00</published><updated>2008-08-13T20:10:05.446-07:00</updated><title type='text'></title><content type='html'>&lt;div align="left"&gt;                      &lt;span style="font-size:180%;"&gt;&lt;strong&gt;यात्राओं का महत्व&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;दीनानाथ &lt;span class=""&gt;मिश्र&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;                    जब कोई व्यक्ति अपनी सोच या विचारधारा को सामान्य जनमानस तक पहुंचाना चाहता है तो उसके सामने यात्रा सबसे विकल्प के रूप में उभरती है। यात्रा का महत्व जितना प्राचीन काल में था, उतना ही आज है। यात्रा का स्वरूप भले ही बदला हो लेकिन उद्देश्य आज भी वही है। सामाजिक तथा राजनैतिक दोनों तरह की यात्राएं जनचेतना फैलाने का ही कार्य करती हैं। इसमें यह जरूर निर्भर करता है कि यात्रा करने वाले की प्रतिभा और उद्देश्य क्या है। सामान्यत: वही यात्राएं सफल होती हैं जो तत्कालीन समाज की रूपरेखा से हटकर एक नई सोच और दिशा प्रदान करती हैं। जिन यात्राओं ने इतिहास रचा है, उस पर नजर डालें गौतम बुध्द, शंकराचार्य, महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, आडवानी और चन्द्रशेखर की यात्राएं महत्वपूर्ण हैं। इन सभी ने समानय विचारधारा से हटकर एक नई विचारधारा देने की कोशिश की थी। यात्रा सफल होने पर जन सैलाब उसी के अनुरूप सोचने लगती है और अंतत: अपने उद्देश्यों को पाने में सफल रहती है। भारत की यात्राओं पर राजीव कुमार ने भारत के तीन वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर, पॉयनियर के संपादक चंदन मित्रा व दीननाथ मिश्रा से बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश:&lt;br /&gt;    यात्राओं के बारे में दीनानाथ मिश्र जी का कहना है कि:&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                                                          शिक्षा की दृष्टि से यात्रा का काफी महत्व है, क्योंकि यात्रा करने वाला अपनी यात्रा से कुछ न कुछ शिक्षा जरूर ग्रहण करता है। जो व्यक्ति जितना ज्यादा संवेदनशील होता है वो उतना ही उस यात्रा से लाभ लेकर लोगो को कुछ दे सकता है। उदाहरण के तौर पर महर्षि बाल्मीकि ने मैथून रत क्रौंच पक्षी   को बहेलिया द्वारा मारते देख उन्हें बहुत गहरी संवेदना हुई और उन्होंने एक महाकाव्य ही रच डाला। बहुत से यात्री जब यात्रा पर जाते हैं तो अपनी अच्छी आदत के मुताबिक डायरी में सब कुछ नोट करते रहते हैं क्योंकि उन्हें अपनी स्मृति शक्ति पर विश्वास नही रहता है। लेकिन बहुत से लोग हैं, जिन्हें उस दृश्य से कोई मतलब नही रहता है। यात्रा करने वाले यात्री के पास निरीक्षण क्षमता रहनी चाहिए। व्यक्ति को विकासोन्मुख होना चाहिए। अगर उस समय उसका ध्यान कहीं और है तो वो यात्रा से वो कुछ भी ग्रहण नही कर पाएगा साथ में, उसका परिवार कैसा है यह 
